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ताजपुर बंदरगाह: बंगाल में BJP की जीत के बाद बढ़ीं उम्मीदें, केंद्र-राज्य के तालमेल से आएगी परियोजना में तेजी?
Wed, 06 May 2026 03:47 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 06 May 2026 03:47 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल और केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद बेहतर तालमेल की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही ताजपुर बंदरगाह परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इससे बड़े जहाज सीधे यहां आकर रुक सकेंगे और माल ढुलाई सस्ती व तेज होगी। पढ़िए रिपोर्ट-
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बंदरगाह (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद ताजपुर गहरे समुद्र (डीप सी) बंदरगाह परियोजना को लेकर फिर से उम्मीदें बढ़ गई हैं। यह परियोजना करीब 25 हजार करोड़ रुपये की है और लंबे समय से अटकी हुई है। अब उद्योग से जुड़े लोग मान रहे हैं कि राज्य और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल बनने से इस बड़ी बुनियादी ढांचे वाली परियोजना में तेजी आ सकती है।
हालांकि, दिसंबर 2025 में पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम द्वारा निकाली गई वैश्विक निविदा (टेंडर) को पर्याप्त बोली न मिलने के कारण रद्द कर दिया गया है। इससे परियोजना फिर से अनिश्चितता में चली गई।
नेशनल शिपिंग एंड लॉजिस्टिक्स कमेटी ने क्या कहा?
नेशनल शिपिंग एंड लॉजिस्टिक्स कमेटी के अध्यक्ष अधिप नाथ पाल चौधरी ने बताया कि अगर केंद्र और राज्य सरकार एक साथ काम करें तो यह परियोजना आगे बढ़ सकती है। लेकिन इसके लिए अच्छा संपर्क और अलग-अलग परिवहन साधनों का सही तालमेल जरूरी होगा।
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पूर्वी भारत के व्यापार के लिए क्यों अहम है ताजपुर पोर्ट?
ताजपुर बंदरगाह पूर्वी भारत के व्यापार के लिए बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे बहुत बड़े जहाज सीधे बंदरगाह पर आकर रुक सकेंगे। सामान को बीच में दूसरे बंदरगाह पर बदलने (ट्रांसशिपमेंट) की जरूरत कम हो जाएगी और माल ढुलाई का खर्च भी कम हो जाएगा। एक अधिकारी के अनुसार, जो टेंडर डिजाइन, निर्माण, वित्त और संचालन के आधार पर दिया गया था, उसे इसलिए रद्द किया गया क्योंकि पर्याप्त बोली नहीं मिली।
चुनाव घोषणापत्र में दो बंदरगाहों को विकसित करने का वादा
भाजपा ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में ताजपुर और कुलपी बंदरगाह दोनों को विकसित करने का वादा किया था। पार्टी का कहना है कि इससे राज्य में उद्योग, रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: ममता और अभिषेक बनर्जी के आवास से हटाई गई सुरक्षा? पुलिस ने स्पष्ट की स्थिति
परियोजना में अब तक क्या-क्या हुआ?
यह परियोजना पूर्वी मेदिनीपुर जिले में प्रस्तावित है और इसे पहले कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के साथ मिलकर शुरू करने की योजना थी, जिसे अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के नाम से जाना जाता है। बाद में इसे सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने का फैसला किया गया। 2021 में राज्य सरकार ने इसके लिए टेंडर निकाला था, जिसमें अदाणी पोर्ट्स सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी बनी थी और उसने जेएसडब्ल्यू समूह को पीछे छोड़ा था।
2022 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अदाणी समूह को लेटर ऑफ इंटेंट भी सौंपा था। लेकिन 2023 में राज्य सरकार ने बिना स्पष्ट कारण बताए नया टेंडर लाने की बात कही। 2025 में कैबिनेट ने पुराने समझौते को खत्म कर दिया और नया टेंडर शुरू करने की मंजूरी दी।
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हालांकि, दिसंबर 2025 में पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम द्वारा निकाली गई वैश्विक निविदा (टेंडर) को पर्याप्त बोली न मिलने के कारण रद्द कर दिया गया है। इससे परियोजना फिर से अनिश्चितता में चली गई।
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नेशनल शिपिंग एंड लॉजिस्टिक्स कमेटी ने क्या कहा?
नेशनल शिपिंग एंड लॉजिस्टिक्स कमेटी के अध्यक्ष अधिप नाथ पाल चौधरी ने बताया कि अगर केंद्र और राज्य सरकार एक साथ काम करें तो यह परियोजना आगे बढ़ सकती है। लेकिन इसके लिए अच्छा संपर्क और अलग-अलग परिवहन साधनों का सही तालमेल जरूरी होगा।
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पूर्वी भारत के व्यापार के लिए क्यों अहम है ताजपुर पोर्ट?
ताजपुर बंदरगाह पूर्वी भारत के व्यापार के लिए बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे बहुत बड़े जहाज सीधे बंदरगाह पर आकर रुक सकेंगे। सामान को बीच में दूसरे बंदरगाह पर बदलने (ट्रांसशिपमेंट) की जरूरत कम हो जाएगी और माल ढुलाई का खर्च भी कम हो जाएगा। एक अधिकारी के अनुसार, जो टेंडर डिजाइन, निर्माण, वित्त और संचालन के आधार पर दिया गया था, उसे इसलिए रद्द किया गया क्योंकि पर्याप्त बोली नहीं मिली।
चुनाव घोषणापत्र में दो बंदरगाहों को विकसित करने का वादा
भाजपा ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में ताजपुर और कुलपी बंदरगाह दोनों को विकसित करने का वादा किया था। पार्टी का कहना है कि इससे राज्य में उद्योग, रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
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परियोजना में अब तक क्या-क्या हुआ?
यह परियोजना पूर्वी मेदिनीपुर जिले में प्रस्तावित है और इसे पहले कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के साथ मिलकर शुरू करने की योजना थी, जिसे अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के नाम से जाना जाता है। बाद में इसे सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने का फैसला किया गया। 2021 में राज्य सरकार ने इसके लिए टेंडर निकाला था, जिसमें अदाणी पोर्ट्स सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी बनी थी और उसने जेएसडब्ल्यू समूह को पीछे छोड़ा था।
2022 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अदाणी समूह को लेटर ऑफ इंटेंट भी सौंपा था। लेकिन 2023 में राज्य सरकार ने बिना स्पष्ट कारण बताए नया टेंडर लाने की बात कही। 2025 में कैबिनेट ने पुराने समझौते को खत्म कर दिया और नया टेंडर शुरू करने की मंजूरी दी।
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