दूसरे नंबर पर रहकर भी मुंबई का ताज हथियाने की कोशिश करेगी भाजपा
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बीएमसी चुनाव में अप्रत्याशित प्रदर्शन करने वाली भाजपा को गणितीय आंकडे़ में बेशक शिवसेना से दो सीटें कम मिली हैं, लेकिन पार्टी की ओर से पहली कोशिश अपने दम पर मुंबई का ताज हथियाने की होगी। भाजपा की जीत के नायक बनके उभरे सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेशक कहा है कि शिवसेना से गठबंधन पर फैसला पार्टी की कोर समिति करेगी, लेकिन सूत्र बताते हैं कि पार्टी ने विकल्पों पर मंथन शुरू कर दिया है।
अब तक भाजपा के खिलाफ सियासी जहर उगल रही शिवसेना के लिए भी असमंजस की स्थिति बन गई है। भाजपा से अलग लड़कर शिवसेना ने बेशक अपनी ताकत बढ़ाई है, लेकिन उसके मुकाबले भाजपा की ताकत ज्यादा बढ़ी है।
बेशक वह मुंबई में शिवसेना की 84 सीटों के मुकाबले 82 सीट हासिल कर सकी है, लेकिन भाजपा ने महाराष्ट्र की 10 शहरी निकायों में से 8 में अपनी बढ़त बनाई है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार भाजपा पहले अपने दम पर मुंबई का ताज हथियाने की कोशिश करेगी।
पार्टी की नजर मनसे और एनसीपी के अलावा कुछ निर्दलियों पर है। इस बीच भाजपा का आंकलन है कि परिणाम के बाद शिवसेना के सामने सबसे ज्यादा असहज स्थिति पैदा हो गई है। यदि परिणाम भाजपा के विपरीत होते अथवा उसके जीत का अंतर बड़ा होता तो वह दबाव बना सकती थी। मगर परिणाम ऐसे आए हैं कि वह भाजपा पर दबाव बनाने की स्थिति में नहीं है।
मुंबई की सफलता नोटबंदी पर मुहर
देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई में भाजपा को मिली भारी सफलता को पीएम के नोटबंदी के कदम पर जनता के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव बेशक शहरी निकाय के लिए था, लेकिन यहां की जनता को आर्थिक सोच का माना जाता है।
वैसे शिवसेना ने अपने चुनावी प्रचार में नोटबंदी के कदम का विरोध किया था। मगर उसकी जीत पारंपरिक वोटों के सहारे है। भाजपा रणनीतिकारों का कहना है कि यदि नोटबंदी के विरोध में मत पड़ता तो कांग्रेस की ऐसी हालत न होती। भाजपा के पक्ष में परिणाम आने से कहा जा सकता है कि मुंबई की जनता ने मोदी के नोटबंदी के कदम पर मुहर लगा दी है।
इससे पहले नोटबंदी के बाद चंडीगढ़ और ओडिशा के निकाय चुनाव में मिली जीत को भाजपा नोटबंदी पर जनता की मुहर बता चुकी है। मगर शहरी आबादी के लिहाज से मुंबई और महाराष्ट्र के शहरों का प्रभाव अलग है। नोटबंदी का सार्वजनिक विरोध करने वाली कांग्रेस न सिर्फ मुंबई में बुरी तरह पराजित हुई है, बल्कि महाराष्ट्र के किसी भी निकाय में उसे बढ़त लायक सीटें नहीं मिली हैं।
ब्रांड हिंदुत्व का परचम
मुंबई में शिवेसना-भाजपा के आमने-सामने होकर चुनाव लड़ने के बावजूद दोनों दलों के सीटों में अपार वृद्धि को ब्रांड हिंदुत्व की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। निकाय चुनाव के परिणाम बता रहे हैं कि मुंबई में शिवसेना और भाजपा दोनों ने ही अपनी राजनीतिक जमीन का विस्तार किया है, जबकि सबसे बुरी हार कांग्रेस की हुई है।