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Hindi News ›   India News ›   Bombay High Court: After 24 years of punishment in the corruption case of Rs 350 Bombay High Court reversed the decision

Bombay High Court: 350 रुपये के भ्रष्टाचार मामले में सजा के 24 साल बाद फैसला, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा फैसला

Fri, 01 Jul 2022 05:33 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 01 Jul 2022 05:33 PM IST
सार

साल 1988 में महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने दामू अवहध (उस समय सब-इंस्पेक्टर थे) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 350 रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया था।

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Bombay High Court: After 24 years of punishment in the corruption case of Rs 350 Bombay High Court reversed the decision
court new - फोटो : istock

विस्तार

रिश्वत मामले में एक पूर्व पुलिसकर्मी को दोषी ठहराए जाने और एक साल जेल की सजा सुनाए जाने के चौबीस साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया, जिसमें कहा गया था कि बचाव पक्ष 350 रुपये की रिश्वत मांगने के तथ्य को साबित करने में विफल रहा है।
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दरअसल साल 1988 में महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने दामू अवहध (उस समय सब-इंस्पेक्टर थे) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 350 रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया था। अगस्त 1998 में, नासिक की एक विशेष अदालत ने अवहध को दोषी ठहराया और उन्हें एक साल जेल की सजा सुनाई। आरोपी पुलिसकर्मी ने उसी साल हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।
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न्यायमूर्ति वी जी बिष्ट की एकल पीठ ने गुरुवार को एक आदेश पारित किया जिसमें कहा गया कि केवल धन की बरामदगी ही आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है और बचाव पक्ष भी अवहध के खिलाफ जुर्म साबित नहीं कर पाया है। अदालत ने अवहध को बरी कर दिया, जो उस समय नासिक जिले के येवला तालुका पुलिस स्टेशन में उप-निरीक्षक के रूप में तैनात थे।
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जमानत देने के लिए रिश्वत लेने का था आरोप
बचाव पक्ष के अनुसार, मार्च 1988 में अवहध ने अपने भाई को जमानत देने के लिए एक व्यक्ति से 350 रुपये की मांग की थी।  इसके बाद उसने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद एसीबी ने जाल बिछाया और शिकायतकर्ता द्वारा रिश्वत की राशि का भुगतान करने के बाद, अवहध को गिरफ्तार कर लिया और उससे 350 रुपए की रिश्वत की राशि बरामद की।


अदालत ने किया बरी
अदालत ने अवध को बरी करते हुए कहा, ' रिश्वत की मांग और राशि की स्वीकृति के संबंध में किसी भी ठोस सबूत के अभाव में आरोपी द्वारा केवल राशि की प्राप्ति ही अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। पीठ ने आगे कहा कि शिकायतकर्ता को अपने भाई को जमानत पर रिहा करने के लिए पैसे का भुगतान करने के लिए कहा गया था और उस व्यक्ति को लगा कि अवध रिश्वत की मांग कर रहा था। न्यायमूर्ति बिष्ट ने कहा कि यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि अवध ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की कोई मांग की थी।
 
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