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बिहार विधान परिषद चुनाव: चार में दो सीटें फंसीं, आरएलएम में बगावत से सांसत में जदयू; कैसे बनेगा समीकरण?
सार
बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले जदयू की चार में से दो सीटों पर संकट गहरा गया है। आरएलएम के तीन विधायकों ने बगावती तेवर दिखाए हैं, वहीं अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। क्या सहयोगियों और अपनों की नाराजगी जदयू का चुनावी गणित बिगाड़ देगी? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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बिहार विधान परिषद चुनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर होने जा रहे चुनाव के दौरान पार्टी में गुटबाजी और सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) में तीन विधायकों के बगावती तेवर से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सांसत में है। पार्टी में जारी अंदरूनी कलह और सहयोगी दल में बगावत के कारण जदयू के हिस्से की चार में से दो सीटें फंस गई हैं। गौरतलब है कि सारण शिक्षक निर्वाचण क्षेत्र में आरएलएम के चार में से तीन विधायकों ने जहां निर्दलीय उम्मीदवार रामेश्वर महतो को समर्थन देने की घोषणा की है, वहीं पटना स्नातक क्षेत्र में बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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पार्टी टूटने का खतरा बढ़ा
आरएलएम में तीन विधायकों के बगावत से सिर्फ जदयू की सीटें ही नहीं फंसी है, पार्टी में टूट का खतरा भी बढ़ गया है। तीन विधायक चुनाव के बाद से ही पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद मामले में लगातार निशाना साध रहे हैं। आरएलएम बगावत की बात पर ललन सिंह ने कहा कि यह स्थिति असहज करने वाली है। चूंकि सभी आठ उम्मीदवारों का फैसला राजग ने मिल कर किया है, ऐसे में किसी के बगावत या असंतोष से जदयू को नुकसान नहीं होने वाला और पार्टी सभी सीटों पर जीतेगी।
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पार्टी टूटने का खतरा बढ़ा
आरएलएम में तीन विधायकों के बगावत से सिर्फ जदयू की सीटें ही नहीं फंसी है, पार्टी में टूट का खतरा भी बढ़ गया है। तीन विधायक चुनाव के बाद से ही पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद मामले में लगातार निशाना साध रहे हैं। आरएलएम बगावत की बात पर ललन सिंह ने कहा कि यह स्थिति असहज करने वाली है। चूंकि सभी आठ उम्मीदवारों का फैसला राजग ने मिल कर किया है, ऐसे में किसी के बगावत या असंतोष से जदयू को नुकसान नहीं होने वाला और पार्टी सभी सीटों पर जीतेगी।
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