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Maharashtra: हाईकोर्ट से POCSO के आरोपी को जमानत; ठाणे में नाबालिग लड़की का पीछा कर हमला करने का आरोपी बरी

Tue, 15 Apr 2025 01:01 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 15 Apr 2025 01:01 PM IST
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Bombay High Court has given bail to POCSO accused Thane court acquitted Man of assaulting minor girl
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2020 में 15 वर्षीय लड़की के साथ दुष्कर्म के एक मामले में POCSO आरोपी को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता अपने काम और फैसलों को लेकर स्पष्ट थी, हालांकि उसकी उम्र 18 वर्ष से कम थी। इस बीच ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने नाबालिग लड़की का पीछा करने और उस पर हमला करने के आरोपी 25 वर्षीय व्यक्ति को उसके खिलाफ पर्याप्त सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए बरी कर दिया।

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ठाणे वाले मामले में विशेष न्यायाधीश डीएस देशमुख ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और पीछा करने और आपराधिक धमकी, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 से निपटने वाले अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोपी को बरी कर दिया। 4 अप्रैल के आदेश की एक कॉपी सोमवार को उपलब्ध कराई गई।
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ठाणे कोर्ट में दी गईं दलीलें और सफाई
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अगस्त 2020 से 8 जनवरी, 2021 के बीच 15 वर्षीय लड़की का पीछा किया और उसके सम्मान को ठेस पहुंचाई। बचाव पक्ष के वकील सुधाकर आर. पारद ने आरोप का विरोध किया और अभियोजन पक्ष और पुलिस जांच में खामियां उजागर कीं।
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ठाणे की विशेष कोर्ट ने आदेश में क्या कहा?
न्यायाधीश देशमुख ने अपने आदेश में पर्याप्त साक्ष्य के महत्व पर जोर देते हुए कहा, 'ऐसी परिस्थितियों में अभियुक्त को दोषी ठहराने के लिए केवल पुष्टि करने वाले साक्ष्य पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।' अभियोजन पक्ष ने तीन गवाह पेश किए- लड़की, उसके पिता और जांच अधिकारी। अदालत ने माना कि जन्म प्रमाण पत्र से यह साबित होता है कि पीड़िता नाबालिग थी। लड़की के पिता की गवाही अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं करती है। उन्होंने गलतफहमी की वजह से अभियुक्त के खिलाफ झूठा बयान देने की बात स्वीकार की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि लड़की ने अपनी गवाही में स्वीकार किया कि उसने अभियुक्त के साथ अपनी दोस्ती तोड़ने के लिए उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उसने यह भी कहा था कि वह अपना बयान दर्ज कराते समय डर गई थी। कोर्ट ने पाया कि बयानों से लड़की और अभियुक्त के बीच दोस्ती का पता चलता है। कोर्ट ने आगे कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने लड़की के सम्मान को नुकसान पहुंचाने और उसे बदनाम करने के इरादे से इंस्टाग्राम पर उसके साथ तस्वीरें पोस्ट की थीं।

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