{"_id":"589d386f4f1c1b865237ba5c","slug":"bjp-president-amit-shah-exclusive-interview-with-amar-ujala","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Exclusive: बोले अमित शाह - पहले ही हार स्वीकार कर चुका है सपा-कांग्रेस गठबंधन","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
Exclusive: बोले अमित शाह - पहले ही हार स्वीकार कर चुका है सपा-कांग्रेस गठबंधन
राजीव जायसवाल/हिमांशु मिश्र, अमर उजाला
Updated Fri, 10 Feb 2017 11:12 AM IST
विज्ञापन
अमित शाह (फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह को बीजेपी की राजनीति का चाणक्य यूं ही नहीं माना जाता है। इसके पीछे उनका लगभग तीन दशकों का अनुभव और संघर्ष है जिसकी शुरुआत अहमदाबाद के नारणपुरा वार्ड में बीजेपी के एक बूथ एजेंट के रूप में हुई। यही कारण है कि वे न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझते हैं बल्कि मतदाताओं कि मन:स्थिति को भी भांप सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपने चुनावी दौरे के बाद वे आश्वस्त हैं कि लचर कानून व्यवस्था, पिछड़ापन, किसानों की बदहाली और बेरोजगारी से ऊबी प्रदेश की जनता भाजपा के सुशासन लाने के वादे पर विश्वास कर दो तिहाई बहुमत का तोहफा देगी।
शाह का कहना है कि कांग्रेस से हाथ मिलाकर अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी की छवि सिर्फ मीडिया के लिए ही बदल सकते हैं, जबकि प्रदेश कि जनता भली-भांति जानती है कि सपा में कोई मूल परिवर्तन नहीं हुआ है क्योंकि इस बार भी अखिलेश ने उन्हीं आपराधिक छवि के लोगों को टिकट दिया है जिनके अत्याचारों से जनता त्रस्त थी। अमर उजाला के राजीव जायसवाल और हिमांशु मिश्र से बातचीत में शाह कहते हैं कि जनता सब समझती है और अब वह सत्ता परिवर्तन चाहती है। पेश है शाह से हुई विस्तृत बातचीत-
अमर उजाला- भाजपा ने उत्तर प्रदेश के चुनाव घोषणा पत्र में किसानों का कर्ज माफ करने, ब्याजमुक्त ऋण देने का वादा किया है। सवाल उठता है कि आपने आम बजट के जरिए मौके का लाभ क्यों नहीं उठाया। अगर आप आम बजट में कर्ज माफी की बात करते तो इसका अन्य चुनावी राज्यों के साथ पूरे देश को संदेश जाता।
विज्ञापन
अमित शाह - भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों के लिए कर्ज माफी और ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराने का वादा किया है। राज्य में छोटी-छोटी जोत के मालिक सीमांत और लघु किसान दशकों से बेहद मुसीबत में हैं। यह वादा हमने चुनावी लाभ लेने के लिए नहीं किया है। आप संकल्प पत्र का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि इन किसानों की हालत सुधारने के लिए पार्टी ने कई उपाय करने की घोषणा की है। मसलन 25 डेयरियां स्थापित करने, दो हफ्ते के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान, पुराना बकाया 120 दिन के अंदर करने, सरकारी स्तर पर धान खरीदी करने, सिंचाई का जाल बिछाने और पशुधन की रक्षा के लिए कत्लखाने बंद करने का वादा किया है। हमने जो भी वादे किए हैं, उसके लिए व्यापक अध्ययन किया है। इन वादों को पूरा करने के लिए इन्हें बजट में ही समाहित करने की बात कही है। इससे हमारी जिम्मेदारी का अहसास होता है।
अमर उजाला - चुनाव में भाजपा का ध्यान महिला मतदाताओं पर भी है। सोशल मीडिया में सशक्त नारी समान अधिकार, भाजपा लाएगी ऐसी सरकार, जैसे नारों की गूंज है। मगर सवाल यह है कि पार्टी के पास महिला वर्ग का एक भी जाना-माना चेहरा क्यों नहीं है, जबकि आपके प्रतिद्वंद्वियों के पास प्रियंका गांधी, डिंपल यादव और मायावती जैसे जाने-माने चेहरे हैं?
