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BRICS 2016: पाक का पत्ता साफ करने के लिए सार्क को नया स्वरूप दे रहा भारत

Sun, 16 Oct 2016 07:51 PM IST
सलमान रावी/ बीबीसी संवाददाता
सलमान रावी/ बीबीसी संवाददाता Updated Sun, 16 Oct 2016 07:51 PM IST
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 BIMSTEC in BRICS: A mini-SAARC summit in the making?

क्या 'बिम्सटेक', सार्क का विकल्प है? यह सवाल ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब भारत ने 'ब्रिक्स सम्मेलन' की मेजबानी की। कहा जा रहा है कि 'ब्रिक्स' सम्मेलन के दौरान भारत ने सार्क के बजाय 'बिम्सटेक' देशों के राष्ट्राध्यक्षों को न्योता देकर एक बार फिर पकिस्तान को अलग थलग करने की कोशिश की है। इस बार भारत में आयोजित किये गए 'ब्रिक्स' सम्मेलन के दौरान 'बिम्सटेक' के नेताओं की मुलाकात चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के नेताओं से हुई।

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'बिम्सटेक' - यानी 'द बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निल एंड इकोनोमिक कोऑपरेशन' में भारत के अलावा बंगाल की खाड़ी के आस पास के देश शामिल हैं जैसे बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड।
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उड़ी हमलों के बाद भारत ने इस्लामाबाद में हो रहे सार्क सम्मलेन का बहिष्कार किया तो कई अन्य देशों ने भी इसमें हिस्सा नहीं लिया। पाकिस्तान इससे अलग थलग नजर आया और फिर ऐसा माना जाने लगा कि भारत 'बिम्सटेक' को ज्यादा बढ़ावा देगा क्योंकि इसमें पकिस्तान शामिल नहीं है।
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वहीं पकिस्तान ने भी सेंट्रल एशियाई देशों में अपने प्रतिनिधियों को भेजा है। ईरान के साथ भी पकिस्तान ने संबंध बेहतर करने की दिशा में काफी दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है। इससे यह कयास लगाए जाने लगे कि पकिस्तान भी सार्क की तरह ही सेंट्रल एशियाई देशों और ईरान को साथ लेकर सार्क का विकल्प तलाश कर रहा है।

'सार्क से भी कुछ हासिल नहीं हुआ'

 BIMSTEC in BRICS: A mini-SAARC summit in the making?

मगर भारत के पूर्व विदेश सचिव मुचकुंद दुबे कहते हैं कि वैसे भी 'सार्क' पिछले 30 सालों से एक तरह से निष्क्रिय ही रहा है। पूर्व विदेश सचिव कहते हैं, "दक्षिण पूर्व एशिया की तरफ हमारी नीति काफी पहले से बनी हुई है। पिछले 30 सालों से जिस स्थिति में सार्क रहा है उसे मृत प्रायः स्थिति ही कहा जा सकता है। केवल सम्मेलनों का नियमित रूप से होना किसी संस्था के जीवित होने का प्रमाण नहीं है। जहां तक ठोस कदम उठाने का सवाल है तो राजनीतिक विभाजन की वजह से ऐसा नहीं हो सका।"

दुबे का कहना है कि 'बिम्सटेक' से भी ज्यादा उम्मीदें इस लिए नहीं लगाई जा सकती हैं क्योंकि यह संगठन भी लगभग वैसा ही होकर रह गया है जैसा 'सार्क'। वो कहते हैं कि इसका बड़ा कारण है कि इसके कई राष्ट्र अन्य 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' के सदस्य हैं।

दूसरी तरफ विदेश मामलों के जानकार पुष्पेश पन्त मानते हैं कि ऐसे मंच की कोशिश की जा रही है जहाँ पकिस्तान को रखने की अनिवार्यता ना हो। हालांकि पुष्पेश पन्त यह मानने को तैयार नहीं हैं कि 'सार्क' सम्मलेन में भारत और अन्य कुछ देशों के भाग नहीं लेने से पाकिस्तान अलग थलग हुआ है क्योंकि रूस और श्रीलंका की सेनाओं ने पकिस्तान में साझा सैन्य अभ्यास किये हैं।

'भारत-पाक के बीच कटुता कोई नई बात नहीं'

 BIMSTEC in BRICS: A mini-SAARC summit in the making?

'बिम्सटेक' का जहां तक सवाल है तो कुछ जानकारों को लगता है कि 'सार्क' के जरिये भारत दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग और व्यापार कर रहा था, मगर 'बिम्सटेक' के बाद दक्षिण-पूर्वी एशिया में भी भारत ने आपसी सहयोग और व्यापार को आगे बढ़ाया।

जानकार कहते हैं कि 'सार्क' के मुकाबले भारत 'बिम्सटेक' को ज्यादा प्रोत्साहन दे रहा है। हालांकि उड़ी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में कटुता आयी है मगर विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के बीच ये कोई नयी बात नहीं है।

जहां तक कूटनीति का सवाल है तो विदेश नीति का एक स्पष्ट सिद्धांत है कि वो प्रतिक्रया पर आधारित नहीं होती है।

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