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West Bengal: दुर्गा पंडाल में महात्मा गांधी को 'महिषासुर' के रूप में दिखाया, भाजपा ने की कड़ी निंदा

Tue, 04 Oct 2022 11:18 PM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Tue, 04 Oct 2022 11:18 PM IST
सार

बेलेघाट पूजा आयोजकों ने कहा कि 'अज़ान' की गई और 'ओम' मंत्र का जाप भी कराया गया क्योंकि पंडाल सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित है।

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BJP said condemn the installation of a Mahatma Gandhi look alike Mahisasura at a Durga Puja pandal in Kolkata
बागियों के खिलाफ बगावत - फोटो : Social Media

विस्तार

कोलकाता में दुर्गा पूजा में ‘महिषासुर’ की जगह महात्मा गांधी की तरह दिखने वाली एक प्रतिमा पर विवाद खड़ा हुआ है। दुर्गा पंडाल में महिषासुर की जगह महात्मा गांधी की तरह दिखने वाली प्रतिमा की भाजपा ने कड़ी निंदा की है। साथ ही भाजपा ने टीएमसी पर कई अन्य धार्मिक आयोजकों के दौरान जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। 
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भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने पीटीआई को बताया कि हुगली जिले के गुरप में देवी के हाथों में टीएमसी का झंडा लगाने, कोलकाता के एक दुर्गा पूजा पंडाल में ‘अजान‘ करने और दूसरे मार्की तक जाने वाले रास्ते को जूतों से सजाए जाने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि टीएमसी की तरफ से कोई निंदा नहीं की गई। साथ ही प्रशासन ने भी कोई एक्शन नहीं लिया। उधर, बेलेघाट पूजा आयोजकों ने कहा कि 'अज़ान' की गई और 'ओम' मंत्र का जाप भी कराया गया क्योंकि पंडाल सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित है। जबकि केस्तोपुर के लोगों ने कहा कि जूते देश में किसानों के आंदोलन को दर्शाते हैं और जूते कुछ दूरी पर स्थापित किए गए थे।
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भाजपा ने कहा कि हम गांधी का अपमान करने वाले हर कदम की निंदा करते हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि आयोजकों को इस तरह के कृत्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। ताकि एक बड़े वर्ग की भावना को आहत किया जा सके।  भट्टाचार्य ने कहा कि टीएमसी ने दुर्गा पूजा की धार्मिक भावना को तमाशा बना दिया है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह सद्भाव का त्योहार है लेकिन पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी दल ने आध्यात्मिक पहलू का घोर उल्लंघन किया है।
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उधर, टीएमसी के राज्य प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। दुर्गा पूजा एक सामाजिक त्योहार है ... पश्चिम बंगाल में मानवता और सौहार्द का त्योहार है जहां धार्मिक पहलुओं को निभाया जाता है। भाजपा एकजुटता में विश्वास नहीं करती है और एक दरार पैदा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता को एक राक्षस के रूप में चित्रित करना एक अपवित्र कार्य था, ऐसा किया भी नहीं गया है। उसके बाद भी पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। अगर पूजा को रोक दिया जाता तो  भाजपा प्रशासन पर पूजा विरोधी होने का झूठा आरोप लगाती।


यह खड़ा हुआ विवाद
रूबी क्रॉसिंग के पास एक दुर्गा पूजा पंडाल में महिषासुर की मूर्ति महात्मा गांधी से मिलती-जुलती थी क्योंकि उसका सिर गंजा था और उसने सफेद धोती पहनी थी और गोल चश्मा पहना था, जिसपर 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता की जयंती पर विवाद खड़ा हो गया था। हालांकि बाद में शिकायत दर्ज होने पर सिर पर बाल और मूंछें लगाकर मूर्ति का रूप बदल दिया गया। आयोजकों ने दावा किया कि समानताएं सिर्फ एक संयोग थीं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी दुर्गा ने महिषासुर के दुष्ट शासन को समाप्त करने के लिए एक महाकाव्य युद्ध में उसका वध किया था।
 
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