अमित शाह - जिन्हें आप जाना-माना चेहरा बता रहे हैं, उनका चुनावी इतिहास क्या है? प्रियंका जी कितने चुनाव लड़ी हैं? डिंपलजी का चुनावी इतिहास परिवार के कारण है। इसके इतर भाजपा ने अन्य दलों के मुकाबले सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। ऐसी महिला उम्मीदवार जो वर्षों से जमीनी स्तर पर ब्लॉक स्तर पर लगातार संघर्ष करते हुए आगे बढ़ी हैं।
अमर उजाला - आपकी पार्टी लगातार महिला सुरक्षा को मुद्दा बना रही है। इस आधी आबादी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए आपकी भावी योजना क्या है?
अमित शाह - जाहिर तौर पर उत्तर प्रदेश में महिलाओं की स्थिति बेहद बुरी है। खासतौर से इस वर्ग के लिए शिक्षा हासिल करना लगातार दुष्कर होता जा रहा है। कॉलेज में ऐसा वातावरण नहीं है कि लड़कियां सही तरीके से तनावमुक्त होकर शिक्षा समाप्त कर सके। इस कारण जिनके पास संसाधन हैं वे अपनी लड़कियों को दिल्ली या अन्य शहरों में भेज रहे हैं। जिनके पास संसाधन नहीं हैं, उनकी लड़कियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने पर विवश हैं। इसलिए हमने तय किया है कि हमारी सरकार आने पर हर कॉलेज के बगल में थाना होगा। इसमें एंटी रोमियो दल रहेंगे। हर जिले में प्रताड़ना से बचाने के लिए महिला पुलिस का अलग स्क्वायड होगा। तीन रिजर्व महिला बटालियन गठित की जाएंगी और तत्काल कार्यवाही के लिए एक महिला हेल्प नंबर जारी किया जाएगा।
विज्ञापन
शाह का कहना है कि कांग्रेस से हाथ मिलाकर अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी की छवि सिर्फ मीडिया के लिए ही बदल सकते हैं, जबकि प्रदेश कि जनता भली-भांति जानती है कि सपा में कोई मूल परिवर्तन नहीं हुआ है क्योंकि इस बार भी अखिलेश ने उन्हीं आपराधिक छवि के लोगों को टिकट दिया है जिनके अत्याचारों से जनता त्रस्त थी। अमर उजाला के राजीव जायसवाल और हिमांशु मिश्र से बातचीत में शाह कहते हैं कि जनता सब समझती है और अब वह सत्ता परिवर्तन चाहती है। पेश है शाह से हुई विस्तृत बातचीत-
विज्ञापन
अमर उजाला- भाजपा ने उत्तर प्रदेश के चुनाव घोषणा पत्र में किसानों का कर्ज माफ करने, ब्याजमुक्त ऋण देने का वादा किया है। सवाल उठता है कि आपने आम बजट के जरिए मौके का लाभ क्यों नहीं उठाया। अगर आप आम बजट में कर्ज माफी की बात करते तो इसका अन्य चुनावी राज्यों के साथ पूरे देश को संदेश जाता।
विज्ञापन
अमित शाह - भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों के लिए कर्ज माफी और ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराने का वादा किया है। राज्य में छोटी-छोटी जोत के मालिक सीमांत और लघु किसान दशकों से बेहद मुसीबत में हैं। यह वादा हमने चुनावी लाभ लेने के लिए नहीं किया है। आप संकल्प पत्र का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि इन किसानों की हालत सुधारने के लिए पार्टी ने कई उपाय करने की घोषणा की है। मसलन 25 डेयरियां स्थापित करने, दो हफ्ते के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान, पुराना बकाया 120 दिन के अंदर करने, सरकारी स्तर पर धान खरीदी करने, सिंचाई का जाल बिछाने और पशुधन की रक्षा के लिए कत्लखाने बंद करने का वादा किया है। हमने जो भी वादे किए हैं, उसके लिए व्यापक अध्ययन किया है। इन वादों को पूरा करने के लिए इन्हें बजट में ही समाहित करने की बात कही है। इससे हमारी जिम्मेदारी का अहसास होता है।
अमर उजाला - चुनाव में भाजपा का ध्यान महिला मतदाताओं पर भी है। सोशल मीडिया में सशक्त नारी समान अधिकार, भाजपा लाएगी ऐसी सरकार, जैसे नारों की गूंज है। मगर सवाल यह है कि पार्टी के पास महिला वर्ग का एक भी जाना-माना चेहरा क्यों नहीं है, जबकि आपके प्रतिद्वंद्वियों के पास प्रियंका गांधी, डिंपल यादव और मायावती जैसे जाने-माने चेहरे हैं?
अमित शाह - जिन्हें आप जाना-माना चेहरा बता रहे हैं, उनका चुनावी इतिहास क्या है? प्रियंका जी कितने चुनाव लड़ी हैं? डिंपलजी का चुनावी इतिहास परिवार के कारण है। इसके इतर भाजपा ने अन्य दलों के मुकाबले सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। ऐसी महिला उम्मीदवार जो वर्षों से जमीनी स्तर पर ब्लॉक स्तर पर लगातार संघर्ष करते हुए आगे बढ़ी हैं।
अमर उजाला - आपकी पार्टी लगातार महिला सुरक्षा को मुद्दा बना रही है। इस आधी आबादी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए आपकी भावी योजना क्या है?
अमित शाह - जाहिर तौर पर उत्तर प्रदेश में महिलाओं की स्थिति बेहद बुरी है। खासतौर से इस वर्ग के लिए शिक्षा हासिल करना लगातार दुष्कर होता जा रहा है। कॉलेज में ऐसा वातावरण नहीं है कि लड़कियां सही तरीके से तनावमुक्त होकर शिक्षा समाप्त कर सके। इस कारण जिनके पास संसाधन हैं वे अपनी लड़कियों को दिल्ली या अन्य शहरों में भेज रहे हैं। जिनके पास संसाधन नहीं हैं, उनकी लड़कियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने पर विवश हैं। इसलिए हमने तय किया है कि हमारी सरकार आने पर हर कॉलेज के बगल में थाना होगा। इसमें एंटी रोमियो दल रहेंगे। हर जिले में प्रताड़ना से बचाने के लिए महिला पुलिस का अलग स्क्वायड होगा। तीन रिजर्व महिला बटालियन गठित की जाएंगी और तत्काल कार्यवाही के लिए एक महिला हेल्प नंबर जारी किया जाएगा।
केंद्र में बीजेपी सरकार को हजम नहीं कर पाई कांग्रेस
फाइलः अमित शाह
- फोटो : AmarUjala
अमर उजाला - जब महिला सशक्तीकरण की बात आती है तो सवाल लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने वाले बिल की भी आती है। आपकी पार्टी ढाई साल से भी अधिक समय से केंद्र की सत्ता में है। इसके बावजूद इस समस्या का हल क्यों नहीं हुआ है?
अमित शाह - दरअसल राजनीतिक दलों ने इस मामले को उलझा कर रख दिया है। नई सरकार के आने के बाद संसद में ऐसा वातावरण तैयार किया गया है, जिसमें बहस और चर्चा की गुंजाइश कम हो गई है। जहां तक हमारी पार्टी का सवाल है तो हम पहले दिन से इसके समर्थन में हैं। हमारा अब भी मानना है कि महिलाओं को जल्द से जल्द आरक्षण मिलना चाहिए।
अमर उजाला - आपने संसद के वातावरण की बात की। बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री के जवाब के दौरान विपक्ष एक एक कर वाक आउट कर गया। दोनों ही ओर से आपत्तिजनक टिप्पणियां आईं। आपको लगता है कि राजनीतिक सुधारों में संसद की मर्यादा बनाए रखने जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाना चाहिए?
अमित शाह - देखिये सच्चाई यह है कि जब से केंद्र में हमारी सरकार आई है, तब से ही कांग्रेस इसे हजम नहीं कर पाई है। यही कारण है कि वह हर मुद्दे पर संसद ठप करने, संसद से बाहर जाने और माहौल खराब करने का मौका ढूंढती रहती है। हमारे प्रधानमंत्री ने राजनीतिक सुधारों की पहल की है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने पर जोर दिया है। पारदर्शिता लाने के लिए दलों को मिलने वाले नकद चंदे की सीमा को 20000 से 2000 रुपये किया है। हम चाहते हैं कि सुधारों पर बहस और चर्चा हो। प्रधानमंत्री ने इस दिशा में पहल की है। अन्य दलों को भी इसके लिए आगे आना चाहिए।
अमर उजाला - वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में आपकी पार्टी ने यूपी में जबर्दस्त जीत हासिल की थी। अब ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी क्या पार्टी के पक्ष में वैसा ही माहौल कायम है?
अमित शाह - निश्चित रूप से वैसा ही माहौल है। हम दो तिहाई बहुमत से यूपी में सरकार बनाने जा रहे हैं। राज्य में जिस प्रकार से बीते 15 सालों से सपा-बसपा, बसपा-सपा का क्रम चला है, उससे यह सूबा विकास की दौड़ में बहुत पीछे छूट गया है। कानून व्यवस्था रसातल में चली गई है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जहां भ्रष्टाचार चरम पर न हो। युवाओं को नौकरी देने में जाति, धर्म, लैपटॉप देने में जाति को आधार बनाया जाता है। ऐसे में भाजपा के प्रति लोगों की उम्मीदें पहले की तरह मजबूती से कायम हैं। मैं नहीं मानता कि यूपी की जनता सपा-बसपा में से किसी एक पार्टी का चयन करेगी।
अमर उजाला - मगर क्या सपा में हुए हालिया घटनाक्रम से बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐसी छवि प्रस्तुत की है जिससे यह संदेश गया है कि सपा से सभी गलत तत्व बाहर चले गए हैं। क्या उनकी खुद की छवि पहले की तुलना में ज्यादा साफ सुथरी नहीं हुई है?
अमित शाह - यह अखिलेश नहीं, बल्कि मीडिया उनकी नई छवि पेश कर रहा है। जनता ऐसा नहीं मानती। आप मीडिया से हैं। मुझे एक गलत या भ्रष्ट व्यक्ति का नाम बताइए, जिससे अखिलेश ने मुक्ति पाई है। एक नाम बताइए। शिवपाल खुद चुनाव लड़ रहे हैं। सभी को टिकट दिया गया। कोई बाहर नहीं गया। अतीक अहमद, शिवपाल यादव, आजम खां, गायत्री प्रजापति, पवन पांडे। सभी तो पहले की तरह सपा में बरकरार ही हैं। एक भी व्यक्ति बाहर नहीं गया। हां, इसे मीडिया उजागर नहीं कर रहा। आप ही बताइए क्या बदला है? कुछ भी तो नहीं बदला। बदलाव यह हुआ है कि आत्मविश्वास खो चुकी सपा ने हड़बड़ी में कांग्रेस से गठबंधन कर लिया। ऐसा कर उसने अपनी तय हार को एडवांस में ही स्वीकार कर लिया।
अमित शाह - दरअसल राजनीतिक दलों ने इस मामले को उलझा कर रख दिया है। नई सरकार के आने के बाद संसद में ऐसा वातावरण तैयार किया गया है, जिसमें बहस और चर्चा की गुंजाइश कम हो गई है। जहां तक हमारी पार्टी का सवाल है तो हम पहले दिन से इसके समर्थन में हैं। हमारा अब भी मानना है कि महिलाओं को जल्द से जल्द आरक्षण मिलना चाहिए।
अमर उजाला - आपने संसद के वातावरण की बात की। बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री के जवाब के दौरान विपक्ष एक एक कर वाक आउट कर गया। दोनों ही ओर से आपत्तिजनक टिप्पणियां आईं। आपको लगता है कि राजनीतिक सुधारों में संसद की मर्यादा बनाए रखने जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाना चाहिए?
अमित शाह - देखिये सच्चाई यह है कि जब से केंद्र में हमारी सरकार आई है, तब से ही कांग्रेस इसे हजम नहीं कर पाई है। यही कारण है कि वह हर मुद्दे पर संसद ठप करने, संसद से बाहर जाने और माहौल खराब करने का मौका ढूंढती रहती है। हमारे प्रधानमंत्री ने राजनीतिक सुधारों की पहल की है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने पर जोर दिया है। पारदर्शिता लाने के लिए दलों को मिलने वाले नकद चंदे की सीमा को 20000 से 2000 रुपये किया है। हम चाहते हैं कि सुधारों पर बहस और चर्चा हो। प्रधानमंत्री ने इस दिशा में पहल की है। अन्य दलों को भी इसके लिए आगे आना चाहिए।
अमर उजाला - वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में आपकी पार्टी ने यूपी में जबर्दस्त जीत हासिल की थी। अब ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी क्या पार्टी के पक्ष में वैसा ही माहौल कायम है?
अमित शाह - निश्चित रूप से वैसा ही माहौल है। हम दो तिहाई बहुमत से यूपी में सरकार बनाने जा रहे हैं। राज्य में जिस प्रकार से बीते 15 सालों से सपा-बसपा, बसपा-सपा का क्रम चला है, उससे यह सूबा विकास की दौड़ में बहुत पीछे छूट गया है। कानून व्यवस्था रसातल में चली गई है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जहां भ्रष्टाचार चरम पर न हो। युवाओं को नौकरी देने में जाति, धर्म, लैपटॉप देने में जाति को आधार बनाया जाता है। ऐसे में भाजपा के प्रति लोगों की उम्मीदें पहले की तरह मजबूती से कायम हैं। मैं नहीं मानता कि यूपी की जनता सपा-बसपा में से किसी एक पार्टी का चयन करेगी।
अमर उजाला - मगर क्या सपा में हुए हालिया घटनाक्रम से बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐसी छवि प्रस्तुत की है जिससे यह संदेश गया है कि सपा से सभी गलत तत्व बाहर चले गए हैं। क्या उनकी खुद की छवि पहले की तुलना में ज्यादा साफ सुथरी नहीं हुई है?
अमित शाह - यह अखिलेश नहीं, बल्कि मीडिया उनकी नई छवि पेश कर रहा है। जनता ऐसा नहीं मानती। आप मीडिया से हैं। मुझे एक गलत या भ्रष्ट व्यक्ति का नाम बताइए, जिससे अखिलेश ने मुक्ति पाई है। एक नाम बताइए। शिवपाल खुद चुनाव लड़ रहे हैं। सभी को टिकट दिया गया। कोई बाहर नहीं गया। अतीक अहमद, शिवपाल यादव, आजम खां, गायत्री प्रजापति, पवन पांडे। सभी तो पहले की तरह सपा में बरकरार ही हैं। एक भी व्यक्ति बाहर नहीं गया। हां, इसे मीडिया उजागर नहीं कर रहा। आप ही बताइए क्या बदला है? कुछ भी तो नहीं बदला। बदलाव यह हुआ है कि आत्मविश्वास खो चुकी सपा ने हड़बड़ी में कांग्रेस से गठबंधन कर लिया। ऐसा कर उसने अपनी तय हार को एडवांस में ही स्वीकार कर लिया।
'सपा-बसपा ने जाटों के लिए कुछ नहीं किया'
अमर उजाला - आप कह रहे हैं कि सपा ने डर के मारे कांग्रेस से गठबंधन किया, इसका आधार क्या है?
अमित शाह - सपा का कांग्रेस को सौ सीटें देना ही इसे साबित करता है। सपा सौ सीट किसी को दे, यह क्या साबित करता है?
अमर उजाला - मगर आप क्या मानते हैं किससे लड़ाई है भाजपा की?
अमित शाह - मैंने पहले ही कहा है कि भाजपा को दो तिहाई बहुमत मिलेगा। हां हमारी लड़ाई तो सपा-कांग्रेस गठबंधन से ही होगी। बसपा कहीं नहीं है।
अमर उजाला - मगर क्या इससे कांग्रेस के प्रति नकारात्मक संदेश नहीं गया?
अमित शाह - मैं कांग्रेस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मगर असली हार मुलायम सिंह यादव की हुई है। वह मुलायम जिन्होंने पूरी जिंदगी कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उनकी पार्टी अब उसी कांग्रेस की जूनियर पार्टनर बन गई। यह तो तभी हुआ जब सपा अपना विश्वास खो बैठी।
अमर उजाला - सपा में हुए संग्राम पर कई तरह की बातें हो रही है। कोई कह रहा है कि मुलायम वाकई अखिलेश से नाराज हैं। जबकि यह भी कहा जा रहा है कि यह मुलायम की अखिलेश का कद बड़ा बनाने की सोची समझी योजना थी। आप क्या मानते हैं?
अमित शाह - मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मगर यूपी की जनता को फर्क नहीं पड़ता। जनता को सच्चाई पता है।
अमर उजाला - विधानसभा चुनाव में भाजपा किसी राज्य में मुख्यमंत्री पद का चेहरा पेश करती है तो किसी राज्य में नहीं करती। आपने असम और दिल्ली में चेहरा पेश किया, मगर बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा में नहीं किया। अब उत्तर प्रदेश में भी आपने कोई चेहरा पेश नहीं किया, इसकी क्या वजह है?
अमित शाह - क्या होता है कि यह राज्यों की स्थिति पर निर्भर करता है। हर चुनाव के अपने डायनामिक्स होते हैं। इसी आधार पर पार्टी तय करती है। राज्यों के डायनामिक्स के हिसाब से ही हमने असम और दिल्ली में चेहरा दिया था, मगर बिहार, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र में नहीं दिया। उत्तर प्रदेश में भी पार्टी ने तय किया कि हम कोई चेहरा पेश नहीं करेंगे।
अमर उजाला - आलोचकों का कहना है कि आपके पास कोई मजबूत चेहरा ही नहीं है?
अमित शाह - हमें बहुमत हासिल कर लेने दीजिए। जवाब मिल जाएगा।
अमर उजाला - पार्टी का ही कहना था कि बीते लोकसभा चुनाव में मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से ने आपको वोट दिया था। अब यह तबका पार्टी के घोषणा पत्र में राम जन्मभूमि मुद्दे को उठाने से नाराज और हतोत्साहित नहीं होगा?
अमित शाह - घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा नया नहीं है। पार्टी नब्बे के दशक से ही राज्य के हर विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में राम मंदिर मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में शामिल करती आई है। बीते लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्र में भी यह मुद्दा शामिल था।
अमर उजाला - मगर आपकी पार्टी ने एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया, इसके राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं?
अमित शाह - भाजपा न तो मतदाताओं को धर्म के आधार पर देखती है और न ही धर्म के आधार पर टिकट ही बांटती है। हमने कभी टिकट बांटने में धर्म को आधार नहीं बनाया।
अमर उजाला - बीते लोकसभा चुनाव में बढ़ चढ़कर समर्थन करने वाली जाट बिरादरी आपसे खासी नाराज है। इन्हें लगता है कि आपने आरक्षण मामले में उनका साथ नहीं दिया। मुजफ्फरनगर दंगा मामले में उनकी मदद नहीं की। इन्हें मनाने के लिए आपको भी मोर्चे पर जुटना पड़ा। क्या इनकी नाराजगी से पार्टी को नुकसान नहीं होगा?
अमित शाह - यह बिरादरी पार्टी से बिल्कुल भी नाराज नहीं है। इस बिरादरी को पता है कि अगर उनका वोट भाजपा को नहीं जाएगा तो सपा या बसपा की सरकार बनेगी। वही सपा-बसपा जिसने इस बिरादरी के आरक्षण के लिए कुछ नहीं किया। सपा-बसपा की सरकार यह बिरादरी किसी कीमत पर नहीं चाहती। जाहिर तौर पर लोकसभा चुनाव की तर्ज पर इस चुनाव में भी यह बिरादरी भाजपा के ही पक्ष में खड़ी है।
अमर उजाला - मगर इस समुदाय के पास राष्ट्रीय लोकदल के रूप में एक विकल्प नहीं है?
