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डोर-टू-डोर टीकाकरण: अदालत ने बीएमसी से कहा- आप तैयार हैं तो हम देंगे मंजूरी

Wed, 19 May 2021 09:34 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 19 May 2021 09:34 PM IST
सार

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) से बुधवार को पूछा कि क्या यह संभव है कि उन वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए घर-घर जाकर कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाए जो टीकाकरण केंद्रों पर जाने में असमर्थ हैं। अदालत ने बीएमसी से कहा है कि अगर वह इसके लिए तैयार है तो केंद्र की ओर से इनकार के बावजूद वह अनुमति देने के लिए तैयार है।

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Bombay high court asks BMC if it can do door to door vaccination of specific group
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

मुख्य न्यायाधीश दिपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ ने कहा कि अगर बीएमसी इन समूहों के लिए घर-घर जाकर टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने की इच्छुक है तो उच्च न्यायालय उन्हें इसकी अनुमति देगी। भले ही, केंद्र सरकार ने ऐसे अभियान के लिए सहमति नहीं दी हो।

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पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार घर-घर जाकर टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने की इच्छुक नहीं है। अगर बीएमसी कहती है कि वह घर-घर जाकर टीकाकरण शुरू कर सकती है तो हम उन्हें इसके लिए अनुमति प्रदान करेंगे। केंद्र सरकार की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।
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अदालत ने बीएमसी के आयुक्त इकबाल चहल को गुरुवार को एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। इसमें उसे बताना है कि वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और बिस्तर से न उठ सकने या व्हीलचेयर पर आश्रित लोगों को उचित चिकित्सा देखभाल के साथ घरों में टीका दे सकती है या नहीं।
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गुरुवार को होगी आगे की सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट इस मामले में अब गुरुवार को आगे सुनवाई करेगी। अदालत ने कोविड-19 महामारी के तेजी से फैलने का जिक्र करते हुये कहा कि ऐसे वक्त में एक एक दिन कीमती है। अदालत दो अधिवक्ताओं धृति कपाड़िया और कुनाल तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। 


बता दें कि इस जनहित याचिका में अदालत से 75 साल से अधिक आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों और शारीरिक रूप से दिव्यांग व अपने घरों में बिस्तर पर ही रहने को मजबूर व्यक्तियों के लिए घर-घर टीकाकरण अभियान चलाने के लिए केंद्र सरकार को उचित निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

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