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स्वास्थ्य: धमनियों में अवरोध पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा घातक, अध्ययन में बड़ी चेतावनी

Wed, 25 Feb 2026 04:33 AM IST
लव गौर एजेंसी
एजेंसी Published by: लव गौर Updated Wed, 25 Feb 2026 04:33 AM IST
सार

यह अध्ययन चेतावनी देता है कि कम प्लाक होने का मतलब यह नहीं है कि महिलाएं सुरक्षित हैं। समय पर जांच, जागरूकता और महिलाओं के लिए विशेष शोध ही इस बढ़ते खतरे को कम कर सकते हैं। 
 

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Blocked arteries more dangerous for women than men
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

महिलाओं के हृदय में धमनियों के भीतर जमा होने वाला फैट (प्लाक) पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील और खतरनाक साबित हो रहा है। वैज्ञानिकों ने पाया कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में काफी कम प्लाक स्तर पर भी दिल का दौरा और सीने में दर्द जैसी गंभीर स्थितियों का शिकार हो रही हैं। सर्कुलेशन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, महिलाओं में हृदय संबंधी गंभीर घटनाओं (एमएसीई) का जोखिम तब शुरू हो जाता है जब उनकी धमनियों में कुल प्लाक का बोझ 20 फीसदी तक पहुंचता है।
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इसके विपरीत, पुरुषों में यह जोखिम 28 फीसदी के स्तर पर पहुंचने के बाद उभरता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रमुख शोधकर्ता बोरेक फोल्डीना ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की कोरोनरी धमनियां आकार में छोटी होती हैं। यही वजह है कि प्लाक की थोड़ी सी मात्रा भी उनके रक्त प्रवाह पर बड़ा और घातक प्रभाव डाल सकती है। यह अध्ययन चेतावनी देता है कि कम प्लाक होने का मतलब यह नहीं है कि महिलाएं सुरक्षित हैं। समय पर जांच, जागरूकता और महिलाओं के लिए विशेष शोध ही इस बढ़ते खतरे को कम कर सकते हैं। 
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महिलाओं में हृदय रोग का जोखिम अधिक
शोधकर्ताओं ने अमेरिका और कनाडा के 193 स्थानों से 4,267 मरीजों का अध्ययन किया। इनकी औसत आयु 60 साल थी। इसके अलावा इनमें आधे से थोड़ी अधिक महिलाएं थीं। जहां 75 फीसदी पुरुषों में प्लाक पाया गया, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 55 फीसदी रहा। साथ ही महिलाओं में प्लाक का कुल वॉल्यूम भी अपेक्षाकृत कम था। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कम प्लाक होने के बावजूद महिलाओं का हृदय प्लाक के प्रति अधिक संवेदनशील दिखाई दिया, जिससे समान स्तर के जोखिम पर भी उन्हें हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है।
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भारतीय महिलाओं के लिए बड़ी चुनौती
भारतीय हृदय रोग विशेषज्ञों ने कहा कि भारतीय महिलाओं में हृदय रोग न केवल कम उम्र में देखा जा रहा है, बल्कि उनमें मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे जोखिम कारक भी तेजी से बढ़ रहे हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों से महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य के बजाय परिवार को प्राथमिकता देती हैं। इससे बीमारी का पता तब चलता है जब वह गंभीर चरण में होती है।


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शारीरिक बनावट की भूमिका अहम
छोटी धमनियों के अलावा, पेट का मोटापा भी एक बड़ा कारक है। एक अन्य अध्ययन के अनुसार, भारत में 60 वर्ष से अधिक उम्र की लगभग 38 फीसदी महिलाएं हृदय रोग से ग्रसित हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 31 फीसदी है। संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ की कार्डियोलॉजिस्ट रूपाली खन्ना और एम्स, नई दिल्ली के डॉ. अंबुज रॉय ने कहा कि अब समय आ गया है जब हृदय रोग के उपचार में लिंग-आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाए।

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