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एयर इंडिया: विनिवेश के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी, टाटा द्वारा अधिग्रहण रोकने के लिए खटखटाया दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा
Mon, 03 Jan 2022 10:56 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 03 Jan 2022 10:56 PM IST
सार
स्वामी एयर इंडिया को बेचने के मोदी सरकार के फैसले का भी कई बार विरोध कर चुके हैं। पहले तो उन्होंने बोली की प्रक्रिया के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कह दी थी।
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भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी एयर इंडिया विनिवेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे।
- फोटो : Social Media
विस्तार
भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया को रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इतना ही नहीं उन्होंने एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया में आगे किसी भी फैसले या मंजूरी को रद्द करने से जुड़े दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की है। बताया गया है कि जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की डिविजन बेंच इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगी।
स्वामी ने वकील सत्य सभरवाल के जरिए दायर याचिका में मांग की है कि सीबीआई को एयर इंडिया के विनिवेश और प्रतिवादी अधिकारियों की भूमिका और कार्यशैली की जांच के आदेश दिए जाएं। याचिका में विनिवेश प्रक्रिया की जांच रिपोर्ट दायर करवाने की भी मांग की गई है।
गौरतलब है कि 25 अक्तूबर 2021 को सरकार ने 18,000 करोड़ रुपये में एयर इंडिया की बिक्री के लिए टाटा संस के साथ शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। टाटा ने एयर इंडिया की खरीद के लिए 2,700 करोड़ रुपये नकद और एयरलाइन के कर्ज के 15,300 करोड़ रुपये का चुकाने का प्रस्ताव दिया है। 31 अगस्त तक एयर इंडिया पर कुल 61,562 करोड़ रुपये का कर्ज था। घाटे में चल रही एयरलाइन को टाटा समूह को सौंपने से पहले इस कर्ज का 75 प्रतिशत या 46,262 करोड़ रुपये एआईएएचएल को हस्तांतरित किया जाएगा।
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एयर इंडिया को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ स्वामी
एयर इंडिया को बेचने के मोदी सरकार के फैसले का स्वामी कई बार विरोध कर चुके हैं। पहले तो उन्होंने बोली की प्रक्रिया के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कह दी थी। इसके बाद हाल ही में उन्होंने इस एयरलाइन के निजीकरण के फैसले को पोंजी स्कीम बता दिया था। स्वामी ने तब ट्विटर पर लिखा था- एयर इंडिया की खरीद के लिए 15,000 करोड़ रुपये कर्ज के रुप में जुटाने की संभावना है। मतलब जिस एयर इंडिया को भारत सरकार ने बेचा, उसे सरकारी बैंक ही फाइनेंस कर रही है। ये पोंजी स्कीम है।
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स्वामी ने वकील सत्य सभरवाल के जरिए दायर याचिका में मांग की है कि सीबीआई को एयर इंडिया के विनिवेश और प्रतिवादी अधिकारियों की भूमिका और कार्यशैली की जांच के आदेश दिए जाएं। याचिका में विनिवेश प्रक्रिया की जांच रिपोर्ट दायर करवाने की भी मांग की गई है।
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गौरतलब है कि 25 अक्तूबर 2021 को सरकार ने 18,000 करोड़ रुपये में एयर इंडिया की बिक्री के लिए टाटा संस के साथ शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। टाटा ने एयर इंडिया की खरीद के लिए 2,700 करोड़ रुपये नकद और एयरलाइन के कर्ज के 15,300 करोड़ रुपये का चुकाने का प्रस्ताव दिया है। 31 अगस्त तक एयर इंडिया पर कुल 61,562 करोड़ रुपये का कर्ज था। घाटे में चल रही एयरलाइन को टाटा समूह को सौंपने से पहले इस कर्ज का 75 प्रतिशत या 46,262 करोड़ रुपये एआईएएचएल को हस्तांतरित किया जाएगा।
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एयर इंडिया को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ स्वामी
एयर इंडिया को बेचने के मोदी सरकार के फैसले का स्वामी कई बार विरोध कर चुके हैं। पहले तो उन्होंने बोली की प्रक्रिया के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कह दी थी। इसके बाद हाल ही में उन्होंने इस एयरलाइन के निजीकरण के फैसले को पोंजी स्कीम बता दिया था। स्वामी ने तब ट्विटर पर लिखा था- एयर इंडिया की खरीद के लिए 15,000 करोड़ रुपये कर्ज के रुप में जुटाने की संभावना है। मतलब जिस एयर इंडिया को भारत सरकार ने बेचा, उसे सरकारी बैंक ही फाइनेंस कर रही है। ये पोंजी स्कीम है।