महाराष्ट्र: भाजपा का आरोप, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को पटरी से उतारने में लगी ठाकरे सरकार
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महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की महाविकास अघाड़ी सरकार और भाजपा के बीच शुरू मेट्रो बनाम बुलेट ट्रेन विवाद के बीच महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ठाकरे सरकार बुलेट ट्रेन को पटरी से उतारने में लगी है। इस तरह की अनावश्यक क्रिया-प्रतिक्रिया से महाराष्ट्र का नुकसान हो रहा है। सरकार को चाहिए कि वह सभी दलों के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री से मिले जिससे समस्या का स्थाई समाधान हो।
कंजूरमार्ग में मेट्रो कारशेड निर्माण पर बॉम्बे हाईकोर्ट की रोक के बाद महाविकास अघाड़ी सरकार ने बुलेट ट्रेन और पालघर के डहाणू तहसील में वाढवन बंदरगाह परियोजना में अड़ंगा डालने का प्रयास किया है। हालांकि शिवसेना नेता व शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि इन विवादित मुद्दों के समाधान के लिए एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार नेतृत्व करें। इस पर महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष पाटिल ने कहा कि पवार को नेतृत्व करने से किसने रोका है।
चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि किसी भी विकास परियोजना पर क्रिया-प्रतिक्रिया करने से राज्य का ही नुकसान हो रहा है। इसलिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस से बातचीत करें और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल लेकर दिल्ली जाएं। इससे पहले भी देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने विकास के मुद्दे पर विपक्ष के नेताओं को साथ लेकर मामलों को सुलझाया है। पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का अपनी जिद पर अड़े रहना ठीक नहीं है।
तकनीकी समस्या होने के बाद भी जिद पर अड़े हैं उद्धव ठाकरे
चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी तौर पर कंजूरमार्ग में मेट्रो कारशेड नहीं बन सकता। फिर भी उद्धव ठाकरे जिद पर अड़े हैं। यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन को लेकर कोई समस्या ही नहीं थी, लेकिन ठाणे के शील डायघर की जमीन बुलेट ट्रेन परियोजना को न देने का फैसला कर शिवसेना ने बुलेट ट्रेन आने से पहले ही उसे पटरी से उतारने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा, जबकि भाजपा ने मेट्रो कारशेड आरे की बजाय कंजूरमार्ग स्थानांतरित करने के विरोध में कोई आंदोलन नहीं किया। इसी तरह वाढवन बंदरगाह का भी विरोध शुरू किया गया है। मेरा मानना है कि इन विकास परियोजनाओं के साथ ही मराठा आरक्षण, धनगर आरक्षण के मुद्दे पर भी उद्धव ठाकरे को आगे आना चाहिए और विपक्ष के नेता को साथ लेकर प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए।
सरकार बचाने के लिए पवार कर रहे हैं कृषि सुधार कानून का विरोध
पाटिल ने कहा कि पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार की पार्टी एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) ने लोकसभा में कृषि सुधार विधेयकों का समर्थन किया था। जिस दिन राज्यसभा में बिल पर चर्चा थी उस दिन शरद पवार वोटिंग के लिए नहीं आए जबकि वह देश में ही थे। वहीं, शिवसेना ने राज्यसभा में विधेयक का विरोध नहीं किया था बल्कि वॉकआउट किया था। लेकिन महाविकास अघाड़ी सरकार को बचाने के लिए पवार ने कृषि सुधार कानूनों का विरोध शुरू किया है।