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2016 Arson Case: बॉम्बे HC ने वकील सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका की खारिज, कहा- प्रथम दृष्टया आरोप सही

Tue, 31 Jan 2023 06:07 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 31 Jan 2023 06:07 PM IST
सार

सुरेंद्र गाडलिंग 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में भी आरोपी है। 

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Bombay HC refuses bail to advocate Surendra Gadling in 2016 arson case today update news
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने मंगलवार को 2016 के सुरजागढ़ लौह अयस्क खदान में आगजनी मामले में अधिवक्ता सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति विनय जोशी और न्यायमूर्ति वाल्मीकि एसए मेनेजेस की खंडपीठ ने कहा कि सुरेंद्र गाडलिंग पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं।

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न्यायमूर्ति विनय जोशी और न्यायमूर्ति वाल्मीकि एसए मेनेजेस की खंडपीठ ने मामले में फैसला सुनाने से पहले अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों और अन्य तथ्यों का अध्ययन और अवलोकन किया। इसके बाद पीठ ने कहा कि सबूतों को देखने के बाद यह मानने के लिए उचित आधार है कि गाडलिंग के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सत्य हैं। पीठ ने आगे कहा कि सूरजागढ़ की घटना के संबंध में अपीलकर्ता (गाडलिंग) की संलिप्तता और प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) में उसकी सदस्यता पाई गई है।  
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पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमलावर न केवल ट्रकों के चालकों (जिन्हें आग लगाई गई थी) के मन में आतंक पैदा करने के एक सामान्य इरादे से काम कर रहे थे, बल्कि उस क्षेत्र में खनन गतिविधि को रोकने के इरादे से काम कर रहे थे। इसके कारण आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ उस क्षेत्र में स्थापित कारखानों की सुरक्षा का भी खतरा पैदा हुआ।
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उच्च न्यायालय ने आगे कहा कि गाडलिंग के घर से जब्त की गई हार्ड डिस्क को देखने से साफ हो गया है कि वह प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) से जुड़ा था। गाडलिंग न केवल प्रतिबंधित संगठन के कुछ सदस्यों के वकील के थे, बल्कि वह फंड जुटाने और पैसे को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि गाडलिंग के खिलाफ साजिश का हिस्सा होने और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उकसाने के आरोप, साथ ही भाकपा (माओवादी) की प्रत्यक्ष सदस्यता होने के आरोप प्रथम दृष्टया सच हैं।

गौरतलब है कि 25 दिसंबर साल 2016 को माओवादियों ने कथित रूप से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सूरजगढ़ खदानों से लौह अयस्क के परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 76 वाहनों में आग लगा दी थी। इस मामले में अधिवक्ता सुरेंद्र गाडलिंग पर माओवादियों को सहायता प्रदान करने का आरोप है। उन पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।


गौरतलब है कि सुरेंद्र गाडलिंग 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में भी आरोपी है। 

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