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सेनाध्यक्ष ने कहा- महिलाओं को नहीं दे सकते अहम भूमिकाएं और मातृत्व अवकाश

Sat, 15 Dec 2018 03:59 PM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Sat, 15 Dec 2018 03:59 PM IST
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Bipin Rawat said women are not ready for combat roles as they have responsibility of raising kids
बिपिन रावत

सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने शनिवार को कहा कि महिलाओं को कॉम्बैट (युद्ध वाली) भूमिकाएं नहीं दी जा सकती हैं क्योंकि उनके ऊपर बच्चों को पालने-पोसने की जिम्मेदारी होती है। एक महिला अधिकारी असहज महसूस कर सकती है जब उसे अग्रपंक्ति में खड़ा किया जाए या फिर कपड़े बदलते समय उसे कोई जवान देख ले। एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में रावत ने कहा कि वह महिलाओं को कॉम्बैट भूमिकाएं देने के लिए तैयार हैं लेकिन सेना नहीं है क्योंकि बहुत से जवान गांवों से आते हैं और वह एक महिला अधिकारी द्वारा अपना नेतृत्व किए जाने को स्वीकार नहीं कर पाएंगे।

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जनरल रावत ने मातृत्व अवकाश पर बात की और कहा कि सेना महिलाओं को उस समय छुट्टी नहीं दे सकती है अगर वह कमांडिंग अधिकारी है क्योंकि वह अपनी यूनिट को 6 महीनों के लिए नहीं छोड़ सकती है। उन्होंने कहा कि इन छुट्टियों पर आपत्ति करने से हंगामा हो सकता है। जब उनसे पूछा गया कि महिला अच्छी सैनिक बन सकती हैं लेकिन क्यों सेना उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। इसपर उन्होंने कहा, यह मिथ्या है। 
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मिलिट्री पुलिस की गिनती नहीं होती। क्या वहां महिलाएं कॉम्बैट रोल में हैं। इसपर रावत ने कहा, हमारे पास महिला अधिकारी इंजीनियर के तौर पर हैं। वह खनन और कामकाजी काम कर रही हैं। वायु रक्षा में वह हमारे हथियार प्रणालियों का प्रबंधन कर रही हैं। लेकिन हमने महिलाओं को अग्रपंक्ति में नहीं रखा है क्योंकि अभी हम छद्म युद्ध लड़ रहे हैं जैसे कि कश्मीर में चल रहा है।
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खतरों को जानने के बाद भी महिलाएं अपनी खुशी से सेना में आ रही हैं इसपर सेनाध्यक्ष ने कहा कि हां वे आ रही हैं। लेकिन मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। एक महिला की सेवा के 7-8 साल में मौत हो जाती है। उसके दो बच्चे हैं और वह दिल्ली या चंडीगढ़ की है तो उसके माता-पिता उसके बच्चों की देखभाल करते हैं। मेरे कहने का मतलब है कि क्या हम ऐसी परिस्थिति के लिए तैयार हैं। 

महिलाएं लड़ाकू विमान चला सकते हैं लेकिन हथियारों से लैस टैंक नहीं इसपर उन्होंने कहा, देखिए यदि एक केवल एक महिला है और उसके आस-पास बाकी जवान हैं। वह एक कमांडर है इसलिए वह जो चाहे कर सकती है। वह ऑपरेशन पर जा सकती है। लेकिन आज भी हम इस बात को स्वीकार नहीं कर सकते हैं। आज भी हमारे जवान गांव से आते हैं। इसे स्वीकार करने में समय लगेगा। 


क्या महिलाओं के लिए लॉजिस्टिक्स की कमी है। इसपर बिपिन रावत ने कहा कि जब मैं नया था तब महिलाओं को अलग तरीके से देखता था क्योंकि वहां महिलाएं भी होती थीं लेकिन वह वहां की संस्कृति है। तब क्या होगा जब यहां महिला अधिकारी मौजूद हो। हमारे आदेश हैं कि महिला अधिकारियों को एक कुटिया मिलनी चाहिए। दूसरा आदेश यह है कि उन्हें सुरक्षा कवच दिया जाए। वह कहेगी कि कोई उसे देख रहा है तो हमें उसे एक शीट देनी पड़ेगी। मैं उस दूरस्थ स्थल की बात कर रहा हूं जब उसके आस-पास 100 जवान होंगे।

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