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भुजोड़ी का ‘वंदे मातरम् मेमोरियल’ कला और संस्कृति, देशभक्ति का अद्भुत संगम
अतुल सिन्हा/अमर उजाला, भुज
Updated Mon, 04 Dec 2017 03:47 AM IST
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वंदे मातरम् मेमोरियल
दिल्ली के संसद भवन, इंडिया गेट, ग्यारह मूर्ति और आगरा के ऐतिहासिक किले को अगर आप एक साथ देखना चाहते हैं, तो गुजरात के भुजोड़ी गांव आइए। कच्छ की तमाम खासियतें हैं, एक अलग सांस्कृतिक पहचान है और इसका अपना एक इतिहास भी है। लेकिन भुजोड़ी गांव में देशभक्ति की ऐसी बेहतरीन और कलात्मक मिसाल मिलेगी कि आप चकित रह जाएंगे।
यहां हाल ही बनाए गए ‘वंदे मातरम् मेमोरियल’ में ब्रिटिश राज से लेकर आजादी तक का बेहतरीन सफरनामा है। वह भी कुछ इस अंदाज में, मानो वो सारे पल सजीव हो उठे हों। ये पूरा सफरनामा आधुनिक 4डी तकनीक के जरिये यहां बने संसद भवन के 17 शानदार कमरों में देखा जा सकता है।
पढ़ें- गुजरात की महिलाओं के लिए बोले राहुल- न सुरक्षा, न शिक्षा, न पोषण मिला तो सिर्फ शोषण
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करीब 12 एकड़ में बने ‘वंदे मातरम् मेमोरियल’ में अकेले संसद भवन को एक लाख वर्ग फीट में बनाया गया है। इसमें करीब 60 करोड़ की लागत आई और इसके बनने में चार साल लगे। खनन के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी आशापुरा समूह ने ‘वंदे मातरम् मेमोरियल’ बनाकर भुजोड़ी को दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर एक खास पहचान दी है। इंडिया गेट से आप इस मेमोरियल में दाखिल होते हैं और खूबसूरत रास्ते से होते हुए आप सीधे संसद भवन पहुंचते हैं। इसके बाईं ओर गांधी जी के डांडी मार्च वाली दिल्ली के ग्यारह मूर्ति की प्रतिमूर्ति दिखेगी और तो दाईं ओर संसद भवन में बनी गांधीजी की विशाल प्रतिमा भी आपको दिख जाएगी। फिर आपको नजर आएगा आगरा फोर्ट और इसके भीतर गांधीजी, सरदार पटेल से लेकर आजादी के तमाम सपूतों की जीवंत आकृतियां।
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यहां हाल ही बनाए गए ‘वंदे मातरम् मेमोरियल’ में ब्रिटिश राज से लेकर आजादी तक का बेहतरीन सफरनामा है। वह भी कुछ इस अंदाज में, मानो वो सारे पल सजीव हो उठे हों। ये पूरा सफरनामा आधुनिक 4डी तकनीक के जरिये यहां बने संसद भवन के 17 शानदार कमरों में देखा जा सकता है।
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करीब 12 एकड़ में बने ‘वंदे मातरम् मेमोरियल’ में अकेले संसद भवन को एक लाख वर्ग फीट में बनाया गया है। इसमें करीब 60 करोड़ की लागत आई और इसके बनने में चार साल लगे। खनन के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी आशापुरा समूह ने ‘वंदे मातरम् मेमोरियल’ बनाकर भुजोड़ी को दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर एक खास पहचान दी है। इंडिया गेट से आप इस मेमोरियल में दाखिल होते हैं और खूबसूरत रास्ते से होते हुए आप सीधे संसद भवन पहुंचते हैं। इसके बाईं ओर गांधी जी के डांडी मार्च वाली दिल्ली के ग्यारह मूर्ति की प्रतिमूर्ति दिखेगी और तो दाईं ओर संसद भवन में बनी गांधीजी की विशाल प्रतिमा भी आपको दिख जाएगी। फिर आपको नजर आएगा आगरा फोर्ट और इसके भीतर गांधीजी, सरदार पटेल से लेकर आजादी के तमाम सपूतों की जीवंत आकृतियां।
संसद भवन के भीतर हॉल के बीचोंबीच भारत माता की शानदार और विशाल प्रतिमा बनाई गई है
वंदे मातरम् मेमोरियल
मुख्य संग्रहालय संसद भवन की इमारत में है, जहां आपको एक तरफ स्वराज आंदोलन के शांतिदूतों की झलक मिलेगी तो दूसरी तरफ क्रांति के नारे के साथ आजादी की जंग लड़ने वाले सपूतों की। 17 कमरों में आपको सन 1600 से लेकर 1947 तक का इतिहास 17 एपिसोड में 4डी तकनीक के जरिए दिखेगा। संसद भवन के भीतर मुख्य हॉल के बीचोंबीच भारत माता की शानदार और विशाल प्रतिमा बनाई गई है।
इस संग्रहालय का मकसद यहां आने वाले लोगों में देश प्रेम की भावना जगाने के साथ-साथ आजादी के महानायकों के प्रति सम्मान पैदा करना है। जिन लोगों ने दिल्ली में संसद भवन और देश की कई शानदार धरोहरों को नहीं देखा है, यह उन्हें ठीक वैसी ही अनुभूति कराने का प्रयास है। - रागिनी व्यास, वरिष्ठ प्रबंधक, आशापुरा समूह हीरालक्ष्मी क्राफ्ट पार्क के लिए भी मशहूर है।
‘वंदे मातरम् मेमोरियल’ के अलावा भुज का भुजोड़ी गांव पहले से ही यहां बने हीरालक्ष्मी क्राफ्ट पार्क की वजह से मशहूर है। इसमें आपको कच्छ के अलावा गुजरात के तमाम इलाकों के लोक और आदिवासी कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते नजर आ जाएंगे। शाम के वक्त शानदार रोशनी में जगमगाते इस पाक और मेमोरियल में आपको साउंड एंड लाइट का बेहतरीन नजारा भी देखने को मिलेगा।
इस संग्रहालय का मकसद यहां आने वाले लोगों में देश प्रेम की भावना जगाने के साथ-साथ आजादी के महानायकों के प्रति सम्मान पैदा करना है। जिन लोगों ने दिल्ली में संसद भवन और देश की कई शानदार धरोहरों को नहीं देखा है, यह उन्हें ठीक वैसी ही अनुभूति कराने का प्रयास है। - रागिनी व्यास, वरिष्ठ प्रबंधक, आशापुरा समूह हीरालक्ष्मी क्राफ्ट पार्क के लिए भी मशहूर है।
‘वंदे मातरम् मेमोरियल’ के अलावा भुज का भुजोड़ी गांव पहले से ही यहां बने हीरालक्ष्मी क्राफ्ट पार्क की वजह से मशहूर है। इसमें आपको कच्छ के अलावा गुजरात के तमाम इलाकों के लोक और आदिवासी कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते नजर आ जाएंगे। शाम के वक्त शानदार रोशनी में जगमगाते इस पाक और मेमोरियल में आपको साउंड एंड लाइट का बेहतरीन नजारा भी देखने को मिलेगा।