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Jharkhand: वामपंथी उग्रवाद से लड़ाई में बड़ी जीत, झारखंड का बूढ़ा पहाड़ नक्सल मुक्त, रसद लेकर पहुंचे जवान

Thu, 22 Sep 2022 06:34 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 22 Sep 2022 06:34 AM IST
सार

सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी की वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के परिणाम स्वरूप सेना ने इन ऑपरेशनों को अंजाम दिया। सेना के जवानों को हेलिकॉप्टर के जरिए तीन राज्यों की सीमा पर स्थित इस क्षेत्र में रसद के साथ पहुंचाया गया। सेना के जवानों ने बूढ़ा पहाड़ पर स्थायी कैंप बना लिया है।

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Big victory in the fight against Left Wing Extremism Buddha Pahad of Jharkhand Naxal-free
Kuldiep Singh, DG, CRPF - फोटो : ANI

विस्तार

देश में वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध लड़ाई में सुरक्षा बलों ने बड़ी जीत हासिल की है। झारखंड का बूढ़ा पहाड़ नक्सलियों से मुक्त करा लिया गया है। सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह ने बुधवार को बताया कि तीन अलग-अलग ऑपरेशन से बूढ़ा पहाड़ को नक्सल मुक्त किया गया है।

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सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी की वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के परिणाम स्वरूप सेना ने इन ऑपरेशनों को अंजाम दिया। सेना के जवानों को हेलिकॉप्टर के जरिए तीन राज्यों की सीमा पर स्थित इस क्षेत्र में रसद के साथ पहुंचाया गया। सेना के जवानों ने बूढ़ा पहाड़ पर स्थायी कैंप बना लिया है। इसी तरह बिहार के चक्रबंधा व भीमबांध के अति दुर्गम क्षेत्रों में घुसकर सुरक्षा बलों ने माओवादियों को उनके गढ़ से खदेड़कर वहां भी स्थायी कैंप स्थापित किया है। सुरक्षा बलों को इस क्षेत्र से भारी मात्रा में हथियार, गोला बारूद, विदेशी ग्रेनेड, एरोबम व आईईडी मिले हैं।
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बूढ़ा जंगल का दुर्गम इलाका हमेशा से नक्सलियों का गढ़ रहा। भौगोलिक स्थिति के कारण यहां सुरक्षा बल पहुंच नहीं पाते थे और यह नक्सलियों की सबसे सुरक्षित पनाहगाह था। मोदी सरकार के नेतृत्व में हुए इस खास अभियान ने वामपंथी उग्रवाद की कमर पर कड़ा प्रहार किया है।
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ऐतिहासिक पड़ाव पार : शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने इस बड़ी सफलता के लिए सीआरपीएफ व राज्य सुरक्षाबलों को बधाई दी। उन्होंने कहा, देश की आंतरिक सुरक्षा में ऐतिहासिक पड़ाव पार हुआ। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई में सुरक्षाबलों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। इसके लिए बधाई।

  • गृह मंत्रालय वामपंथी उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रखेगा। यह लड़ाई भविष्य में और तेज होगी।


बिहार नक्सल मुक्त, झारखंड में भी अब हर जगह सेना की पहुंच
सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह ने कहा, इस अभियान की सफलता के बाद यह कहा जा सकता है कि बिहार अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो गया है। कहीं कुछ नक्सली छोटे मोटे गैंग के रूप में हो सकते हैं लेकिन इनका कोई खास प्रभाव नहीं है। इसके अलावा अब बिहार और झारखंड में ऐसा कोई नक्सल प्रभावित क्षेत्र नहीं है जहां सेना नहीं पहुंच सकती।

अप्रैल से अब तक 14 माओवादी मारे गए, 578 का आत्मसमर्पण
कुलदीप सिंह ने बताया कि अप्रैल से अब तक कुल 14 माओवादियों को मार गिराया गया और 578 ने आत्मसमर्पण किया। सबसे अधिक छत्तीसगढ़ में सात माओवादी मारे गए और 436 आत्मसमर्पण हुए। झारखंड में चार माओवादी मारे गए व 120 ने आत्मसमर्पण किया।

बिहार में भी 36 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इसी तरह मध्य प्रदेश में तीन माओवादी ढेर किए गए। यह सफलता इसलिए भी खास है कि इनमें इसमे मिथिलेश महतो जैसे माओवादी भी शामिल हैं जिनके सिर पर 1 करोड़ रुपए का इनाम था।



2014 से पहले की तुलना में 77 फीसदी घटी वामपंथी उग्रवादी हिंसा
आंकड़ों को देखें तो 2014 से पहले की तुलना में 2021 में वामपंथी उग्रवाद की हिंसाओं में 77 फीसदी की गिरावट आई है। 2009 में यह 2258 के साथ उच्चतम स्तर पर थी जो 2021 में 509 रह गई। उग्रवादी हिंसा में होने वाली मृत्युदर में भी 85 फीसदी की कमी आई है। 2010 में यह संख्या 1005 के उच्चतम स्तर पर थी जो 2021 में घटकर 147 रह गई। 2018 के मुकाबले 2022 में वामपंथी उग्रवादी हिंसा में 39 फीसदी की कमी आई है। इसके साथ ही हिंसा में मरने वाले सेना के जवानों की संख्या 26 फीसदी और नागरिक हताहतों की संख्या 44 फीसदी घटी है।

महाराष्ट्र में छह लाख के इनामी दो नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में छह लाख के इनामी दो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें एक महिला नक्सली भी शामिल है। गढ़चिरौली के एसपी अंकित गोयल ने बुधवार को बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले गढ़चिरौली निवासी अनिल उर्फ रामसय कुजूर (26) पर चार लाख, जबकि छत्तीसगढ़ की रोशनी पल्लो (30) पर दो लाख रुपये का इनाम था। दोनों अपने घर से ही नक्सली गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।

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