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मेट्रो कारशेड जमीन विवादः हाईकोर्ट ने कहा- महाराष्ट्र सरकार जमीन स्थानांतरण का आदेश ले वापस
Mon, 14 Dec 2020 11:22 PM IST
संजीव कुमार झा
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 14 Dec 2020 11:22 PM IST
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बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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मेट्रो कारशेड के लिए कांजुरमार्ग की 102 एकड़ जमीन हस्तांतरित करने के मामले में राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार को हाईकोर्ट ने जोरदार झटका दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी की ओर से कांजुरमार्ग में मेट्रो कारशेड के लिए हुए जमीन हस्तांतरण आदेश में कई खामियां है। इसलिए राज्य सरकार या तो इसे वापस ले, अन्य़था हम इसे खारिज करके सभी पक्षों को सुनने के बाद जिलाधिकारी को दोबारा आदेश जारी करने को कहेंगे।
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सोमवार को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता व न्यायमूर्ति गिरीष कुलकर्णी की खंडपीठ ने जमीन हस्तानांतरण को लेकर जारी किए गए आदेश पर कहा कि जमीन को लेकर सीविल कोर्ट में मामला प्रलंबित है। फिर भी जिलाधिकारी ने कानूनी प्रक्रिया के तहत मामले से जुड़े सभी पक्षों को सुने बगैर जमीन के हस्तांतरण का आदेश जारी कर दिया।
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इसलिए प्रथम दृष्टया हमे यह आदेश खामियों से ग्रसित नजर आ रहा है। लिहाजा राज्य सरकार इस आदेश को वापस ले और सभी पक्षों को सुनने के बाद जिलाधिकारी नया आदेश पारित करे, अन्यथा हम इस आदेश को रद्द कर देंगे और कानूनन दोबारा निर्णय लेने को कहेंगे। खंडपीठ ने राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी को इस बारे में बुधवार तक जानकारी देने को कहा है।
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इससे पहले कुंभकोणी ने इस मामले में थोड़ा वक्त मांगा। वहीं, एडिशनल सालिसिटर जनरल अनिल सिंह ने खंडपीठ से कलेक्टर के आदेश को रद्द करने का निवेदन किया। इस मामले में हस्तक्षेप आवेदन करनेवाले महेश कुमार गरोडिया के वकील श्याम मेहता ने खंडपीठ को सिविल कोर्ट में प्रलंबित दावे (सूट) की जानकारी दी और कहा कि सिविल कोर्ट ने अंतरिम आदेश भी जारी किया है।
गरोडिया ने कांजुरमार्ग की जमीन पर अपना दावा किया है जिनके पक्ष को नहीं सुना गया है। खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले की सुनवाई 16 दिसंबर 2020 तक के लिए स्थगित कर दी।
महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने पूर्ववर्ती देवेन्द्र फडणवीस सरकार के दौरान आरे कालोनी में बनाए जा रहे मेट्रो कारशेड को रद्द कर इसे कांजुरमार्ग में स्थानांतरित कर दिया है। इसके बाद केंद्र सरकार ने जिलाधिकारी की तरफ से एमएमआरडीओ को मेट्रो कारशेड के लिए जमीन हस्तानांतरण किए जाने के खिलाफ याचिका दायर हुई है जिस पर सुनवाई चल रही है।
याचिका में मुख्य रुप से मुंबई उपनगर के जिलाधिकारी की ओर से जमीन स्थनांतरण को लेकर 1 अक्तूबर 2020 को जारी किए गए आदेश को चुनौती दी गई है। केंद्र सरकार का दावा है कि जमीन पर उसका मालिकाना हक है। इसलिए जिलाधिकारी का आदेश अवैध है। इसलिए इसे रद्द कर दिया जाए।