फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Biological adoptive parents fight over compensation after minor girls death

ओडिशा: लड़की की मौत के बाद मुआवजे की राशि को लेकर जैविक और दत्तक माता-पिता का आपस में झगड़ा, जानें पूरा मामला

Fri, 10 Feb 2023 04:11 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 10 Feb 2023 04:11 PM IST
सार

तहसीलदार अश्विनी कुमार भुयन ने कहा, हम कानूनी रूप से योग्य माता-पिता को पैसा मुहैया कराएंगे। आधार कार्ड और स्कूल के एडमिशन रजिस्टर में नमिता का जिक्र रत्नाकर की बेटी के रूप में किया गया है और ममता का जैविक माता-पिता के रूप में जिक्र किया गया है।

विज्ञापन
Biological adoptive parents fight over compensation after minor girls death
money new - फोटो : istock

विस्तार

ओडिशा के केंद्रपाड़ा में तीन महीने पहले एक लड़की की नदी में डूबने से मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने उसके परिवार के लिए अनुग्रह राशि के रूप में चार लाख रुपये देने की घोषणा की थी। इसके बाद से लड़की के जैविक और दत्तक माता-पिता इस पैसे को लेकर आपस में लड़ रहे हैं। 

विज्ञापन

रंजन माई और रूपाली माई की जैविक पुत्री थी नमिता
मृतका नमिता (16 वर्षीय) ओस्तिया गांव के रंजन माई और रूपाली माई की जैविक पुत्री थी। बाद में गोपालजेवपाटना गांव के रत्नाकर दास और ममता दास ने उन्हें कानूनी रूप से गोद ले लिया। दोनों पक्ष उस अनुग्रह राशि की मांग कर रहे हैं, इसलिए यह किसी को नहीं दी गई। यहां तक कि मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया जा सका।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

तहसीलदार ने कहा- योग्य माता-पिता को मुहैया कराएंगे पैसा
राजनगर के तहसीलदार अश्विनी कुमार भुयन ने कहा, हम कानूनी रूप से योग्य माता-पिता को पैसा मुहैया कराएंगे। आधार कार्ड और स्कूल के एडमिशन रजिस्टर में नमिता का जिक्र रत्नाकर की बेटी के रूप में किया गया है और ममता का उनके जैविक माता-पिता के रूप में जिक्र किया गया है। 
 

विज्ञापन

सीएचसी के सामने भूख हड़ताल पर जैविक माता-पिता
इस बीच, उसके जैविक माता-पिता रंजन और रूपाली अपनी बेटी के मृत्यु प्रमाण पत्र की मांग को लेकर गुरुवार को राजनगर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के सामने भूख हड़ताल पर चले गए।
 

मृत्यु प्रमाण-पत्र के आधार पर दी जाएगी अनुग्रह राशि: अधिकारी
सीएचसी के चिकित्सा अधिकारी नमिता का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करेंगे जिसमें उसके माता-पिता के नाम होंगे। अधिकारियों के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर अनुग्रह राशि दी जाएगी। सीएचसी की चिकित्सा अधिकारी रश्मि रंजन मोहंती ने कहा, संबंधित दस्तावेजों की जांच करने और सरकारी अधिकारियों और वकीलों से परामर्श करने के बाद ही हम नमिता का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करेंगे।
 

जैविक पिता का दावा- जन्म प्रमाण पत्र पिता के रूप में मेरा नाम
नमिता के जैविक पिता रंजन ने दावा किया, मेरी बेटी के जन्म प्रमाण पत्र पर पिता के रूप में मेरा नाम है। इसलिए, मैं इस अनुग्रह राशि को पाने का हकदार हूं। वहीं, दत्तक पिता रत्नाकर दास इस दावे का विरोध कर रहे हैं। रत्नाकर ने कहा, आधार कार्ड और स्कूल एडमिशन रजिस्टर के मुताबिक, मैं उसका पिता हूं। इसलिए दावे पर मेरा कानूनी अधिकार है।
 

मुआवजे को लेकर दोनों पक्षों की लड़ाई दुर्भाग्यपूर्ण: चिकित्सा अधिकारी
चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि मुआवजे के पैसे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लड़ाई दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्रपाड़ा के वकील सुभाष दास ने कहा, अगर गोद लेना कानूनी है, तो जैविक माता-पिता का बच्चे के साथ कोई कानूनी संबंध नहीं है। इस प्रकार, वे मुआवजे की राशि हासिल करने के हकदार नहीं हैं। 

नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद
ओडिशा के बालासोर जिले की एक अदालत ने मानसिक रूप से कमजोर एक लड़की से दुष्कर्म के मामले में एक व्यक्ति को शुक्रवार को 20 साल कैद सुनाई। विशेष न्यायाधीश रंजन कुमार सुतार की पॉक्सो अदालत ने व्यक्ति पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि एक एनजीओ द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद व्यक्ति (28 वर्षीय) को पिछले साल मार्च में गिरफ्तार किया गया था। नाबालिग लड़की (14 वर्षीय) के गर्भवती होने के बाद उसके बारे में पता चला था।

लड़की ने काउंसलिंग सत्र के दौरान एनजीओ के कार्यकर्ताओं को इस घटना के बारे में बताया था जिसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई। आरोपी, लड़की का पड़ोसी है।  पीड़िता की पहचान की रक्षा के लिए इस रिपोर्ट में दोषी का नाम भी नहीं बताया जा रहा है।

विशेष लोक अभियोजक प्रणब कुमार पांडा ने कहा, पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया। विशेष लोक अभियोजक प्रणब कुमार पांडा ने कहा कि अदालत ने 10 गवाहों और 20 चश्मदीदों के आधार पर फैसला सुनाया। पांडा ने कहा कि अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को पीड़िता को मुआवजे के तौर पर चार लाख रुपये देने का भी निर्देश दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed