6.89 लाख मतों से हुई लोकसभा चुनाव 2019 की सबसे बड़ी जीत, 181 वोट हार का सबसे छोटा अंतर
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- गुजरात की नवसारी सीट भाजपा प्रत्याशी सीआर पाटिल ने 6.89 लाख वोटों के अंतर से जीती। यह इस चुनाव में सबसे बड़ी जीत है। पिछली बार वे यहीं से 5.58 लाख वोटों से जीते थे।
- हरियाणा करनाल में भाजपा के संजय भाटिया ने कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को 6.56 लाख वोटों से हराया।
- फरीदाबाद में भाजपा के किशनपाल ने कांग्रेस अवतार सिंह भड़ाना को 6.38 लाख वोटों से हराया।
- भीलवाड़ा में भाजपा के सुभाषचंद्र बहेड़िया 6.12 लाख से हराया।
- वडोदरा में भाजपा की राजन बेन भट्ट ने कांग्रेस के प्रशांत पटेल को 5.89 लाख वोटों से हराया।
- पश्चिमी दिल्ली से भाजपा प्रवेश वर्मा ने कांग्रेस के महाबल मिश्रा को 5.78 लाख वोटों से मात दी।
- चित्तौड़गढ़ में भाजपा के चंद्रप्रकाश जोशी ने कांग्रेस के गोपाल शेखावत को 5.76 लाख वोटों से हराया।
- अमित शाह ने गांधीनगर में कांग्रेस के सीजे चावड़ा को 5.57 लाख वोटों से हराया।
- होशंगाबाद मप्र में भाजपा के उदय प्रताप ने कांग्रेस के शैलेन्द्र सिंह को 5.53 लाख वोटों से हराया।
- भाजपा के हंसराज हंस दिल्ली उत्तर पश्चिम में 5.53 लाख वोट से जीते।
- सूरत से दर्शना विक्रम जरदोश ने कांग्रेस के अशोक पटेल को 5.48 लाख वोटों से हराया।
- इंदौर में भाजपा के शंकर लालवानी ने 5.47 लाख से जीते।
- राजस्थान की राजसमंद सीट से भाजपा की दीया कुमारी 5.51 लाख वोटों से जीतीं।
- तमिलनाडु के डिंडीगुल में डीएमके के वेलुसामी पी 5.38 लाख से जीते
- तमिलनाडु में श्रीपेरुंबदूर में डीएमके के टीआर बालू 5.07 लाख से जीते।
- विदिशा में भाजपा के रमाकांत भार्गव 5.03 लाख वोटों से जीते।
सिर्फ 181 वोटों से जीता भाजपा का ये उम्मीदवार, नोटा पर पड़े 10,830 वोट
पिछले दिनों हुए पांच विधानसभा चुनावों के दौरान नोटा की खूब चर्चा हुई थी। कहा जाता है कि नोटा के ही कारण भाजपा को मध्यप्रदेश की सत्ता गंवानी पड़ी थी जहां लगभग एक दर्जन सीटों पर भाजपा को नोटा को मिले वोटों से भी कम वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इस लोकसभा चुनाव के दौरान एक सीट पर नोटा खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, यूपी की मछलीशहर सीट से भाजपा प्रत्याशी बीपी सरोज को महज 181 वोटों से जीत मिली है, जबकि इसी सीट पर नोटा को 10,830 वोट पड़े हैं। बीपी सरोज ने गठबंधन के बसपा प्रत्याशी त्रिभुवन राम को हराया है।
लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा ने यहां से रामचरित निषाद को चुनाव लड़ाया था और वे जीत हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन उनके कामकाज के आधार पर पार्टी ने इस चुनाव में उन्हें यहां से मैदान में नहीं उतारा और उनकी जगह बीपी सरोज को मौका दिया। इससे नाराज रामचरित निषाद ने पार्टी मुख्यालय आकर एक चौकीदार को पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया था।
हालांकि, इसके पहले ही समाजवादी पार्टी ने उन्हें सपा में शामिल करते हुए मिर्जापुर सीट से अपना दल नेता अनुप्रिया पटेल के खिलाफ मैदान में उतार दिया था। माना जाता है कि रामचरित निषाद के करीबी लोगों ने ही नोटा पर बटन दबाकर भाजपा प्रत्याशी को हराने की कोशिश की जबकि इसके बाद भी वे 181 वोटों से जीत हासिल करने में कामयाब हो गए। उधर खुद रामचरित निषाद भी अनुप्रिया पटेल के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा है।