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ओपी धनखड़ बने भाजपा के नए हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी नेतृत्व ने दूसरे राज्यों को भी दिया संदेश

Mon, 20 Jul 2020 04:15 AM IST
अवधेश कुमार हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: अवधेश कुमार Updated Mon, 20 Jul 2020 04:15 AM IST
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BJP gets new president op dhankar after three months in Haryana
OP Dhankar - फोटो : file photo
हरियाणा में तीन महीने की माथापच्ची के बाद भाजपा को नया अध्यक्ष मिल गया। हालांकि इस पूरी लड़ाई में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर एड़ी चोटी का जोर लगाने के बावजूद अपने पसंदीदा चेहरे को पार्टी की कमान नहीं दिला पाए। शीर्ष नेतृत्व ने ओपी धनखड़ को अध्यक्ष बनाकर स्पष्ट संदेश दिया है कि अब मुख्यमंत्रियों को अध्यक्ष के रूप में यस मैन नहीं मिलेगा।
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दरअसल, अप्रैल में ही केंद्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया था कि वह जाट बिरादरी के नेता को ही अध्यक्ष पद देना चाहता है। सूत्रों के मुताबिक, अध्यक्ष पद पर गृहमंत्री अमित शाह की पहली पसंद कैप्टन अभिमन्यु थे, वहीं पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के करीबी होने के कारण धनखड़ भी पद के प्रबल दावेदार थे। वहीं, मुख्यमंत्री मनोहर लाल न तो अभिमन्यु और न ही धनखड़ के नाम पर राजी थे। 
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उन्होंने सुभाष बराला को दोबारा अध्यक्ष बनाने की कोशिश की। लेकिन शीर्ष नेतृत्व की ना के बाद उन्होंने गैर जाट नेता को संगठन की कमान दिलाने की पूरी ताकत लगाई। इस क्रम में खट्टर ने कृष्णपाल गुर्जर का नाम प्रस्तावित किया। इसके अलावा संदीप जोशी और महिपाल ढांढा के नाम को लेकर भी कोशिश की गई। लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया कि अध्यक्ष सिर्फ जाट नेता को ही बनाया जाएगा।   
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दरअसल भाजपा नहीं चाहती कि उसकी ओर से जाट बिरादरी को नकारात्मक संदेश जाए। भले ही हरियाणा में यह बिरादरी कांग्रेस, जजपा की करीबी है, मगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और मध्यप्रदेश में यह बिरादरी भाजपा के पक्ष में वोट करती रही है। फिर पार्टी की रणनीति जाट बिरादरी में पैठ बनाने की है।

इसलिए बदली रणनीति 

दरअसल,  लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के हाथ से झारखंड और महाराष्ट्र की सत्ता चली गई, हरियाणा में जजपा की बैसाखी पर सरकार बनी तो दिल्ली में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा की तुलना में विधानसभा चुनाव में हरियाणा में 17 फीसदी तो झारखंड में 22 फीसदी वोट घट गए। पार्टी समीक्षा में यह पाया गया कि राज्य में जिसे पार्टी ने चेहरा बनाया, उस चेहरे से वोट बढ़ने के बदले और घट गए। तभी तय किया गया कि जरूरत पड़ने पर राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन किया जाए और पार्टी शासित राज्यों में संगठन की कमान सीएम के यस मैन को ना दिया जाए।

अनुभव और नड्डा से नजदीकी आई काम

धनखड़ हरियाणा में पार्टी के पुराने नेताओं में से एक हैं। करीब चार दशक से राजनीति में सक्रिय धनखड़ ने तब भाजपा का दामन थामा जब हरियाणा में पार्टी की कोई पहचान नहीं थी। पार्टी ने उन्हें केंद्रीय संगठन में भी मौका दिया। बीती सरकार में धनखड़ मंत्री बनाए गए, मगर विधानसभा चुनाव हार गए। इसके बावजूद केंद्रीय नेतृत्व ने उनके अनुभव और सियासी कद को देखते हुए अन्य नेताओं पर तरजीह दी।

आसान नहीं होगी चुनौती 

नए अध्यक्ष धनखड़ के लिए पहली चुनौती जल्द होने वाला बरौदा उपचुनाव है। इसके अलावा, उनके कांग्रेस के भूपेंद्र हुड्डा और जजपा के दुष्यंत चौटाला के बीच जाट बिरादरी में भाजपा की पैठ बनाने की चुनौती होगी। गौरतलब है कि बीते विधानसभा चुनाव में जाट बिरादरी ने भाजपा के खिलाफ वोट किया था। इस कारण भाजपा राज्य में बहुमत से दूर रख गई थी।
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