फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   BJP: BJP will make 'war on corruption' a big issue in the upcoming Lok Sabha election 2024

BJP: भ्रष्टाचार पर वार होगा मोदी का चुनावी मुद्दा, ईडी-सीबीआई के छापों का किसे मिलेगा फायदा?

Tue, 30 Jan 2024 07:27 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 30 Jan 2024 07:27 PM IST
सार

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि इन हमलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई नहीं कहा जा सकता। लालू प्रसाद यादव जैसे नेता 1990 के दशक में भ्रष्टाचार के मामले में उस समय जेल गए थे, जब भाजपा दूर-दूर तक सत्ता में नहीं थी...

विज्ञापन
BJP: BJP will make 'war on corruption' a big issue in the upcoming Lok Sabha election 2024
भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस करते हुए - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

लोकसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू होने में चंद दिन शेष रह गए हैं, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई की छापेमारी जारी है। हेमंत सोरेन, लालू यादव और तेजस्वी यादव से पूछताछ जारी है। अभिषेक बनर्जी से भी पूछताछ हो चुकी है। अरविंद केजरीवाल पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। चुनाव से पहले अभी विपक्ष के कई और नेताओं पर भी कार्रवाई होने की आशंका है।

विज्ञापन

इससे यह साफ हो गया है कि भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में 'भ्रष्टाचार पर वार' को बड़ा मुद्दा बनाएगी। अब तक बरामद हजारों करोड़ की नकदी को दिखाते हुए केंद्र सरकार इसे भ्रष्टाचार पर की गई अपनी कार्रवाई की सफलता के तौर पर जनता के सामने रखेगी। भाजपा इसे प्रधानमंत्री मोदी की ईमानदारी और भ्रष्टाचार को किसी कीमत पर बर्दाश्त न करने की नीति के तौर पर पेश करेगी।     

विज्ञापन

लोकतंत्र खत्म करने की कोशिश- विपक्ष

वहीं, विपक्ष बार-बार यह बताने की कोशिश कर रहा है कि यदि इसी तरह विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई होती रही, तो देश में लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा। उसके अनुसार, यह विपक्ष को समाप्त करने की कोशिश है। उसका तर्क है कि सभी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के निशाने पर केवल विपक्षी दलों के नेता हैं। सत्ता पक्ष के किसी नेता पर कार्रवाई नहीं हो रही है, जो साबित करता है कि इस छापेमारी का उद्देश्य विपक्ष को कमजोर करना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

अब प्रश्न यह है कि जनता इसमें से किस तर्क को स्वीकार करेगी- वह इसे भ्रष्ट नेताओं पर ईमानदार प्रधानमंत्री द्वारा की गई कठोर कार्रवाई मानेगी, या वह इसे विपक्ष को कमजोर करने की एक गलत कोशिश मानेगी?  

भ्रष्टाचार को जातिगत राजनीति का संरक्षण

राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने अमर उजाला से कहा कि यह देश की राजनीति का दुर्भाग्य रहा है कि जातिगत राजनीति ने भ्रष्ट नेताओं के भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का काम किया है। यूपी में सपा-बसपा के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप रहे हैं। इन नेताओं के द्वारा राजनीति शुरू करने के समय उनकी संपत्ति और आज की संपत्ति की तुलना ही यह बताने के लिए पर्याप्त है कि बेहद भ्रष्ट तरीके से अकूत संपत्ति इकट्ठी की गई है।

इस खुलेआम भ्रष्टाचार के बाद भी जनता के एक वर्ग ने उन्हें अपना नेता माना और उन्हें वोट देकर उनको मजबूत करने का काम किया। इसका दुष्परिणाम हुआ कि यह भ्रष्टाचार चलता रहा। बिहार में ठीक यही आरोप लालू प्रसाद यादव और झारखंड में हेमंत सोरेन पर लगे हैं। लेकिन जातिगत आधार के कारण ही इन नेताओं को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा है।        

भ्रष्टाचार को संरक्षण के युग की समाप्ति

धीरेंद्र कुमार ने कहा कि भाजपा ने गैर यादव ओबीसी, महादलितों और अति पिछड़ों को यह बात बताने में सफलता हासिल की कि भ्रष्ट नेता जातियों के नाम पर उनके वोट लेते हैं, लेकिन सत्ता पाने के बाद केवल अपने परिवार का हित करते हैं। यूपी में भाजपा की यह रणनीति काम करती दिखी है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के परंपरागत मतदाता इनसे खिसक कर भाजपा के पाले में चले गए हैं। इससे भ्रष्टाचार को जातिगत राजनीति का संरक्षण मिलना कम हुआ है।  

प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह लोक कल्याणकारी योजनाओं के जरिए लोगों की सेवा की है, लाखों लोगों को पक्के घर, करोड़ों लोगों को  शौचालय, हर महीने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन सहित अनेक योजनाओं का लाभ मिला है, उससे भी इन जातियों का विश्वास मजबूत हुआ है। मोदी और भाजपा पर उनका यह बढ़ता विश्वास भाजपा के बढ़ते मतों के रूप में साफ दिखाई पड़ रहा है।
यदि अदालतें साक्ष्यों को देखते हुए मनीष सिसोदिया या संजय सिंह को जमानत नहीं दे रही हैं, तो अरविंद केजरीवाल के लिए जनता को यह समझाना मुश्किल होगा कि यह भाजपा की राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। पैसों के लेनदेन के सबूत उनके तर्कों को कमजोर कर देंगे।

ऐसे में इस बात की संभावना ज्यादा है कि जनता विपक्षी दलों के नेताओं पर ईडी-सीबीआई की कार्रवाई को भ्रष्टाचार पर की गई कार्रवाई माने। यदि ऐसा होता है तो भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है।  

राजनीति के आरोप गलत- भाजपा

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि इन हमलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई नहीं कहा जा सकता। लालू प्रसाद यादव जैसे नेता 1990 के दशक में भ्रष्टाचार के मामले में उस समय जेल गए थे, जब भाजपा दूर-दूर तक सत्ता में नहीं थी। ऐसे में भाजपा ने न तो उन पर एफआईआर दर्ज की थी, न ही उन्हें जेल तक पहुंचाने में कोई भूमिका निभाई थी। ऐसे में आज उसी मामले में हो रही जांच को भाजपा से जोड़कर देखना सही नहीं है।

इसी प्रकार झारखंड के शिबू सोरेन उस समय नरसिम्हा सरकार को बचाने में करोड़ों रुपये लेने के मामले में गिरफ्तार किए गए थे, जब भाजपा दूर-दूर तक सत्ता में नहीं थी। ऐसे इतिहास को देखते हुए यदि आज सोरेन परिवार पर भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई होती है, तो जनता इसे विपक्ष पर नहीं, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई ही मानेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed