मणिपुर में बीजेपी को सरकार गठन का न्योता, बीरेन सिंह बनेंगे सीएम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में बीते तीन दिनों से चले राजनीतिक नाटक के बाद अब सरकार गठन की तस्वीर साफ हो गई है। मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के इस्तीफे, बीरेन सिंह के भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने और नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) की ओर से भाजपा के समर्थन के एलान के बाद अब यहां मंगलवार को राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया। बीरेन सिंह बुधवार को मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे।
भाजपा विधायक दल के नेता और भावी मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा है कि राज्य में महीनों से जारी नाकेबंदी खत्म करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। इससे पहले सोमवार रात को इबोबी सिंह ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने उनसे उनसे ऐसा करने को कहा था कि ताकि नई सरकार के गठन की कवायद शुरू की जा सके। मंगलवार को सुबह एनडीए की सहयोगी एनपीएफ के चार विधायकों ने राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की और उनको भाजपा को समर्थन से संबधित पत्र सौंपा। राजभवन सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल खुद इन विधायकों से मिल कर इस बात की पुष्टि करना चाहती थीं कि वे किस राजनीतिक पार्टी को समर्थन दे रहे हैं।
बीरेन सिंह ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य के लोग सुशासन चाहते हैं। हमारी सरकार की प्राथमिकता आर्थिक नाकेबंदी को खत्म कर कानून व व्यवस्था की स्थिति को सुधारना है। उन्होंने सुशासन के वादे के साथ राज्य के विकास के प्रति भाजपा का कृतसंकल्प दोहराया है। इस बीच, भाजपा सूत्रों ने बताया कि बीरेन सिंह ने शपथ ग्रहण के लिए बुधवार का दिन चुना है जो वे अपने लिए लकी मानते हैं।
ध्यान रहे कि 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस को 28 सीटें और भाजपा को 21 सीटें मिली थीं । लेकिन एनपीपी और एनपीएफ के चार-चार विधायकों के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी के एक, तृणमूल कांग्रेस के एक और एक निर्दलीय विधायक ने भी उसे समर्थन करने का एलान किया है।
भेदभाव के आरोप पर राज्यपाल ने दिया स्पष्टीकरण
गौरतलब है कि मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला पर सरकार गठन के लिए भाजपा को न्योता देने को लेकर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। हेपतुल्ला ने इन आरोपों को लेकर मंगलवार को सफाई देते हुए कहा, मैं 37 साल सदन में रही और मैं कांग्रेस में थी। मैंने गैर-कांग्रेसी सरकार के साथ काम भी किया लेकिन कभी मेरे ऊपर इस तरह के आरोप नहीं लगे।
राज्यपाल हेपतुल्ला ने कहा- मैं जानती हूं कि कांग्रेस प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन उसके पास बहुमत नहीं है। एक राज्यपाल का काम संविधान के दायरे में रह कर राज्य में स्थिरता बनाए रखना है।In my 37 years in Parliament & when I was in Congress &worked with non-Cong govts, never have such allegations been put on me:Najma Heptulla
— ANI (@ANI_news) March 14, 2017
साथ ही हेपतुल्ला ने कहा, सुप्रीमकोर्ट के आदेश के अनुसार राज्यपाल की जिम्मेदारी है कि इस बात का ख्याल रखे कि किस पार्टी के पास बहुमत है और कौन राज्य को स्थिर सरकार देने में सक्षम है।I knw Congress is single largest party,it's not incumbent.Responsibility of Guv vested by Constitution to weigh&measure stability:GuvManipur pic.twitter.com/H370XtCW8P
— ANI (@ANI_news) March 14, 2017
Ruling of SC says responsibility of Governor is to see who has majority & will work for state's stability: Najma Heptulla, Governor Manipur pic.twitter.com/AR8cu38mWT
— ANI (@ANI_news) March 14, 2017