अमित शाह - कितनी सीटों पर लड़ रही है रालोद, यह भी तो देख रही है यह बिरादरी। क्या 25-30 सीटों पर लड़ कर रालोद सरकार बना लेगी? अगर नहीं तो इसे बाद में सपा, बसपा का ही साथ देना है। इसलिए मैं कह रहा हूं कि यह बिरादरी सपा-बसपा में से किसी की सरकार नहीं चाहती। ऐसे में वह रालोद को वोट देकर इन्हीं दलों की सहायता करना क्यों चाहेगी?
अमर उजाला - मगर पार्टी ने इतनी बड़ी संख्या में दल बदलुओं को टिकट क्यों दिया, इससे नकारात्मक राजनीतिक संदेश नहीं गया है?
अमित शाह - हमने पार्टी और मोदी सरकार की नीतियों, विचारधारा में आस्था जताने वालों को टिकट दिया है। टिकट पाने वाले अब भाजपा के सदस्य हैं। हमने दलबदल करा कर सरकार नहीं बनाई है। टिकट हासिल करने के बाद ये सभी अब जनता की अदालत में हैं। उन्हें फैसला करने दीजिए।
अमर उजाला - गोवा-पंजाब में मतदान हो चुका है, इन राज्यों के बारे में पार्टी का आकलन क्या है?
अमित शाह - गोवा में हमारी सत्ता हर हाल में बरकरार रहेगी। जहां तक पंजाब का सवाल है तो मुकाबला त्रिकोणीय है। ऐसे में कुछ भी कह पाना मुश्किल है। इसके अलावा भाजपा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी सरकार बनाने जा रही है।
अमित शाह - सपा का कांग्रेस को सौ सीटें देना ही इसे साबित करता है। सपा सौ सीट किसी को दे, यह क्या साबित करता है?
अमर उजाला - मगर आप क्या मानते हैं किससे लड़ाई है भाजपा की?
अमित शाह - मैंने पहले ही कहा है कि भाजपा को दो तिहाई बहुमत मिलेगा। हां हमारी लड़ाई तो सपा-कांग्रेस गठबंधन से ही होगी। बसपा कहीं नहीं है।
अमर उजाला - मगर क्या इससे कांग्रेस के प्रति नकारात्मक संदेश नहीं गया?
अमित शाह - मैं कांग्रेस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मगर असली हार मुलायम सिंह यादव की हुई है। वह मुलायम जिन्होंने पूरी जिंदगी कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उनकी पार्टी अब उसी कांग्रेस की जूनियर पार्टनर बन गई। यह तो तभी हुआ जब सपा अपना विश्वास खो बैठी।
अमर उजाला - सपा में हुए संग्राम पर कई तरह की बातें हो रही है। कोई कह रहा है कि मुलायम वाकई अखिलेश से नाराज हैं। जबकि यह भी कहा जा रहा है कि यह मुलायम की अखिलेश का कद बड़ा बनाने की सोची समझी योजना थी। आप क्या मानते हैं?
अमित शाह - मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मगर यूपी की जनता को फर्क नहीं पड़ता। जनता को सच्चाई पता है।
अमर उजाला - विधानसभा चुनाव में भाजपा किसी राज्य में मुख्यमंत्री पद का चेहरा पेश करती है तो किसी राज्य में नहीं करती। आपने असम और दिल्ली में चेहरा पेश किया, मगर बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा में नहीं किया। अब उत्तर प्रदेश में भी आपने कोई चेहरा पेश नहीं किया, इसकी क्या वजह है?
अमित शाह - क्या होता है कि यह राज्यों की स्थिति पर निर्भर करता है। हर चुनाव के अपने डायनामिक्स होते हैं। इसी आधार पर पार्टी तय करती है। राज्यों के डायनामिक्स के हिसाब से ही हमने असम और दिल्ली में चेहरा दिया था, मगर बिहार, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र में नहीं दिया। उत्तर प्रदेश में भी पार्टी ने तय किया कि हम कोई चेहरा पेश नहीं करेंगे।
अमर उजाला - आलोचकों का कहना है कि आपके पास कोई मजबूत चेहरा ही नहीं है?
