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Bombay High Court: कैंसर से बेटे मौत, मां ने संरक्षित वीर्य मांगा; फर्टिलिटी क्लिनिक को अदालत ने दिया अहम आदेश

Fri, 27 Jun 2025 03:22 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 27 Jun 2025 03:22 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मां की याचिका पर अहम आदेश पारित किया है। अदालत ने एक फर्टिलिटी क्लिनिक को आदेश दिया है कि याचिका पर सुनवाई पूरी होने तक मृतक के फ्रोजन सीमेन को सुरक्षित रखा जाए। कोर्ट ने 30 जुलाई को अगली सुनवाई होने की बात कही है। जानिए क्या है पूरा मामला

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Bombay High Court order Mother demand dead son semen fertility clinic to preserve frozen sample know in hindi
बॉम्बे हाई कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

मुंबई के एक प्रजनन केंद्र में अविवाहित युवक ने अपना वीर्य संरक्षित कराया था। हालांकि, युवक की मौत हो चुकी है। अब मृतक की मां ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मृतक की मां ने परिवार का वंश आगे बढ़ाने की दलील देते हुए अदालत से गुहार लगाई है कि फर्टिलिटी क्लिनिक को बेटे का वीर्य उन्हें सौंपने का आदेश दिया जाए। याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने क्लिनिक को आदेश दिया कि सुनवाई पूरी होने तक फ्रोजन सीमेन को संरक्षित रखा जाए।

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मृतक बेटे का वीर्य क्यों चाहती है मां, क्लिनिक ने देने से क्यों इनकार किया
अदालत पहुंची इस मां की दलील है कि फर्टिलिटी क्लिनिक ने उसके बेटे का वीर्य देने से इनकार कर दिया। क्लिनिक ने कहा है कि वीर्य संरक्षित कराते समय युवक ने कहा था कि उसकी मौत के बाद वीर्य-शुक्राणुओं को नष्ट कर दिया जाए। इस संबंध में उसने सहमति पत्र पर साइन भी किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक कैंसर पीड़ित इस युवक ने अपने इलाज और कीमोथेरेपी सेशन के दौरान वीर्य को फ्रीज कराकर संरक्षित रखने का फैसला लिया था।

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30 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति मनीष पिताले की पीठ ने 25 जून को आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि अगर मृतक के फ्रोजन सीमेन को याचिका पर सुनवाई पूरी होने से पहले ही नष्ट कर दिया जाएगा तो याचिका बेमानी हो जाएगी। इसलिए सुनवाई पूरी होने तक सीमेन को संरक्षित रखा जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।

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मृतक की मां ने 2021 के कानून के तहत अहम सवाल उठाए
फर्टिलिटी क्लिनिक को फ्रोजन सीमेन सुरक्षित रखने का निर्देश देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, याचिकाकर्ता ने सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) कानून, 2021 के प्रावधानों के तहत महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। इसलिए क्लिनिक को वीर्य के नमूने के सुरक्षित रखरखाव और भंडारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है।

कैंसर पीड़ित युवक ने मौत से पहले वीर्य प्रिजर्व कराया
कोर्ट ने कहा कि फरवरी में अपनी मृत्यु के समय युवक अविवाहित था। उसने इससे पहले अपना वीर्य प्रीजर्व करा लिया था। ऐसे में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके वीर्य को संरक्षित करने के तरीके के संबंध में उठाए गए महत्वपूर्ण वैधानिक प्रश्नों का जवाब देना होगा।

मौत के बाद नष्ट करने को लेकर परिवार से सलाह नहीं
महिला ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि बेटे ने परिवार में परामर्श किए बिना ही सहमति पत्र पर साइन कर मौत होने पर वीर्य को नष्ट किए जाने की बात कही थी। बेटे की मौत के बाद मां ने कहा कि भविष्य की कार्यवाही के लिए वीर्य के नमूने मुंबई से गुजरात स्थित आईवीएफ केंद्र लाने की अनुमति दी जाए।

महिला ने नए कानून के प्रावधानों के तहत अपील की, क्या हैं नए नियम?
बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाली मां का कहना है कि प्रजनन केंद्र (फर्टिलिटी) ने उसकी मांग पूरी करने से इनकार करते हुए नए कानून के तहत अदालत में अपील दायर करने को कहा। नए कानून में सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) क्लीनिकों के विनियमन और पर्यवेक्षण का प्रावधान किया गया है। इस कानून का मकसद नैतिक प्रथाओं को सुनिश्चित करना, दुरुपयोग को रोकना और एआरटी सेवाओं की मांग करने वाले व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना भी है।

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