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बिहार में भाजपा के 'रिफॉर्म' और नीतीश के 'परफॉर्म' से सियासी 'शीतयुद्ध'

Fri, 01 Jan 2021 10:49 PM IST
योगेश साहू हरि वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली/पटना।
हरि वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली/पटना। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 01 Jan 2021 10:49 PM IST
सार

  • आमिर सुबहानी को गृह विभाग में अपर सचिव की कुर्सी पर बिठाए रखकर भाजपा को दिया 'दृढ़' संदेश
  • नववर्ष की पूर्व संध्या पर 24 आईएएस और 38 आईपीएस बदले लेकिन भाजपा की बड़ी चाह दरकिनार
  • नौकरशाही में व्यापक फेरबदल कर नीतीश ने कई अफसरों के पर कतरे, मंत्रिमंडल विस्तार पर फंसा पेच

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Bihar : Political Cold War Begins, From BJPs Reform And Nitish Kumars Performance Statement
नीतीश कुमार - फोटो : ANI

विस्तार

नए साल की पूर्व संध्या पर बिहार की नौकरशाही में बड़े बदलाव के बाद फिर भाजपा के ‘रिफॉर्म’ और नीतीश के ‘परफॉर्म’ के बीच ‘शीतयुद्ध’ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नौकरशाही में फेरबदल कर भले कई अफसरों के पर कतरे लेकिन गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी के मामले में भाजपा को ‘ढृढ़ता’ का संदेश दिया है। साफ संकेत हैं कि नीतीश इतने कमजोर भी नहीं पड़े हैं और बड़े समझौते के मूड में नहीं हैं। खरमास बाद होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार पर निगाहें टिकी हैं, जिसको लेकर पेच फंस गया है। मंत्रिमंडल विस्तार नीतीश और भाजपा दोनों के लिए ही बड़ी चुनौती है।

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नौकरशाही में बदलाव का संदेश
भाजपा की नजर गृह मंत्रालय और विभाग की नौकरशाही पर टिकी है। मंत्रालय नीतीश के पास है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी हैं। भाजपा ने गृह मंत्रालय और विभागीय नौकरशाही में बड़े बदलाव की मांग की थी। नीतीश ने आमिर सुबहानी को गृह अपर मुख्य सचिव की कुर्सी पर बिठाए रखा। सुबहानी को सामान्य प्रशासन और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया है। सुबहानी को नीतीश ने अपने खास शराबबंदी अभियान से जुड़े मद्य निषेध, उत्पाद व निबंधन और निगरानी विभाग का जिम्मा बरकरार रख उन पर भरोसा जताया है। नीतीश ने सुबहानी को गृह विभाग से न हटाकर भाजपा को ‘ढृढ़’ संदेश दे दिया है। नीतीश ने 31 दिसंबर को 24 आईएएस और 38 आईपीएस के तबादले किए। 12 जिलों के डीएम, पांच प्रमंडलों के आयुक्त और 13 जिलों के एसपी बदले।
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सुबहानी के बाद नीतीश ने अपने प्रधान सचिव चंचल कुमार की भूमिका में बदलाव किया। सुबहानी से लेकर चंचल कुमार को सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया, वहीं उनसे भवन भवन निर्माण के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार ले लिया। न चाहते हुए भी पटना के डीएम रवि कुमार को भवन निर्माण का सचिव बनाया और उनकी जगह मुजफ्फरपुर के डीएम चंद्रशेखर सिंह को पटना डीएम की कुर्सी पर ला बिठाया। इसी तरह आईपीएस के तबादले में राज्यपाल के परिसहायक राकेश दुबे को एसपी एटीएस का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। इस नई सरकार में बड़े भाई की भूमिका में आने के बाद भाजपा नौकरशाही पर नकेल के लिए नीतीश पर ‘रि फॉर्म’ का दबाव बना रही है। 15 वर्षों से नीतीश की नौकरशाही के चेहरे सुबहानी और चंचल कुमार को भाजपा हिलाना चाहती थी, लेकिन नीतीश टस से मस नहीं हुए। 
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सियासी बयानबाजी भी हुई तेज 
भाजपा के इस ‘रिफॉर्म’ की चाहत को ठुकराकर नीतीश के ‘परफॉर्म’ से ‘शीतयुद्ध’ की स्थिति है। इस बीच सियासी बयानबाजी तेज है। राजद ने नीतीश को ऑफर दिया है, आप पीएम की दावेदारी करें,समर्थन देंगे, भतीजे (तेजस्वी-राजद) को सीएम का आशीर्वाद दें। राजद का यह प्रस्ताव नीतीश के लिए दूर की कौड़ी।  राजद का दावा है कि जदयू के 17 विधायक उनके संपर्क में हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार पर पेच फंस रहा है। भाजपा को गृह मंत्रालय चाहिए। जदयू को कैबिनेट में मंत्री की ज्यादा कुर्सी। जदयू और भाजपा दोनों में अंसतोष का खतरा बढ़ा है। मंत्रिमंडल में पिछली बार जदयू की ज्यादा हिस्सेदारी थी। इस बार कम है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जदयू के असंतुष्ट विधायकों का राजद से नजदीकी बढ़ाने का खतरा बरकरार है। उधर, भाजपा में नए बनाम पुराने के बीच भीतरी खींचतान है। इससे मंत्रिमंडल विस्तार अटक रहा है।


मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी, मंत्रालयों के बंटवारे और जिम्मेदारी को लेकर धींगामुश्ती जारी है।  नौकरशाही में बड़े बदलाव के जरिए नीतीश ने सुबहानी और चंचल को बनाए रखकर संदेश तो दे दिया है, लेकिन उनके सामने अब बड़ी चुनौती आनेवाली है। गृह मंत्रालय पर भाजपा की दावेदारी के बाद एक तरफ नीतीश के लिए गठबंधन में संतुलन बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ मंत्रिमंडल में जगह को लेकर अपनी पार्टी के विधायकों के असंतोष को रोक कर जदयू की एकजुटता बनाए रखने की भी चुनौती है। जदयू के हिस्से में मंत्री पद की कुर्सी सीमित है और कहावत है न, एक अनार सौ बीमार.. (जदयू के 43 विधायक मंत्री पद के दावेदार)। सो ढृढ़ नीतीश के लिए खरमास के बाद शुभ पर नजरें टिकी रहेंगी। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि खरमास खत्म होने के बाद बिहार में क्या सियासी गुल खिलने वाला है।
 

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