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बिहार शेल्टर होम कांड : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के रवैये को बताया ‘शर्मनाक-अमानवीय’

Wed, 28 Nov 2018 06:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 28 Nov 2018 06:08 AM IST
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Bihar Shelter Home Case : Supreme Court said behavior of Bihar Government is inhuman

बिहार के कई शेल्टर होम में शारीरिक यौन उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर बिहार पुलिस और राज्य सरकार के रवैये से मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट बेहद नाराज दिखाई दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट तौर पर इनके रवैये को ‘शर्मनाक’ और ‘अमानवीय’ बताते हुए पूछा कि क्यों नहीं सभी शेल्टर होम मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाए? बता दें कि अभी तक सिर्फ मुजफफरपुर शेल्टर होम मामले की जांच ही सीबीआई कर रही है। 

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जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में राज्य सरकार का रुख ‘बेहद नर्म’ और ‘बहुत ही चयनित’ अंदाज वाला रहा है। पीठ ने राज्य सरकार की तरफ से पेश वकील से सख्त अंदाज में सवाल किया कि क्या ये बच्चे इस देश के नागरिक नहीं हैं? पीठ ने एक शेल्टर होम में लड़कों के साथ कुकर्म के आरोप सामने आने के बावजूद धारा 377 (अप्राकृतिक दुष्कर्म) के तहत एफआईआर दर्ज न कराकर मामूली धाराएं लगाए जाने पर भी राज्य सरकार को फटकार लगाई। 
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जस्टिस लोकुर के साथ जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और जस्टिस दीपक गुप्ता की मौजूदगी वाली पीठ ने सीबीआई को भी यह बताने के लिए कहा है कि क्या वह सभी मामलों की जांच करने को तैयार है। सुनवाई के दौरान बिहार के मुख्य सचिव भी अदालत में मौजूद थे। सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।

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टाटा इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट का दिया हवाला

पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की तरफ से जारी की गई अध्ययन रिपोर्ट पर गौर किया। इस रिपोर्ट में राज्य के 14 शेल्टर होम में यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामले होने की बात कही गई है। इसमें लड़कों के एक शेल्टर होम में लड़के के साथ कुकर्म होने की बात है। 

जबकि एक अन्य शेल्टर होम में एक बच्चे के खाना पकाने से इनकार करने पर उसके गाल पर धारदार चीज से वार करने का ब्योरा दिया गया है। इस मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। पीठ इससे बेहद नाराज दिखाई दी और एतराज जताया है कि रिपोर्ट में दिए गए सभी मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। 

एक दिन में एफआईआर सुधारकर बताए राज्य सरकार

बिहार सरकार की ओर से पेश वकील के एफआईआर में पाक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज होने का हवाला देते हुए इसे सुधारकर धारा 377 शामिल कराने की बात कही गई। इस पर भी पीठ सख्त नाराज दिखी। पीठ ने कहा, यदि एक आदमी मर जाता है और एफआईआर कहती है कि वह सामान्य घायल है तो आप क्या सोचते हैं कि हम यह बात स्वीकार करेंगे? 

पीठ ने कहा कि आखिर आपने गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया? वास्तव में पुलिस शुरुआत गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करती है और जांच के क्रम में पर्याप्त साक्ष्य न होने पर गंभीर धाराओं को हटाया जाता है, लेकिन बिहार में ठीक विपरीत प्रक्रिया चल रही है। पीठ ने राज्य सरकार को एक दिन में एफआईआर में सुधार करते हुए बुधवार को इसकी जानकारी देने के लिए कहा। 

सुप्रीम कोर्ट ने की यह टिप्पणी

सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, 'आखिर बिहार सरकार क्या कर रही है। यह शर्मनाक है। बच्चे के साथ कुकर्म हो रहा है और आप कह रहे हैं कि यह कुछ भी नहीं है। आखिर आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? यह अमानवीय है। हमें कहा गया कि इन मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। क्या यहीं गंभीरता है? कुल 9 शेल्टर होम के मामले थे। आपने 5 मामलों में एफआईआर कराई और 4 को छोड़ दिया, क्यों? यह गुप्त रहस्य है।'

वहीं जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा, 'मैं जितनी बार भी इस मामले की फाइल पढ़ता हूं, उतनी ही बात इस मामले की त्रासदी से हिल जाता हूं। यह बेहद दुखद है। हमारा विचार है कि राज्य पुलिस ने अपना काम वैसे नहीं किया, जैसे कि अपेक्षा थी।'

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