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Discovery: ब्लैक होल में मिला 433 दिन में बदलने वाला दुर्लभ प्रकाश चक्र, 19 वर्षों की निगरानी के बाद बड़ी खोज

Sat, 16 May 2026 06:25 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 16 May 2026 06:25 AM IST
सार

भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने 19 साल की निगरानी के बाद '3सी 454.3' नामक ब्लेजर (विशाल ब्लैक होल) में एक अनोखा प्रकाश चक्र खोजा है। इस खगोलीय पिंड की चमक हर 433 दिन में एक समान तरीके से बदलती है। इस दुर्लभ घटना को 'ऑप्टिकल क्वासी-पीरियोडिक ऑस्सिलेशन' कहा जा रहा है।

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black hole light cycle blazar optical QPO discovery Whole Earth Blazar Telescope ARIES Indian scientists space
ब्रह्मांड के वो बड़े रहस्य, जिन्हें अभी तक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए हैं। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

ब्रह्मांड के गहरे रहस्यों को सुलझाने की दिशा में वैज्ञानिकों को एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। अंतरिक्ष में मौजूद कुछ खगोलीय पिंड इतने दूर हैं कि उनकी रोशनी को हमारी पृथ्वी तक पहुंचने में ही अरबों वर्ष लग जाते हैं। लेकिन इन्हीं बहुत दूर मौजूद वस्तुओं से आने वाले प्रकाश में कभी-कभी ऐसे रहस्यमय संकेत छिपे होते हैं, जो विज्ञान की दुनिया में तहलका मचा देते हैं। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने 19 वर्षों तक लगातार अंतरिक्ष पर नजर रखने के बाद एक विशाल ब्लैक होल में एक बहुत ही दुर्लभ और अनोखा प्रकाश चक्र खोज निकाला है। यह एक ऐसी खोज है जो ब्लैक होल और हमारी आकाशगंगाओं के काम करने के तरीके को पूरी तरह से समझा सकती है।

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वैज्ञानिकों ने '3सी 454.3' नाम के एक बेहद चमकीले क्वासर यानी ब्लेजर में एक रहस्यमय दोहराव वाला पैटर्न खोजा है। होल अर्थ ब्लेजर टेलीस्कोप परियोजना के तहत लगातार 19 वर्षों तक इसके आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन किया गया। इस लंबी रिसर्च में यह बात सामने आई है कि इस खगोलीय वस्तु की चमक लगभग हर 433 दिन में एक समान तरीके से बदलती रहती है। विज्ञान की भाषा में इस घटना को 'ऑप्टिकल क्वासी-पीरियोडिक ऑस्सिलेशन' कहा जा रहा है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि इस ब्लैक होल से निकलने वाली रोशनी बिना किसी नियम के नहीं, बल्कि एक तय समय यानी लगभग 433 दिन के अंतराल पर बार-बार बढ़ती और घटती है। इस अहम रिसर्च में भारत के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एआरआईईएस) के वैज्ञानिकों ने भी बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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ब्लेजर आखिर क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
3सी 454.3 असल में एक ब्लेजर है। ब्लेजर वास्तव में सक्रिय आकाशगंगाओं का एक बहुत ही विशेष प्रकार होता है। ऐसी आकाशगंगाओं के बिल्कुल बीचों-बीच (केंद्र में) एक अत्यंत विशाल ब्लैक होल मौजूद होता है। यह महाकाय ब्लैक होल अपने आसपास मौजूद सारी गैस और धूल को बहुत ही तेजी से निगलता रहता है। इसी भयंकर प्रक्रिया के कारण भारी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है और उस आकाशगंगा का केंद्र असाधारण रूप से बहुत तेज चमकने लगता है। वैज्ञानिक इस बेहद सक्रिय केंद्र को 'एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस' (एजीएन) कहते हैं। जब इस एजीएन से निकलने वाली शक्तिशाली ऊर्जा की धार (जेट) लगभग सीधे हमारी पृथ्वी की दिशा में होती है, तो उस चमकती हुई वस्तु को ब्लेजर कहा जाता है।


क्यूपीओ क्या होता है और यह खोज इतनी खास क्यों मानी जा रही?
हमारे ब्रह्मांड में मौजूद कई वस्तुएं लगातार एक जैसी या स्थिर रोशनी नहीं देती हैं। उनकी चमक समय के साथ घटती और बढ़ती रहती है। लेकिन कभी-कभी चमक में होने वाला यह बदलाव पूरी तरह से बेतरतीब या अनियंत्रित नहीं होता, बल्कि एक निश्चित समय अंतराल पर खुद को दोहराता है। इसी तय अंतराल पर रोशनी के बदलने को क्वासी-पीरियोडिक ऑस्सिलेशन यानी क्यूपीओ कहा जाता है। अब तक वैज्ञानिकों को ऐसे संकेत अधिकतर सिर्फ एक्स-रे तरंगों में ही पाए गए थे, जो ब्लैक होल के बेहद नजदीकी क्षेत्रों से आते हैं। लेकिन अब प्रकाश की चमक में ऐसा चक्र मिलना इस खोज को बहुत ही दुर्लभ और विज्ञान के लिए बेहद खास बना देता है।

ब्रह्मांड को समझने के लिए यह नई खोज वैज्ञानिकों के लिए कितनी अहम?
वैज्ञानिकों के अनुसार 3सी 454.3 का रेडशिफ्ट 0.86 है, जिसका मतलब यह है कि इसकी तेज रोशनी अरबों वर्षों की लंबी यात्रा करके हमारी पृथ्वी तक पहुंचती है। इसके केंद्र में मौजूद विशाल ब्लैक होल का वजन (द्रव्यमान) लगभग 50 करोड़ से लेकर 230 करोड़ सूर्यों के बराबर माना जाता है। इतने विशाल और अत्यधिक सक्रिय ब्लैक होल में लगातार दोहराने वाला यह प्रकाश पैटर्न मिलना वैज्ञानिकों को यह समझने का एक बहुत बड़ा अवसर देता है कि इस ब्रह्मांड के सबसे ज्यादा ऊर्जावान स्रोत आखिर किस तरह से काम करते हैं। इस नई और ऐतिहासिक खोज से भविष्य में ब्लैक होल के आसपास बनने वाली शक्तिशाली जेट्स, उसके चुंबकीय क्षेत्रों और भारी ऊर्जा निकलने की पूरी प्रक्रियाओं को बहुत ही अच्छे से समझा जा सकेगा।

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