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बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया आरोप, पीएम मोदी को हराने के लिए माओवादियों को मिल रही मदद
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Jun 2018 10:47 AM IST
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बीजेपी ने भीमा-कोरेगांव हिंसा को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि 2019 के चुनावों में नरेन्द्र मोदी के विजय रथ को रोकने के लिए कांग्रेस माओवादियों को फंडिग कर रही है। साथ ही बीजेपी ने भीमा-कोरेगांव मामले में जिग्नेश मेवाणी के शामिल होने की बात भी कही है।
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गुरुवार को बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने बीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस 2019 में मोदी को रोकने लिए माओवादियों की आर्थिक मदद कर रही है। पात्रा ने कहा कि हमारी मांग है कि इस संबंध में स्वयं राहुल गांधी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करें और सारी स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की भीमा-कोरेगांव मामले में भूमिका थी और जिग्नेश मेवाणी बिचौलिये की भूमिका में थे।
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पात्रा ने सबूत के तौर पर पुणे पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी एक पत्र भी पेश किया, जिसे दिल्ली से गिरफ्तार एक आरोपी रोना जैकब विल्सन के घर से बरामद किया गया था। यह पत्र इसी साल 2 जनवरी को प्रतिबंधित संगठन सीआरपीपी की मेंबर रोना विल्सन को किसी कामरेड एम ने लिखा था।
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उन्होंने कहा कि भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा को दलित आंदोलन कह कर प्रचारित किया था, लेकिन पत्र से साफ पता चलता है कि असल में वह नक्सलियों ने कृत्रिम तरीके से आंदोलन करवाया था। पत्र में लिखा है कि राजनैतिक बंदियों को छुड़ाने के लिए कांग्रेस से मदद लेने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि इस चिट्ठी में भारत के संविधान और सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचाने की साजिश रची गई। उन्होंने आगे कहा कि हिंसा में दलितों का इस्तेमाल उपकरण के रूप में किया गया था। संबित ने कहा लेटर में भीमा-कोरेगांव हिंसा और उस दौरान एक युवक की मौत को कामयाब प्रदर्शन बताया गया है। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां बीजेपी 'संपर्क से समर्थन' के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है, वहीं इस पत्र से खुलासा होता है कि कैसे कांग्रेस अराजकता से सत्ता को हासिल करना चाहती है।
संबित ने 2014 में तत्कालीन गृह राज्य आरपीएन सिंह का लोकसभा में दिए उस जवाब के भी अंश पेश किए, जिसमें उन्होंने 74 संस्थाओं पर बैन लगाने की बात कही थी। संबित ने आरोप लगाया कि जिन संगठनों को खुद कांग्रेस ने बैन किया था, उन्हीं की मदद से अब कांग्रेस सत्ता में वापसी की राह तलाश रही है।
गौरतलब है कि भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पुणे पुलिस ने पांच बड़े नक्सली नेताओं को दिल्ली, मुंबई व नागपुर से गिरफ्तार कर चुकी है। मुंबई के गोवंडी से सुधीर धवले नामक दलित कार्यकर्ता, नागपुर से वकील सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत व प्रोफेसर शोमा सेन को तथा दिल्ली से माओवादी नेता रोना विल्सन को गिरफ्तार किया गया है।
भीमा-कोरेगांव में एक जनवरी, 1818 को पेशवा बाजीराव को ब्रिटिश सैनिकों ने हरा दिया था। दलित नेता इस जीत का जश्न इसलिए मनाते हैं कि ईस्ट इंडिया कंपनी की टुकड़ी में ज्यादातर महार समुदाय के लोग थे।। जिसके बाद हर साल पुणे में 31 दिसंबर 2017 को यलगार परिषद का आयोजन होता है। लेकिन इस बार 1 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़क उठी, जो बाद में पूरे महाराष्ट्र में फैल गई। जिसमें एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी। जातीय हिंसा के लिए यलगार परिषद के नेताओं पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा है और इस मामले में जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद पर भी केस दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज भी किया, बाद में मिलिंद फरार हो गए थे।