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Hindi News ›   India News ›   BMC to start AI-based voice tests within a week to detect Covid-19

मुंबई मे शुरू होगा नया प्रयोग, आवाज से होगी कोरोना की जांच

Sun, 09 Aug 2020 09:21 PM IST
मुकेश कुमार झा सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sun, 09 Aug 2020 09:21 PM IST
सार

  • 30 सेकंड में पता चलेगा कोरोना संक्रमित हैं या नहीं
  • इस्राइल की कंपनी से आज होगा एमओयू करार

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BMC to start AI-based voice tests within a week to detect Covid-19
कोरोना वायरस - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए एक नया प्रयोग शुरू होने जा रहा है। वह है आवाज के जरिए यानि वॉइस टेस्टिंग के माध्यम से कोरोना की जांच। मजे की बात यह है कि इससे आधे सेकंड में पता चल जाएगा कि व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित है या नहीं।

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मुंबई के पश्चिमी उपनगर गोरेगांव स्थित नेस्कों कोविड सेंटर की डीन डॉ. नीलम एन्ड्राडे ने बताया कि आवाज की जांच से व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव है या निगेटिव होने की जानकारी 30 सेकंड में ही मिल जाएगी। सोमवार को इज्राईल की कंपनी वोकैलिस हेल्थकेयर और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के बीच एमओयू साइन होगा।
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उसके बाद इसी सप्ताह से आवाज के माध्यम से कोरोना की जांच शुरू हो जाएगी। हालांकि अब तक कोरोना की जांच के लिए स्वैब जांच, एंटीजन टेस्ट या फिर एंटीबॉडी टेस्ट किया जाता है। लेकिन, नए प्रयोग में व्यक्ति के आवाज की ध्वनितरंगों के माध्यम से इंसान के कोरोना पॉजिटिव या निगेटिव होने की जानकारी मिलेगी।

कोरोना संक्रमित होने पर बदल जाती है व्यक्ति की आवाज

डॉ. नीलम ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने पर सांस लेने में कठिनाई होती है और फेफड़ों की मांसपेशियों को प्रभावित करती हैं। फेफड़ों की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है जिससे आवाज भी बदल जाती है। इस बदली हुई आवाज से यह पता लगाया जा सकेगा कि व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है या निगेटिव। इससे यह भी पता लग सकेगा कि कोरोना के लक्षण होने पर आवाज ही प्रभावित होती है या गले की दूसरी समस्या भी सामने आती है। जो सांस छोड़ते हैं उसमें भी फर्क होता है। उससे पता किया जा सकेगा व्यक्ति में लो रिस्क है माडरेट रिस्क है या सीबीर रिस्क है। उसके तहत मरीज का उपचार किया जा सकेगा।

बायो मार्कर ऐप से होगी जांच, नहीं छुपाए जा सकेंगे लक्षण

डॉ. नीलम बताती हैं कि अभी यह तय नहीं है कि कोरोना का संक्रमण अभी कितना दिन चलेगा। इसलिए इस एप के जरिए आवाज की जांच से कोरोना महामारी के प्रसार को नियंत्रित करने में बड़ी मदत मिलेगी। आमतौर पर देखा गया है कि एयरपोर्ट और रेलवे प्लेटफार्म पर लोगों के पल्स टेंपरेचर की जांच की जाती है। लेकिन यात्रा करने वाले अधिकतर मुसाफिर पैरासिटॉमॉल या क्रोसीन जैसी दवाईयां ले लेते हैं जिससे उनके शरीर का टेंपरेचर सामान्य हो जाता है। वैसे भी टेंपरेचर की जांच से 9 फीसदी ही आंकलन किया जा सकता है। लेकिन आवाज की जांच में कोरोना के लक्षण को छुपाया नहीं जा सकेगा।  

मोबाईल फोन में डाउनलोड किया जा सकेगा एप

बायो मार्कर ऐप को किसी भी मोबाईल फोन या टैबलेट में डाउनलोड किया जा सकता है। इसमें न रक्त का नमूना इकट्ठा करना है और न स्वैब इकट्ठा करना है। बल्कि उसमें बात करनी है। डॉ. नीलम ने बताया कि अब तक के प्रयोग से यह सामने आया है कि बायो मार्कर एप के जरिए आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस से आवाज की जांच के माध्यम से 80 फीसदी सही नतीजे सामने आए हैं। 

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