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Politics: पर्यवेक्षकों की नियुक्ति में भाजपा ने इस बात का रखा खास ख्याल, इसलिए चुने गए राजनाथ, खट्टर और मुंडा
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Amar Ujala
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों के नामों को लेकर विचार मंथन का दौर जारी है। पार्टी ने तीनों राज्यों में विधायकों से रायशुमारी के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। मध्य प्रदेश के लिए हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर,ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.के लक्ष्मण, भाजपा की राष्ट्रीय सचिव सुश्री आशा लाकड़ा पर्यवेक्षक बनाए गए है।
वहीं, राजस्थान के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी महासचिव विनोद तावड़े और राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। छत्तीसगढ़ के लिए केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और सर्बानंद सोनोवाल और पार्टी महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम को पर्यवेक्षक बनाए गया है। ऐसा माना जा रहा है कि तीनों ही राज्यों में पर्यवेक्षक विधायकों से वन टू वन चर्चा कर सकते हैं। सभी पर्यवेक्षक शनिवार या रविवार सुबह तक अपने अपने राज्यों में पहुंच जाएंगे।
एमपी: पर्यवेक्षक की नियुक्ति में दिखा जातीय संतुलन
मध्यप्रदेश में भाजपा ने पंजाबी खत्री समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सामान्य वर्ग के हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, ओबीसी नेता डॉ. के. लक्ष्मण और आदिवासी नेता आशा लकड़ा को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के चयन के लिए पर्यवेक्षक बनाया है। तीनों नेता विधायक दल की बैठक से लेकर मुख्यमंत्री का चयन करेंगे। एमपी में भाजपा नए ओबीसी चेहरे पर विचार कर रही है। यही वजह है कि शीर्ष नेतृत्व ने नए चुने गए ओबीसी विधायकों की लिस्ट मांगी है। पार्टी ने 11 दिसंबर को विधायक दल की बैठक बुलाई है। ऑब्जर्वर इसमें विधायक दल के नेता यानी सीएम की घोषणा करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, आलाकमान मप्र में सीएम को लेकर ओबीसी चेहरे की ओर बढ़ रहा है। शिवराज सिंह चौहान के बदलने की स्थिति में प्रहलाद पटेल का नाम सबसे आगे है। बिल्कुल नया ओबीसी फेस देने पर भी विचार हो रहा है। अगर ओबीसी कार्ड नहीं चला तो ऐसे में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का नाम सीएम की रेस में सबसे आगे होगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश में भी डिप्टी सीएम के फॉर्मूले को लागू किया जाएगा।
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के पद को लेकर 30 साल बाद एक बार फिर जोर-शोर से लॉबिंग चल रही है। बहुमत से जीतकर आई भाजपा में यह पहला मौका जब एक साथ कई दिग्गजों के नाम दावेदार के बतौर उभरे है। इससे पहले 1993 में कांग्रेस विधायक दल के नेता को लेकर जमकर लॉबिंग हुई थी। पांच दिग्गजों नेताओं के नाम चले फिर दिग्विजय सिंह और श्यामाचरण शुक्ल के बीच वोटिंग में फैसला हुआ था।
बीते दो दशक के दौरान मध्यप्रदेश में सीएम की कुर्सी को लेकर सियासी उठा पटक सामने नहीं आई है। 2003 में उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा ने 173 सीटें जीत कर नया रिकॉर्ड बनाया था। वह विधायक दल की नेता चुनी गई। बाद में साढ़े 8 माह बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। फिर बाबूलाल गौर राज्य के सीएम बने। सवा साल बाद 29 नवंबर 2005 को गौर का इस्तीफा हुआ। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के पद पर काबिज हुए। 18 साल से शिवराज ही सीएम है। लेकिन 2018 में सवा साल कमलनाथ सरकार आई। लेकिन 2020 में सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने के बाद एक फिर भाजपा की सरकार बनी। इस सरकार में शिवराज सीएम बनाए गए।
राजस्थान: इसलिए बनाया राजनाथ को पर्यवेक्षक
राजस्थान में भाजपा ने राजपूत समाज से ताल्लुक रखने वाले पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, ब्राह्मण नेता राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय और महाराष्ट्र के ओबीसी नेता विनोद तावड़े को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। ये तीनों पर्यवेक्षक राजस्थान को लेकर विधायकों से रायशुमारी करेंगे। माना जा रहा है कि, 10 दिसंबर को विधायक दल की बैठक हो सकती है। वहीं, 15 दिसंबर तक राजस्थान के नए मुख्यमंत्री की शपथ भी हो सकती है, क्योंकि 16 दिसंबर से मलमास शुरू हो रहे हैं। इधर, गुरुवार रात पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। नड्डा और वसुंधरा के बीच सवा घंटे तक बातचीत हुई। वहीं प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी भी आज दिल्ली पहुंच गए हैं।
दरअसल, राजस्थान बीजेपी में यह पहला मौका है, जब मुख्यमंत्री को लेकर असमंजस बना हुआ है। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। बीजेपी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करके ही चुनाव लड़ती रही है, इसलिए कभी नतीजे आने के बाद असमंजस नहीं हुआ। पहले भैरोंसिंह शेखावत बीजेपी के सीएम चेहरे हुआ करते थे। 2003, 2008, 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे पहले से सीएम चेहरा घोषित थीं, इसलिए असमंजस नहीं हुआ था। 2003 और 2013 में वसुंधरा राजे का पहले से ही सीएम बनना तय था, इसलिए नतीजे आने के बाद ही सीएम की शपथ का टाइम तय हो जाता था, विधायक दल की बैठक में नाम की घोषणा केवल औपचारिकता ही रहती थी। दोनों ही बार वसुंधरा राजे ने 13 दिसंबर को शपथ ली थी।
छत्तीसगढ़: पर्यवेक्षक भी आदिवासी समाज से चुना
छत्तीसगढ़ के लिए बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और दुष्यंत कुमार गौतम को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। जानकारी के मुताबिक तीनों पर्यवेक्षक रविवार तक छत्तीसगढ़ पहुंचेंगे। छत्तीसगढ़ के लिए बीजेपी ने जिन तीन पर्यवेक्षकों का चुनाव किया है उनमें से दो आदिवासी समुदाय से हैं जबकि दुष्यंत कुमार गौतम अनुसूचित जाति से आते हैं।
सूत्रों की मानें तो बीजेपी छत्तीसगढ़ में किसी ओबीसी या आदिवासी नेता को बागडोर सौंपने पर विचार कर रही है। इसके लिए लता उसेंडी, गोमती साय और रेणुका सिंह जैसे अनुसूचित जनजाति वर्ग के नेता शीर्ष पद के लिए स्वाभाविक दावेदार हैं। रेणुका सिंह जहां केंद्रीय मंत्री रही हैं, वहीं लता उसेंडी रमन सिंह सरकार में छत्तीसगढ़ की सबसे कम उम्र की मंत्री रही हैं। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव और नौकरशाह से राजनेता बने ओपी चौधरी भी पिछड़ी जातियों से है।