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एक बार तो अपनी दादी और राजमाता स्व. विजयाराजे का नाम ले लेते ज्योतिरादित्य सिंधिया!

Wed, 11 Mar 2020 04:52 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 11 Mar 2020 04:52 PM IST
सार

  • भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने दो बार लिया विजयाराजे का नाम
  • ज्योतिरादित्य ने लिया दो बार लिया पिता माधव राव और पीएम, शाह, नड्डा का नाम
  • भाजपा के प्रवक्ता जफर इस्लाम को भी नहीं भूले

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BJP Leader jyotiraditya scindia did not take name of Grand mother in his speech
Jyotiraditya Scindia Join BJP - फोटो : AmarUjala

विस्तार

जिस दादी, स्व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने जनसंघ को खड़ा करने में महती भूमिका निभाई, मध्यप्रदेश में पहली सरकार बनाई, भाजपा की संस्थापक रही, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया उन्हीं को भूल गए। नाम तक नहीं लिया। जबकि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व राजमाता को नहीं भूला।
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सिंधिया की मौजूदगी में अपने संक्षिप्त संबोधन भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने दो बार राजमाता का नाम लिया। नड्डा के याद करने की गहराई से लग रहा था कि वह ज्योतिरादित्य से भी यही उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन सिंधिया घराने के भाजपा में शामिल हुइ कद्दावर नेता दादी से दूरी बनाए रखी।

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ये दो तारीखें हैं अहम

ज्योतिरादित्य ने भाजपा ज्वाइन करने के  बाद बताया कि उनके जीवन में दो तारीखें महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में कुछ तारीख होती हैं, जो उसके जीवन के पूरे ध्येय को बदल देती है। उन्होंने कहा कि ये दोनों तारीखें 30 सितंबर 2001 और 10 मार्च 2020 है।


30 सितंबर को उनके पूज्य पिता माधव राव सिंधिया की दुर्घटना में मृत्यु हुई थी और 10 मार्च 2020 को उनके पिता की 75वीं वर्षगांठ थी। सिंधिया ने कहा कि उनके पिता ने और 18 साल के राजनीतिक जीवन में स्वयं उन्होंने भारत माता की जनसेवा को ही पहला लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में रह कर यही करने की कोशिश की। लेकिन दादी की बनाई पार्टी में दादी को ही भूल गए।

भाजपा नेताओं ने भी लिया संज्ञान

भाजपा मुख्यालय के जिस प्रेसवार्ता हाल में ज्योतिरादित्य ने हरे किनारे वाला भगवा पटका धारण कर भाजपा की सदस्यता ली, वहां कुछ भाजपा के नेता भी मौजूद थे। कुछ भाजपा मुख्यालय के अन्य कमरे में बैठकर सिंधिया के भाजपा में आने की औपचारिकता देख रहे थे। लेकिन यह सत्र समाप्त होने के बाद एक बड़े नेता की जुबान पर भी सिंधिया का यह संस्कार था।

सूत्र को उम्मीद थी कि ज्योतिरादित्य कम से कम अपनी दादी को तो याद करेंगे। अधिकांश का मानना था कि सिंधिया को इनकी पुरानी पार्टी ने काफी कुछ दिया। केंद्रीय मंत्री बनाया, लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक बनाया, कांग्रेस महासचिव बनाया और उत्तर प्रदेश में पश्चिमी हिस्से का प्रभार भी दिया, लेकिन सिंधिया ने वहां के वातावरण को सुविधाजनक न समझकर भाजपा को चुन लिया है।

चेहरे पर था तनाव, सवाल-जवाब से भी बचे

इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया के चेहरे का भाव लगातार नई रंगत ले रहा था। इसमें उत्साह कम और तनाव ज्यादा था। इतना ही नहीं वे मीडिया का सवाल लेने के लिए भी तैयार नहीं थे। अपनी बात खत्म करके चुपचाप वरिष्ठ नेताओं के साथ चले गए। सिंधिया के चेहरे पर तनाव के दो-तीन क्षण आए। खासकर जब भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने उनके गले में भगवाई पटका डाला।

कभी तिरंगे किनारे के गमछे से खुद को सजाने वाले सिंधिया का उस समय भाव कुछ और कहानी कह रहा था। हालांकि उन्होंने कहा भी मन दु:खी और व्यथित है। हालांकि इस व्यथा को उन्होंने कांग्रेस पार्टी में अपनी उम्मीदें पूरी न हो पाने, वहां जड़ता आने, मध्यप्रदेश सरकार के भीतर ट्रांसफर उद्योग चलने, भ्रष्टाचार बढ़ने और मंदसौर के किसानो की पीड़ा से जोड़ा। यही कारण उन्होंने कांग्रेस छोड़ने के बताए।

 

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