ईडी का बड़ा खुलासा: अनिल देशमुख को बार मालिकों से चार करोड़ से ज्यादा मिले, वाजे ने 'नंबर 1' के लिए जुटाए
ईडी ने महाराष्ट्र की राजनीति व भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने दावा किया कि पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के लिए बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने चार करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए थे। यह पैसा तत्कालीन मंत्री के पीए के जरिए उन तक पहुंचाया गया।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को मुंबई की एक अदालत को बताया कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को मुंबई में बार मालिकों से चार करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। उन्होंने इसे विभिन्न छद्म कंपनियों के जरिये प्राप्त दान दिखाकर इस रकम को अपने न्यास में डाल दिया।
ईडी के अनुसार यह पैसा बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने जुटाया था। ईडी ने देशमुख के निजी सचिव संजीव पलांडे और निजी सहायक कुंदन शिंदे को रिमांड पर लेने के लिए की गई सुनवाई के दौरान यह दावा किया।
दोनों पीए एक जुलाई तक ईडी की हिरासत में
ईडी के अधिकारियों ने कहा कि पलांडे और शिंदे को कथित तौर पर करोड़ों रुपये की रिश्वत सह रंगदारी गिरोह मामले और कथित धनशोधन के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। इस मामले में देशमुख को अप्रैल में इस्तीफा देना पड़ा था। अधिकारियों ने कहा कि दोनों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद दोनों को एक जुलाई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है।
वाजे ने 4.7 करोड़ रुपये नकद इकट्ठे किए थे
ईडी के अनुसार बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने बताया है कि उन्होंने मुंबई के बार मालिकों से 4.70 करोड़ रुपये नकद इकट्ठे किए थे। यह पैसा महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री देशमुख के निजी सहायक को सौंप दिए थे। जांच एजेंसी ने यह दावा भी किया कि मुंबई पुलिस की अपराध खुफिया इकाई (सीआईयू) के पूर्व प्रमुख वाजे ने बार मालिकों तथा प्रबंधकों को बताया कि यह पैसा 'नंबर 1' को और मुंबई पुलिस की अपराध शाखा तथा सामाजिक सेवा शाखा को जाएगा। वाजे ने जांच एजेंसी से कहा कि उन्हें पुलिस की जांच के अनेक मामलों में तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख से सीधे निर्देश मिल रहे थे। ईडी ने देशमुख के निजी सचिव पलांडे तथा शिंदे को शनिवार को गिरफ्तार किया था।
वाजे को हर माह बार मालिकों से तीन-तीन लाख वसूलने को कहा गया
ईडी ने अदालत को बताया कि कुछ बार मालिकों-प्रबंधकों ने अपने बयानों में कहा कि तब अपराध आसूचना इकाई (सीटीयू) के प्रमुख रहे सचिन वाजे ने अपने दफ्तर में बार मालिकों के साथ एक बैठक की थी। यह बैठक उनके ऑर्केस्ट्रा बार के निर्धारित अवधि के बाद भी बिना किसी रुकावट के चालू रहने और प्रदर्शन करने वाले कलाकारों पर किसी तरह की बंदिश नहीं लगाने को लेकर थी। ईडी ने कहा कि इन बयानों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वाजे ने मुंबई के विभिन्न ऑर्केस्ट्रा बार मालिकों से 4.70 करोड़ रुपये लिए थे।
ईडी ने कहा कि वाजे के मुताबिक, उसे महाराष्ट्र के गृह मंत्री के आवास पर हुई एक बैठक में बार और रेस्तरां मालिकों की एक सूची दी गई थी। ईडी ने बर्खास्त पुलिस अधिकारी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि वाजे ने कहा कि उससे हर बार और रेस्तरां से हर महीने तीन लाख रुपये वसूलने को कहा गया।
ईडी ने आरोप लगाया कि वाजे ने कहा है कि उन्होंने दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच अनेक बार-मालिकों से करीब 4.70 करोड़ रुपये इकट्ठे किए थे और उन्हें अनिल देशमुख के निर्देश पर उनके पीए कुंदन संभाजी शिंदे को जनवरी तथा फरवरी 2021 के महीनों में दो किस्तों में सौंप दिया था।
नागपुर में है देशमुख परिवार का ट्रस्ट, ट्रस्ट के खाते में आए 4.18 करोड़
उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटेलिया के बाहर एक एसयूवी से विस्फोटक सामग्री मिलने और उसके बाद कारोबारी ठाणे स्थित कारोबारी मनसुख हिरन की हत्या के मामले में जारी एनआईए जांच के सिलसिले में वाजे फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
ईडी ने कहा कि उसे जांच के दौरान नागपुर स्थित श्री साई शिक्षण संस्था नाम के एक धर्मार्थ न्यास का पता चला, जिसका संचालन देशमुख परिवार द्वारा किया जाता है। अनिल देशमुख न्यास के अध्यक्ष हैं और उनके परिवार के सदस्य न्यासी व सदस्य हैं।
ईडी ने कहा कि न्यास द्वारा नागपुर में इंजीनियरिंग, एमबीए और पॉलीटेक्निक कॉलेजों का संचालन किया जा रहा है। हालांकि, ट्रस्ट के खातों का विवरण देखने पर खुलासा होता है कि हाल ही में तीन चेकों के जरिये करीब 4.18 करोड़ रुपये की रकम इनमें डाली गई।
अदालत को बताया गया कि यह रकम दिल्ली स्थित विभिन्न कंपनियों से न्यास को प्राप्त हुई। ईडी की जांच में अब तक यह खुलासा हुआ है कि यह कंपनियां सिर्फ कागज पर चल रही हैं और ये सिर्फ रकम के अंतरण के लिए ये इस्तेमाल की गईं।
बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचे देशमुख
जांच एजेंसी ने देशमुख को जांच अधिकारी के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए बलार्ड एस्टेट स्थित ईडी दफ्तर में शनिवार सुबह 11 बजे तलब किया था, लेकिन पूर्व मंत्री ने एजेंसी से पेशी के लिए नई तारीख दिए जाने का अनुरोध किया। देशमुख के वकीलों की टीम ईडी कार्यालय पहुंची और उसने पेशी के लिए कोई और तिथि दिए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने जांचकर्ताओं को देशमुख का लिखा एक पत्र भी सौंपा।