अमित शाह - हमें बहुमत हासिल कर लेने दीजिए। जवाब मिल जाएगा।
अमर उजाला - पार्टी का ही कहना था कि बीते लोकसभा चुनाव में मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से ने आपको वोट दिया था। अब यह तबका पार्टी के घोषणा पत्र में राम जन्मभूमि मुद्दे को उठाने से नाराज और हतोत्साहित नहीं होगा?
अमित शाह - घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा नया नहीं है। पार्टी नब्बे के दशक से ही राज्य के हर विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में राम मंदिर मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में शामिल करती आई है। बीते लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्र में भी यह मुद्दा शामिल था।
अमर उजाला - मगर आपकी पार्टी ने एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया, इसके राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं?
अमित शाह - भाजपा न तो मतदाताओं को धर्म के आधार पर देखती है और न ही धर्म के आधार पर टिकट ही बांटती है। हमने कभी टिकट बांटने में धर्म को आधार नहीं बनाया।
अमर उजाला - बीते लोकसभा चुनाव में बढ़ चढ़कर समर्थन करने वाली जाट बिरादरी आपसे खासी नाराज है। इन्हें लगता है कि आपने आरक्षण मामले में उनका साथ नहीं दिया। मुजफ्फरनगर दंगा मामले में उनकी मदद नहीं की। इन्हें मनाने के लिए आपको भी मोर्चे पर जुटना पड़ा। क्या इनकी नाराजगी से पार्टी को नुकसान नहीं होगा?
अमित शाह - यह बिरादरी पार्टी से बिल्कुल भी नाराज नहीं है। इस बिरादरी को पता है कि अगर उनका वोट भाजपा को नहीं जाएगा तो सपा या बसपा की सरकार बनेगी। वही सपा-बसपा जिसने इस बिरादरी के आरक्षण के लिए कुछ नहीं किया। सपा-बसपा की सरकार यह बिरादरी किसी कीमत पर नहीं चाहती। जाहिर तौर पर लोकसभा चुनाव की तर्ज पर इस चुनाव में भी यह बिरादरी भाजपा के ही पक्ष में खड़ी है।
अमर उजाला - मगर इस समुदाय के पास राष्ट्रीय लोकदल के रूप में एक विकल्प नहीं है?
अमित शाह - कितनी सीटों पर लड़ रही है रालोद, यह भी तो देख रही है यह बिरादरी। क्या 25-30 सीटों पर लड़ कर रालोद सरकार बना लेगी? अगर नहीं तो इसे बाद में सपा, बसपा का ही साथ देना है। इसलिए मैं कह रहा हूं कि यह बिरादरी सपा-बसपा में से किसी की सरकार नहीं चाहती। ऐसे में वह रालोद को वोट देकर इन्हीं दलों की सहायता करना क्यों चाहेगी?
अमर उजाला - मगर पार्टी ने इतनी बड़ी संख्या में दल बदलुओं को टिकट क्यों दिया, इससे नकारात्मक राजनीतिक संदेश नहीं गया है?
अमित शाह - हमने पार्टी और मोदी सरकार की नीतियों, विचारधारा में आस्था जताने वालों को टिकट दिया है। टिकट पाने वाले अब भाजपा के सदस्य हैं। हमने दलबदल करा कर सरकार नहीं बनाई है। टिकट हासिल करने के बाद ये सभी अब जनता की अदालत में हैं। उन्हें फैसला करने दीजिए।
अमर उजाला - गोवा-पंजाब में मतदान हो चुका है, इन राज्यों के बारे में पार्टी का आकलन क्या है?
अमित शाह - गोवा में हमारी सत्ता हर हाल में बरकरार रहेगी। जहां तक पंजाब का सवाल है तो मुकाबला त्रिकोणीय है। ऐसे में कुछ भी कह पाना मुश्किल है। इसके अलावा भाजपा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी सरकार बनाने जा रही है।