11 अगस्त की रैली: पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी परीक्षा, चार लाख की भीड़ जुटाने का लक्ष्य
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पश्चिम बंगाल में पांव जमाने का प्रयास कर रही भारतीय जनता पार्टी के लिए 11 अगस्त की रैली किसी परीक्षा से कम नहीं है। रैली के आयोजन की जिम्मेदारी भाजपा युवा मोर्चे के कंधों पर है। मोर्चे ने रैली में चार लाख लोगों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही अब इस रैली को स्वतंत्रता संग्राम के पहले शहीद खुदीराम बोस को समर्पित कर दिया गया है। प्रचार अभियान में भी बोस के पोस्टरों को आगे लाया जा रहा है। ऐसा कर भाजपा ने पश्चिम बंगाल के आम जन को रैली से जोड़ने का प्रयास किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस रैली को सम्बोधित करेंगे।
2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा पश्चिम बंगाल पर खास फोकस कर रही है। पार्टी को 2014 में 42 में से मात्र दो लोकसभा सीट मिली थी, जबकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने 34 सीट जीत कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का अहसास कराया था। अब भाजपा ने यहां 20-25 सीट जीतने का लक्ष्य रखा है।
मेयो रोड पर ही रैली क्यों?
भाजपा युवा मोर्चे की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम महाजन का कहना है कि टीएमसी ने अपनी स्थापना रैली कोलकाता के मेयो रोड पर की थी। अब भाजपा भी इसी रोड पर रैली कर टीएमसी को पश्चिम बंगाल की सत्ता से दूर करने की मुहिम शुरू करेगी। भाजपा की राज्य इकाई के महासचिव राजू बैनर्जी ने दावा किया है कि यह रैली पिछली सभी रैलियों से बड़ी होगी। लोगों में इसे लेकर भारी उत्साह है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पंचायत चुनाव में टीएमसी ने जिस तरह से भाजपा कार्यकर्ताओं को मारा पीटा, उससे लोगों में ममता बनर्जी को लेकर खासी नाराजगी है।
हर जिले से सौ-सौ गाड़ियां युवा मोर्चे की होंगी
भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष देबजीत सरकार ने कहा, इस रैली में युवा मोर्चे की हर जिले से सौ सौ गाड़ियां रैली में पहुंचेंगी। इसके अलावा पार्टी की दूसरी इकाइयों से भी कार्यकर्ता इसी तरह रैली में आएंगे। युवा कार्यकर्ता नौ अगस्त को कोलकाता पहुंच जाएंगे। साथ ही ट्रेन से आने वाले लोगों को रैली स्थल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी यूथ विंग को दे दी गई है।
रैली की सफलता से तय होंगी तीन बातें
हाल ही में नेशनल रजिस्ट्र ऑफ सिटीजन (एनआरसी) की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है। इसमें असम के 40 लाख लोगों का नाम अवैध तरीके से रहने वालों की सूची में आ गया है। इस मुद्दे पर भाजपा और टीएमसी, दोनों में जंग छिड़ी हुई है। युवा मोर्चे के राष्ट्रीय सचिव सौरभ सिकंदर का कहना है कि यह देश की सुरक्षा एवं हित से जुड़ा मामला है। गैर-कानूनी तौर से रहने वाले लोगों को असम छोड़ना होगा। दूसरी ओर टीएमसी इन लोगों के समर्थन में उतर आई है। बाकायदा ममता बनर्जी के निर्देश पर टीएमसी के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल असम का दौरा करने पहुंचा था।
अगर भाजपा की 11 अगस्त की रैली सफल होती है तो पार्टी एनसीआर पर लोगों का समर्थन मिलने की बात कह कर आगे बढ़ेगी। दूसरा, इस रैली के चार दिन बाद यानी 15 अगस्त को ममता बनर्जी बीजेपी हटाओ, देश बचाओ अभियान शुरू करने जा रही है। भाजपा रैली की सफलता का प्रभाव सीधे तौर पर टीएमसी के इस अभियान में दिखेगा। तीसरा, भाजपा की रैली सफल रही तो उसका 2019 में पश्चिम बंगाल की आधी लोकसभा सीटें जीतने का दावा मजबूत हो जाएगा।