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बंगाल चुनाव: भाजपा ने खेला हर दांव, लेकिन लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन दोहराने में रही नाकाम
Mon, 03 May 2021 07:44 AM IST
Jeet Kumar
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 03 May 2021 07:44 AM IST
सार
- जनप्रिय-कद्दावर चेहरे की कमी और बागी-दागी से प्यार ने अरमानों में लगाया पलीता
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jp nadda, narendra modi, amit shah
- फोटो : PTI
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विस्तार
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी कई उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद खुल कर जश्न नहीं मना सकी। इन चुनावों में भाजपा पश्चिम बंगाल की सत्ता के रूप में अपना मुख्य लक्ष्य भेदने में नाकाम रही।
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अतिआत्मविश्वास, थोक के भाव में तृणमूल कांग्रेस के बागी-दागी नेताओं की पार्टी में एंट्री और जनप्रिय-कद्दावर चेहरे के अभाव ने भाजपा के अरमानों में पलीता लगा दिया। बीते कई चुनावों की तरह इस चुनाव में भी भाजपा लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को नहीं छू पाई।
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राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए पार्टी ने सत्तारूढ़ ममता सरकार में कथित तौर पर हावी कट (कमीशन) क्राइम (अपराध) और करप्शन (भ्रष्टाचार) को मुद्दा बनाया था। हालांकि, पार्टी में तृणमूल के दागियों की भरमार और इन्हें मिले विशेष महत्व ने पार्टी के मुख्य मुद्दे की ही धार कुंद कर दी। पार्टी में दल-बदलुओं की पौ बारह कराने से कैसी दुर्गति हुई, इसे इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि तृणमूल छोड़ भाजपा में गए 80 फीसदी विधायक और मंत्री चुनाव हार गए। केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, सांसद लॉकेट चटर्जी और राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले स्वपन दासगुप्ता भी जीत हासिल करने में नाकाम रहे।
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नहीं टूटा मिथक: तृणमूल को वोट में कमी के बदले और हुई बढ़ोतरी
राज्य में भाजपा के लिए सत्ता हासिल करने के दो ही रास्ते थे। या तो भाजपा लोकसभा में 40 फीसदी वोट को और बढ़ाए या तृणमूल को हासिल 43.3 फीसदी वोटों में कमी लाए। परिणाम बताते हैं, कि इसका उल्टा हुआ। भाजपा अपना वोट बढ़ाने के बदले हासिल वोट को जोड़े नहीं रख सकी, जबकि तृणमूल के वोट में कमी आने की जगह बढ़ोतरी हो गई। इस विधानसभा में यह अंतर बढ़कर ग्यारह फीसदी से ज्यादा हो गया।
भाजपा के लिए झटका क्यों
दरअसल राज्य में सत्ता हासिल करने लिए पार्टी ने अपनी सारी ताकत झोंक दी थी। चुनाव अभियान में पीएम मोदी ने 15, अमित शाह और नड्डा ने अलग-अलग 50 से अधिक रैलियां, दो दर्जन से अधिक रोड शो किए।
- यूपी के सीएम योगी, राजनाथ सिंह ने भी डेढ़ दर्जन से अधिक रैलियां की। धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल, गजेंद्र शेखावत सहित दो दर्जन वरिष्ठ मंत्री डेढ़ महीने तक राज्य में डेरा डाले रहे। इसके बावजूद पार्टी लोकसभा चुनान का प्रदर्शन नहीं दोहरा पाई।