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पुलिस पर हमले का मामला: टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू और नक्का की बढ़ी मुश्किलें, HC का केस रद्द करने से इनकार

Mon, 13 May 2024 01:49 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 13 May 2024 01:49 PM IST
सार

न्यायमूर्ति मंगेश पाटिल और न्यायमूर्ति शैलेश ब्रह्मे की खंडपीठ ने 10 मई को अपने फैसले में कहा कि कथित अपराध में नायडू और बाबू की संलिप्तता को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत है। इस बात को लेकर अदालत को कोई संदेह नहीं है। 
 

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Bombay HC refuses to quash case against ex-AP CM Chandrababu Naidu IN Assault on cops CASE
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और टीडीपी नेता नक्का आनंद बाबू की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने नायडू और बाबू के खिलाफ महाराष्ट्र में 2010 में पुलिसकर्मियों पर कथित रूप से हमला करने के मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है।

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10 मई को दिया फैसला
न्यायमूर्ति मंगेश पाटिल और न्यायमूर्ति शैलेश ब्रह्मे की खंडपीठ ने 10 मई को अपने फैसले में कहा कि कथित अपराध में नायडू और बाबू की संलिप्तता को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत है। इस बात को लेकर अदालत को कोई संदेह नहीं है। 
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अदालत ने तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) प्रमुख नायडू और बाबू द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में धर्माबाद पुलिस में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी। 
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बता दें, प्राथमिकी एक लोक सेवक के खिलाफ हमला करने या आपराधिक बल का उपयोग करने, खतरनाक हथियारों से नुकसान पहुंचाने, दूसरों के जीवन को खतरे में डालने वाले जल्दबाजी के कामों, शांति भंग करने और आपराधिक धमकी को भड़काने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने के आरोपों में दर्ज की गई थी।

अदालत ने कहा- पर्याप्त सबूत 
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उसे इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि इस मामले में दोनों आवेदकों (नायडू और बाबू) की संलिप्तता का खुलासा करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी में स्पष्ट रूप से नायडू पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने साथी कैदियों को उकसाया और यहां तक कि दोनों राज्यों के बीच लड़ाई होने की धमकी भी दी।

पीठ ने कहा कि गवाहों ने अपने बयानों में अपराध में नायडू और बाबू की भूमिका होने की बात कही है और चिकित्सा प्रमाणपत्रों से पता चलता है कि कई पुलिस अधिकारियों को चोटें आई थीं। इससे साफ है कि पुलिसकर्मियों पर हमला करने के साझा इरादे से अपराध को अंजाम दिया गया।

इसमें कहा गया है कि प्राथमिकी तुरंत दर्ज की गई और यहां तक कि घायल पुलिसकर्मियों की भी तुरंत चिकित्सा जांच की गई। पीठ ने दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया, लेकिन दोनों के वकील सिद्धार्थ लूथरा के अनुरोध पर पूर्व में दी गई अंतरिम सुरक्षा को आठ जुलाई तक बढ़ा दिया।


क्या है मामला?
तेलंगाना के पूर्व सीएम एन चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ वर्ष 2022 में हत्या के प्रयास और दंगा भड़काने के मामले में केस दर्ज किया गया था। मामला अन्नामय्या का है। जहां चंद्रबाबू नायडू की पार्टी ओर से निकाली गई एक जनसंपर्क यात्रा के दौरान टीडीपी और वाईएसआरसीपी कार्यकर्ता के बीच झड़प हुई थी। इस घटना के बाद अन्नामय्या जिला पुलिस ने चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। ये मामला वाईएसआरसीपी नेता उमापति रेड्डी ने मुदीवेडु पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने पुंगनूर में दंगों के पीछे एक साजिश का आरोप लगाया था। एफआईआर में चंद्रबाबू का नाम A1 कर दिया गया है। ए2 के रूप में देवीनेनी उमा और ए3 के रूप में अमरनाथ रेड्डी के नाम जोड़े गए थे। 

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