भीमा कोरेगांव: जस्टिस गवई ने गौतम नवलखा की याचिका से खुद को किया अलग
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भीमा कोरेगांव मामले को लेकर दाखिल गौतम नवलखा की याचिका से उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति जस्टिस बीआर गवई ने खुद को अलग कर लिया है। नवलखा ने याचिका में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ का कहना है कि मामले को 3 अक्तूबर को एक अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।
Bhima Koregaon case: Justice BR Gavai of Supreme Court recuses from the hearing the petition filed by Gautam Navlakha for quashing of the FIR against him. A Bench headed by Justice NV Ramana says matter be listed before another bench on October 3. pic.twitter.com/m9X6qqi58z
— ANI (@ANI) October 1, 2019विज्ञापन
इससे पहले उच्चतम न्यायालय के मुखिय न्यायाधीश रंजन गोगोई ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में नवलखा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करने वाले बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने की याचिका पर सुनवाई से सोमवार को खुद को अलग कर लिया था।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें, जिसमें मैं शामिल न रहूं। इस मामले को प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष पेश किया गया था। महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में कैविएट दायर कर अनुरोध किया कि कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसकी बात सुनी जाए।
क्या है पूरा मामला
13 सितंबर को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 2017 में कोरेगांव-भीमा हिंसा और कथित तौर पर माओवादी संपर्कों के लिए नवलखा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हमें लगता है कि विस्तृत जांच की जरूरत है।पुणे पुलिस ने 31 दिसंबर 2017 को एलगार परिषद के बाद जनवरी 2018 में नवलखा और अन्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। एलगार परिषद आयोजित करने के एक दिन बाद पुणे जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा भड़क गई थी। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में नवलखा और अन्य आरोपियों के माओवादियों से संबंध हैं और वे सरकार को गिराने का काम कर रहे हैं।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने नवलखा की गिरफ्तारी पर संरक्षण तीन सप्ताह की अवधि के लिए बढ़ा दिया था ताकि वह उसके फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील कर सकें। नवलखा और अन्य आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां निवारण कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। नवलखा के अलावा वरवरा राव, अरुण फरेरा, वर्नोन गोन्साल्विस और सुधा भारद्वाज मामले में अन्य आरोपी हैं।