Bihar: विकास के काम या हिंदू वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति? जानें किस मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहता है NDA
एनडीए केंद्र और नीतीश सरकार के द्वारा बिहार में हुए विकास कार्य गिनवा रहा है तो साथ-साथ तेजस्वी यादव और कांग्रेस को 'नमाजवादी' भी करार दे रहा है। चुनाव से ठीक पहले बिहार सरकार ने माता सीता की जन्मस्थली के विकास के लिए 883 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्वीकृत कर दिया है। पढ़ें किस रणनीति के साथ चुनाव में उतरेगा एनडीए।
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बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए विकास और सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ हिंदुत्व कार्ड का भी इस्तेमाल कर रही है। पूरा एनडीए कुनबा एक तरफ केंद्र और नीतीश सरकार के द्वारा बिहार में हुए विकास कार्य गिनवा रहा है तो साथ-साथ तेजस्वी यादव और कांग्रेस को 'नमाजवादी' भी करार दे रहा है। चुनाव से ठीक पहले बिहार सरकार ने माता सीता की जन्मस्थली के विकास के लिए 883 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्वीकृत कर दिया है। इसके पहले भी वह माता जानकी की मूर्ति की स्थापना के लिए जमीन आवंटित कर चुकी है। विपक्ष पर 'नमाजवादी' होने का आरोप लगाने वाली भाजपा-एनडीए हिंदू धर्म स्थलों का विकास भी कर रही है। ऐसा करके एनडीए खेमा क्या संकेत देने की कोशिश कर रहा है?
पटना के गांधी मैदान में इमारत-ए-शरिया की बड़ी जनसभा में तेजस्वी यादव और पप्पू यादव ने जिस तरह वक्फ कानूनों का विरोध किया है, उससे भी भाजपा को राजद-कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण करने का आरोप लगाने का अवसर मिल गया है। भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि केवल वोटों की राजनीति के कारण राजद नेता तेजस्वी यादव देश में शरियत कानून लागू करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा और संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि यह देश संविधान से चलेगा, शरियत कानून से नहीं।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सोमवार को कहा कि समाजवादी और राष्ट्रीय जनता दल जैसे दल अब केवल नाम के समाजवादी रह गए हैं। असलियत में वे 'नमाजवादी' (मुसलमानों का तुष्टीकरण करने वाले) हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सच्चे मायने में भाजपा और एनडीए असली समाजवादी हैं क्योंकि वे समाज के हर वर्ग को, विशेष तौर पर सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
विपक्ष पर आरोप, लेकिन अपना हिंदू वोट बैंक भी मजबूत कर रही भाजपा
इरादा साफ है कि भाजपा इस चुनाव में विकास, सामाजिक समीकरणों को साधने के साथ-साथ धार्मिक आधार पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश भी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बदले समीकरणों में बिहार के कुल मतदाताओं में लगभग 17.50 प्रतिशत मुसलमानों का वोट एकतरफा राजद-कांग्रेस महागठबंधन को जा सकता है। इसका लाभ राजद-कांग्रेस को होगा।
नीतीश कुमार की छवि के कारण जदयू अब तक मुसलमानों के एक तबके का वोट हासिल करती आई थी, लेकिन इस बात की संभावना है कि नए समीकरणों में मुसलमानों का उसे ज्यादा वोट न मिलें। ऐसे में माना जा रहा है कि इसी संभावना को देखते हुए एनडीए ने हिंदुओं के वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति अपनाई है।
पहले भी मिली थी सफलता
2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने मुसलमान मतदाताओं के एक सीमित वर्ग का वोट पाने के बाद भी बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब रही थी। माना जा सकता है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में वह एक बार फिर उसी मॉडल को आजमाने की कोशिश कर रही है। यही कारण है कि एक तरफ विपक्ष को नमाजवादी बताने की कोशिश कर रही है तो वहीं वह अपना हिंदू वोट बैंक भी साधने की कोशिश कर रही है।
पर्यटन के विकास से आएगी नौकरी- भाजपा
भाजपा प्रवक्ता जयराम विप्लव ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार हो या बिहार की सरकार, एनडीए की सभी सरकारें केवल विकास के एजेंडे पर काम करती हैं। उन्होंने कहा कि माता सीता की जन्मस्थली को एक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने से इस क्षेत्र में लोगों को रोजगार के बड़े अवसर हासिल होंगे।
जयराम विप्लव ने कहा कि यूपी में काशी-मथुरा से लेकर अयोध्या तक और मध्य प्रदेश में उज्जैन से लेकर उत्तराखंड के चार धाम धार्मिक केंद्रों को विकसित कर केंद्र और एनडीए की सरकारों ने रोजगार को बढ़ाने का काम किया है। विकास के आंकड़े यह स्थापित करते हैं कि धार्मिक केंद्रों के विकास से लोगों को रोजगार मिलता है और इससे देश की अर्थव्यवस्था को गति भी मिलती है। उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी के विकास को इसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि एक तरफ उनका लक्ष्य विकास है, वहीं विपक्ष मुसलमानों के तुष्टीकरण को बढ़ावा देकर भारत के अंदर 'नया पाकिस्तान' बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस मानसिकता के कारण देश का विभाजन हो चुका है, तेजस्वी यादव आज उसी को फिर बढ़ाने का काम कर रहे हैं, लेकिन जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी और अब बिहार में राजद की वापसी नहीं होगी।
रामायण रिसर्च काउंसिल ने किया स्वागत
पुनौरा धाम के विकास के लिए बिहार सरकार की पहल का रामायण रिसर्च काउंसिल ने स्वागत किया है। पुनौरा धाम से लगभग चार किलोमीटर दूर राघोपुर बखरी में श्रीराम जानकी स्थान पर अति प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार तथा शक्ति स्थल के रूप में स्थापना के विकास कार्य कर रही रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी राजीव सिंह ने अमर उजाला से कहा कि सरकार का यह निर्णय स्वागत योग्य है। इससे बिहार के धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई मिलेगी और लोगों को रोजगार भी प्राप्त होगा।
राजीव सिंह ने कहा कि इस योजना पर जल्द ही कार्यारंभ कर दिया जाएगा। अगस्त महीने तक इसका शिलान्यास कराने का भी निर्देश दिया गया है। सरकार पुनौरा धाम, सीतामढ़ी में भव्य मंदिर निर्माण शीघ्र पूरा कराने हेतु कृत संकल्पित है। उन्होंने कहा कि अब सीतामढ़ी का चहुंमुखी विकास होगा। इससे केवल सीतामढ़ी ही नहीं, पूरे बिहार का समग्र विकास संभव होगा।
विकास होता तो 10 हजार की नौकरी के लिए दिल्ली-मुंबई क्यों भागते- राजद
राष्ट्रीय जनता दल प्रवक्ता नवल किशोर ने भाजपा के आरोप को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार का विकास का दावा भी पूरी तरह गलत है। यदि नीतीश कुमार ने बिहार का इतना विकास ही किया है तो यहां के लोगों को केवल 10-15 हजार रूपये की नौकरी के लिए दिल्ली-मुंबई क्यों जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विकास की झूठी कहानियां सुनाकर पटना में घट रही अपराध की घटनाओं को छुपाने की कोशिश हो रही है, लेकिन अब जनता इस झांसे में आने वाली नहीं है। राजद नेता ने दावा किया कि बिहार में राजद-कांग्रेस गठबंधन की वापसी होगी।