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Maharashtra: 'बाइक टैक्सी' की अनुमति पर अनिश्चित्ता को लेकर भड़का बॉम्बे HC, राज्य सरकार की लगा दी क्लास

Tue, 10 Jan 2023 02:52 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 10 Jan 2023 02:52 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य में बाइक टैक्सी की अनुमति देने वाली नीति तैयार करने में अनिश्चितता के लिए महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि आप कब तक इस मामले को लटकाते रहेंगे।

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Bombay High Court pulls up Maha govt for uncertainty over policy for permitting bike taxis
बॉम्बे हाईकोर्ट

विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य में बाइक टैक्सी की अनुमति देने वाली नीति तैयार करने में अनिश्चितता के लिए महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई और कहा कि उसे किसी न किसी रूप में अपना रुख स्पष्ट करना होगा। जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस एस जी डिगे की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को अधर में लटकाकर नहीं रख सकती है और उसे तुरंत फैसला लेना होगा। पीठ पुणे और मुंबई में रैपिडो बाइक टैक्सी सेवाओं के संचालक रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो राज्य सरकार द्वारा 29 दिसंबर, 2022 को जारी एक संचार के खिलाफ थी, जिसमें उन्हें बाइक टैक्सी एग्रीगेटर लाइसेंस की अनुमति देने से इनकार किया गया था।

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सरकार ने दी दलील
सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने मंगलवार को अदालत को बताया कि आज की तारीख में बाइक टैक्सी चलाने की अनुमति नहीं है, क्योंकि सरकार ने इसके लिए कोई नीति या दिशानिर्देश जारी नहीं किया है।
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सराफ ने कहा कि सरकार ने वास्तव में एक ऐसी एग्रीगेटर कंपनी को बिना लाइसेंस के बाइक टैक्सी चलाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ऐसे मामलों में कैरेज लाइसेंस की आवश्यकता होती है। 
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सरकार के जवाब से असंतुष्ट दिखा हाईकोर्ट 
सरकार की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि सरकार की दलीलें तर्कविहीन है। सरकार कभी कहती है कि ऐसी बाइक टैक्सी तब तक नहीं चल सकती जब तक नीति नहीं बनाई जाती है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं कर रही है कि वह अपनी नीति कब लाएगी। नीति या दिशानिर्देशों के अभाव में आप कैसे मना कर सकते हैं? आप इसे किसी अन्य आधार पर मना कर सकते हैं लेकिन आप इसे इस तरह आग पर लटका कर नहीं रख सकते। आपको निर्णय लेना होगा, भले ही यह अस्थायी आधार पर हो। जस्टिस पटेल ने कहा, हमें सरकार के रुख को स्वीकार करना मुश्किल लगता है।

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