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लोकसभा में पेश हुआ सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव

Mon, 05 Aug 2019 02:50 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 05 Aug 2019 02:50 PM IST
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Bill to increase number of Supreme Court judges in Lok Sabha by Ravi Shankar Prasad
संसद भवन (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

उच्चतम न्यायालय में इस समय लगभग 60,000 मामले लंबित पड़े हैं। जिसके कारण सोमवार को शीर्ष अदालत में मौजूदा जजों की संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 करने का प्रस्ताव पेश हुआ। अभी तक न्यायालय में जजो की स्वीकृत संख्या 30 है और एक मुख्य न्यायाधीश भी होते हैं। 

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विधेयक को जैसे ही संसद की संवीकृति मिल जाएगी तो जजों की संख्या को बढ़ाकर 33 कर दिया जाएगा और एख मुख्य न्यायाधीश भी होंगे। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा पेश सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक को पेश किया गया। अदालत अपनी पूरी ताकत के साथ काम कर रही है।
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यह बिल ऐसे समय पर आया है जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया है। सीजेआई ने कहा था कि न्यायाधीशों की कमी के कारण कानून के सवालों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों का फैसला करने के लिए संविधान पीठों की आवश्यक संख्या का गठन नहीं हो पाता है।
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सीजेआई ने लिखा था, 'याद कीजिए 1988 में तीन दशक पहले सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या को 18 से बढ़ाकर 26 किया गया था। इसके दो दशक बाद मामलों के निपटान में तेजी लाने के लिए 2009 में यह संख्या बढ़ाकर सीजेआई सहित 31 की गई। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया सर्वोच्च प्राथमिकता पर, न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने के लिए उचित रूप से विचार करें ताकि यह अधिक कुशलता से और प्रभावी ढंग से कार्य कर सके। चूंकि इसे जनता को समय पर न्याय दिलाने के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है।'

उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 को आखिरी बार 2009 में संशोधित किया गया था ताकि न्यायाधीशों की संख्या 25 से 30 तक बढ़ाई जा सके (सीजेआई को छोड़कर)। उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 मूल रूप से अधिकतम 10 न्यायाधीशों (सीजेआई को छोड़कर) के लिए प्रदान किया गया था। इस संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960  में 13 और 1977 में बढ़ाकर 17 कर दिया गया।


हालांकि सर्वोच्च न्यायालय की कार्य शक्ति 1979 के अंत तक कैबिनेट (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) द्वारा 15 न्यायाधीशों तक सीमित थी। लेकिन भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर प्रतिबंध हटा लिया गया था। 1986 में सीजेआई को छोड़कर शीर्ष अदालत की संख्या बढ़ाकर 25 कर दी गई। इसके बाद उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2009 ने अदालत की ताकत को 25 से 30 कर दिया गया।

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