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दावा : भूषण स्टील का पूर्व सीएमडी सिंघल ही था बैंक कर्ज घोटाले का मास्टरमाइंड

Sat, 18 Jan 2020 03:09 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sat, 18 Jan 2020 03:09 AM IST
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Bhushan Steel former CMD Singhal was mastermind of the bank loan scam says ED
सांकेतिक तस्वीर

ईडी ने शुक्रवार को करीब 47 हजार करोड़ रुपये के बैंक कर्ज घोटाले से जुड़े मनी लान्ड्रिंग मामले में भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) के पूर्व सीएमडी संजय सिंघल और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। विशेष न्यायधीश अरुण भारद्वाज की अदालत के समक्ष दाखिल चार्जशीट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संजय सिंघल को इस कर्ज घोटाले का ‘मास्टरमाइंड’ करार दिया है।

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जस्टिस भारद्वाज ने 24 व्यक्तियों व कंपनी को आरोपी मानकर दाखिल की गई चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सिंघल को 21 जनवरी को पेश करने के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। सिंघल को इस मामले में लंबी पूछताछ के बाद पिछले साल 22 नवंबर को ईडी ने मनी लान्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया था। इससे पहले ईडी के विशेष लोक अभियोजक नीतेश राणा ने चार्जशीट में अदालत को बताया कि कंपनी और उसके निदेशकों ने जानबूझकर कर्जदाता बैंकों की रकम लौटाने में चूक की और उनके खाते लगातार अनियमित बने रहे। 
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एडवोकेट एआर आदित्य के जरिये दाखिल फाइनल रिपोर्ट में कहा गया कि बीपीएसएल ने अपने निदेशकों के जरिये 33 बैंकों-वित्तीय संस्थानों से 2007 से 2014 के बीच कर्ज लिया, जो वापस नहीं करने के चलते 30 जनवरी, 2018 को बढ़कर 47,204 करोड़ रुपये आंका गया था। पीएनबी की चंडीगढ़ स्थित कॉरपोरेट शाखा के नेतृत्व वाले बैंक समूह से यह कर्ज कार्यशील पूंजी, प्लांट की मशीनरी खरीदने के लिए टर्म लोन, नॉन-फंड बेस टर्म लोन जैसे विभिन्न तरीकों से लिए गए। 
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रिपोर्ट में आगे बताया गया कि 21 दिसंबर, 2014 को आयकर विभाग ने बीपीएसएल के चंडीगढ़ कार्यालय में छापा मारकर बड़े पैमाने पर कंपनी की रकम को अवैध तरीके से दूसरे खातों में भेजने की गड़बड़ी पकड़ी गई थी।

रिपोर्ट में आरोप है कि कर्ज के पैसे को मुखौटा कंपनियों या समूह कंपनियों के जरिये इधर-उधर घुमाकर ठिकाने लगाने में संजय सिंघल ने मास्टरमाइंड की भूमिका निभाई थी। इस पैसे से उन्होंने अपने या अपने परिजनों के नाम पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष संपत्तियां जमा कर लीं।

2348 करोड़ रुपये दिखाए कंपनियों को एडवांस देने में

चार्जशीट में सिंघल की हेराफेरी का उदाहरण भी दिया गया। बताया गया कि 1 अप्रैल 2007 से 31 मार्च 2014 के बीच करीब 2348 करोड़ रुपये विभिन्न कंपनियों को एडवांस के तौर पर भुगतान में दिए गए, लेकिन इस भुगतान का कोई उद्देश्य दर्ज नहीं किया गया और बाद में यह पैसा उन मुखौटा कंपनियों से निकाल लिया गया।

ऐसे की गई हेराफेरी
चार्जशीट में कहा गया है कि सिंघल ने अपने गलत मंसूबों को अमल में लाने के लिए हेराफेरी के अलग-अलग तौर-तरीकों पर काम किया था। ऐसे ही एक तरीके में विभिन्न कंपनियों को कच्चा माल खरीदने के लिए बड़ी रकम देना दिखाया गया, लेकिन वास्तव में कोई कच्चा माल आया ही नहीं। 

इस रकम को लान्ड्रिंग के जरिये कृत्रिम तरीके से 695.14 करोड़ रुपये के दीर्घकालिक पूंजीगत निवेश (एलटीसीजी) में बदल लिया गया। यह रकम सिंघल और उसके परिजनों ने बीपीसीएल में ही अपने हिस्से के तौर पर निवेशित कर दी, लेकिन वास्तव में यह बीपीसीएल की ही अपनी रकम थी।

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