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गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में आंदोलन न करें जरांगे: मंत्री विखे पाटिल की अपील, बोले- बातचीत से निकलेगा हल
Wed, 16 Sep 2026 04:36 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 16 Sep 2026 04:36 PM IST
सार
महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने मनोज जरांगे से गणेशोत्सव के दौरान प्रस्तावित मुंबई आंदोलन वापस लेने की अपील की है। इस बीच जरांगे का अनशन 19वें दिन पहुंच गया और वह मुंबई की ओर बढ़ रहे हैं।
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राधाकृष्ण विखे पाटिल, मंत्री, महाराष्ट्र सरकार
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे से गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में प्रस्तावित आंदोलन वापस लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान केवल बातचीत और चर्चा के जरिए ही निकाला जा सकता है। आंदोलन को रोकने के लिए सरकार का बल प्रयोग करने का कोई इरादा नहीं है।
विखे पाटिल, जो मराठा आरक्षण मुद्दे पर सरकार की कैबिनेट उप-समिति के प्रमुख हैं, ने बताया कि सरकार इस मुद्दे का अध्ययन करने वाले लोगों के संपर्क में है। जब भी आवश्यकता होगी, सरकार मराठा समाज और उनके प्रतिनिधियों से चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की आलोचना पर कहा कि समुदाय के कुछ लोग मान रहे हैं कि शिंदे ने उनके भरोसे को तोड़ा है, लेकिन लोगों को यह भावना अपने मन से निकाल देनी चाहिए क्योंकि शिंदे ने इस दिशा में कई ठोस कदम उठाए थे।
मंत्री ने कहा कि कोर्ट की अवमानना का खतरा होने के बावजूद उस समय करीब 5,500 बच्चों को अवसर दिए गए थे और एसईबीसी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई थी। सरकार ने समाज की भावनाओं का आदर करते हुए कई योजनाएं लागू की हैं और भविष्य के लिए बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं किए। उन्होंने कहा कि सरकार की केवल यही उम्मीद है कि गणेशोत्सव के पावन पर्व पर पुणे से मुंबई की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो और कोई अप्रिय घटना न घटे।
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ये भी पढ़ें: नागपुर से शुरुआत: अभिजीत दीपके ने कर दिया एलान, गढ़चिरौली से सीजेपी शुरू करेगी 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान
दूसरी ओर, मनोज जरांगे के अनशन का बुधवार को 19वां दिन पूरा हो गया। वह जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव से निकलने के लगभग 14 घंटे बाद सुबह 11 बजे बीड जिले के पाटोदा पहुंचे। उनका काफिला अहिल्यानगर, पुणे और रायगढ़ जिले के खोपोली से होते हुए 19 सितंबर को मुंबई पहुंचेगा।
पिछले साल भी आजाद मैदान में जरांगे की भूख हड़ताल से दक्षिण मुंबई की रफ्तार पूरी तरह थम गई थी और हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए थे। तब सरकार ने उनकी आठ में से छह मांगें स्वीकार कर ली थीं और कुनबी जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके बाद 2 सितंबर 2025 को आंदोलन खत्म हुआ था। हालांकि, इस बार भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार सख्त रुख अपना रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था संभालना पुलिस का काम है, साथ ही उन्होंने गणेशोत्सव के समय आंदोलन करने की जरूरत पर भी सवाल खड़े किए हैं।
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विखे पाटिल, जो मराठा आरक्षण मुद्दे पर सरकार की कैबिनेट उप-समिति के प्रमुख हैं, ने बताया कि सरकार इस मुद्दे का अध्ययन करने वाले लोगों के संपर्क में है। जब भी आवश्यकता होगी, सरकार मराठा समाज और उनके प्रतिनिधियों से चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की आलोचना पर कहा कि समुदाय के कुछ लोग मान रहे हैं कि शिंदे ने उनके भरोसे को तोड़ा है, लेकिन लोगों को यह भावना अपने मन से निकाल देनी चाहिए क्योंकि शिंदे ने इस दिशा में कई ठोस कदम उठाए थे।
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मंत्री ने कहा कि कोर्ट की अवमानना का खतरा होने के बावजूद उस समय करीब 5,500 बच्चों को अवसर दिए गए थे और एसईबीसी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई थी। सरकार ने समाज की भावनाओं का आदर करते हुए कई योजनाएं लागू की हैं और भविष्य के लिए बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं किए। उन्होंने कहा कि सरकार की केवल यही उम्मीद है कि गणेशोत्सव के पावन पर्व पर पुणे से मुंबई की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो और कोई अप्रिय घटना न घटे।
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दूसरी ओर, मनोज जरांगे के अनशन का बुधवार को 19वां दिन पूरा हो गया। वह जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव से निकलने के लगभग 14 घंटे बाद सुबह 11 बजे बीड जिले के पाटोदा पहुंचे। उनका काफिला अहिल्यानगर, पुणे और रायगढ़ जिले के खोपोली से होते हुए 19 सितंबर को मुंबई पहुंचेगा।
पिछले साल भी आजाद मैदान में जरांगे की भूख हड़ताल से दक्षिण मुंबई की रफ्तार पूरी तरह थम गई थी और हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए थे। तब सरकार ने उनकी आठ में से छह मांगें स्वीकार कर ली थीं और कुनबी जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके बाद 2 सितंबर 2025 को आंदोलन खत्म हुआ था। हालांकि, इस बार भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार सख्त रुख अपना रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था संभालना पुलिस का काम है, साथ ही उन्होंने गणेशोत्सव के समय आंदोलन करने की जरूरत पर भी सवाल खड़े किए हैं।