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सीट का समीकरण: कभी दुष्कर्मी विधायक तो कभी सुशांत की मौत से चर्चा में आई छातापुर सीट, ऐसा है चुनावी इतिहास

Sat, 07 Jun 2025 01:31 AM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Sat, 07 Jun 2025 01:31 AM IST
सार

‘सीट का समीकरण’ सीरीज की दसवा कड़ी में आज हम आपको छातापुर विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे। इस सीट पर सबसे बड़ा चेहरा सुशांत सिंह राजपूत के चचेरे भाई नीरज कुमार सिंह है। 

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बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। सभी पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं। इस चुनावी साल में अमर उजाला अलग-अलग सीरीज के जरिए बिहार की सियासत के बारे में बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज की 10वीं कड़ी में आज हम आपको छातापुर विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे। 2020 में यहां से नीरज सिंह बबलू जीते थे। नीरज दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के चचेरे भाई हैं। 
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सुपौल जिले की सीट है छातापुर सीट 

बिहार के 38 जिलों में से एक सुपौल जिला भी है। यह जिला 4 अनुमंडल और 11 ब्लाक में बंटा हुआ है। सुपौल जिले में कुल 05 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें सुपौल, पिपरा, त्रिवेणीगंज, छातापुर, निर्मली विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। आज बात छातापुर विधानसभा सीट की करेंगे। छातापुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र सुपौल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट 2005 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। 2008 में हुए परिसीमन के बाद इसे सामान्य सीट में बदल दिया गया। 
 

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लगातार तीन चुनाव जीते कुंभा नारायण सरदार 

1967 के विधानसभा चुनाव में पहली बार छातापुर सीट अस्तित्व में आई।  1967 के चुनाव में यहां से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने थे। इस चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के कुंभा नारायण सरदार ने जीत दर्ज की।  उन्होंने कांग्रेस के एच.एल. सरदार को 3,786 वोट से हरा दिया था। इसके बाद 1969 के विधानसभा चुनाव में भी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के कुम्भा नारायण सरदार ने कांग्रेस के लक्ष्मी नारायण राम को मात्र 385 वोट से हराया।  

1972 के विधानसभा चुनाव में छातापुर सीट से एक बार फिर कुम्भा नारायण को जीत मिली। इस जीत के साथ उन्होंने छातापुर में जीत की हैट्रिक लगाई। हालांकि, इस बार कुम्भा नारायण कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे थे।  कांग्रेस के कुम्भा नारायण ने सोशलिस्ट पार्टी के महेंसा एन. सरदार को केवल 163 वोट से हराया। 

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1977: सीताराम पासवान को मिली जीत 

जीत की हैट्रिक लगाने वाले कुम्भा नारायण को 1977 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें जनता पार्टी सीताराम पासवान ने 15,413 वोट से हरा दिया था। हालांकि, 1980 में कुम्भा नारायण ने कांग्रेस (इंदिरा) टिकट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के सीताराम पासवान को 16,854 वोट से हरा दिया। 1985 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के कुंभा नारायण सरदार ने जीत दर्ज की। उन्होंने लोकदल के महेंद्र नारायण सरदार को 7,453 वोट से हराया। यह कुम्भा नारायण की छातापुर सीट पर पांचवीं जीत थी।  

1990: जनता दल की जीत

1990 में जनता दल पहली बार बिहार में चुनाव लड़ रही थी। लोक दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (जगजीवन) और जन मोर्चा के विलय से बने जनता दल के योगेन्द्र नारायण सरदार इस चुनाव में जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के कुम्भा नारायण सरदार को 24,023 वोट से हराया। 

 

1995 के विधानसभा चुनाव में भी छातापुर सीट से जनता दल को जीत मिली। इस बार जनता दल ने योगेन्द्र नारायण सरदार को टिकट नहीं दिया। योगेंद्र नारायण पर एक दलित युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा था। इस मामले में पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया था। 1994 में हुए इस कांड के चलते लालू यादव और जनता दल की बहुत किरकिरी हुई। इस मामले में पीड़िता ने दुष्कर्म के दौरान नारायण सरदार के गुप्तांग को दांत से काट लिया था। 2020 में निचली अदालत ने सरदार को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई।

1995 में जब चुनाव आए तो  जनता दल की तरफ से विश्व मोहन भारती ने छातापुर से जीत हासिल की।  भारती ने कांग्रेस के महेंद्र नारायण सरदार को 7,319 वोट से हराया। 

2000: राजद को विजय मिली 

1997 में लालू यादव ने राजद का गठन किया। 2000 में बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में राजद को जीत मिली। छातापुर सीट से राजद की गीता देवी ने जदयू के विश्व मोहन भारती को 2,956 वोट से हरा दिया। 

2002 में गीता देवी के निधन होने के कारण इस सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा था। इस चुनाव में राजद के गौरी शंकर सरदार को जीत मिली थी। जदयू के विश्व मोहन भारती को एक बार फिर से इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। 


 

2005 के दोनों चुनाव में अलग-अलग पार्टी को जीत 

2005 में बिहार में दो बार विधानसभा चुनाव हुए थे। इसमें फरवरी में हुए चुनाव में राजद और अक्तूबर में हुए चुनाव में जदयू को जीत मिली थी। पहले चुनाव में राजद के महेंद्र नारायण सरदार ने जदयू के विश्व मोहन भारती को 1,443 वोट से हरा दिया। 

अक्तूबर 2005 में हुए चुनाव में जदयू के विश्व मोहन भारती को जीत मिली। उन्होंने राजद के महेंद्र नारायण सरदार को 11,935 वोट से हारकर अपनी पिछली हार का बदला ले लिया।  

2010: जदयू के टिकट पर जीते नीरज सिंह बबलू

2010 के विधानसभा चुनाव में छातापुर सीट से नीरज सिंह बबलू को जीत मिली। जदयू के टिकट पर उतरे  नीरज कुमार सिंह उर्फ बबलू ने राजद के अकील अहमद ने 23,730 वोट से हरा दिया। नीरज दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के भाई  लगते हैं। 

2015 के विधानसभा चुनाव में नीरज लगातार दूसरी बार जीते। इस बार नीरज भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे थे। नीरज की इस जीत के साथ छातापुर सीट पर भाजपा का खाता खुल गया। इस चुनाव में भाजपा के नीरज कुमार सिंह ने राजद के जहूर आलम को 9,292 वोट से हराया। 2020 के विधानसभा चुनाव में  नीरज कुमार सिंह ने छातापुर में जीत की हैट्रिक लगाई। इस चुनाव में भाजपा के नीरज कुमार सिंह ने राजद के विपिन कुमार सिंह 20,635 वोट से हरा दिया।

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