कोरोना: देश का रोल मॉडल बना भीलवाड़ा, ऐसे पाया खतरनाक महामारी पर काबू, इन देशों ने भी उठाए जरूरी कदम
- 30 मार्च के बाद से भीलवाड़ा में कोरोना वायरस के मामलों में कमी देखी गई है।
- पिछले 8 दिनों में भीलवाड़ा में केवल एक ही कोरोना का मरीज सामने आया है।
- केंद्र अब देश के अन्य शहरों में भी भीलवाड़ा मॉडल लागू कर सकता है।
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विस्तार
राजस्थान की राजधानी जयपुर से लगभग 250 किलोमीटर दूर एक जिला है भीलवाड़ा। कोरोना का संक्रमण सबसे ज्यादा यहीं देखने को मिला। शुरुआत में तो ऐसा लगा जैसे यह दूसरा इटली बनने जा रहा है। 18 मार्च तक यहां कोरोना का एक भी मरीज नहीं था और 30 मार्च तक आते-आते 26 लोगों को Covid-19 से संक्रमित पाया गया। सरकार के पास कर्फ्यू लगाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था। लेकिन वक्त रहते कम्यूनिटी ट्रांसमिशन रोकने के लिए राज्य सरकार ने कुछ ऐसे कदम उठाए कि आज हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है। राज्य सरकार की ओर से किए गए उपायों की सराहना केन्द्र सरकार ने भी की है। आइए जानते हैं कोरोना से जंग में किस तरह देश का रोल मॉडल बना भीलवाड़ा।
भीलवाड़ा में 19 मार्च को एक ही अस्पताल में दो डॉक्टर कोरोना संक्रमित पाए गए थे। ये दोनों 6,000 से ज्यादा लोगों के संपर्क में आए थे। इसके बाद सरकार तुंरत हरकत में आ गई।
भीलवाड़ा में उठाए गए ये जरूरी कदम
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जिले में पहला कोरोना मरीज मिलते ही तत्काल कर्फ्यू लगा दिया गया।
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पहले ही दिन जिले की सीमाएं सील करते हुए 14 एंट्री पॉइंट्स पर चेक पोस्ट बनाईं, ताकि कोई भी शहर से न बाहर जा सके और न अंदर आ सके।
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रोडवेज बसों का संचालन पूरी तरह बंद किया गया। प्राइवेट गाड़ियों पर भी रोक लगा दी गई।
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उन इलाकों में जहां कोरोना से संक्रमित मरीज मिले वहां आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी गई।
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स्क्रीनिंग के लिए 2100 टीमें बनाई गईं। हर दिन हजारों की संख्या में लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है।
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सर्वे पूरा होने के बाद फिर से सर्वे कराया गया, जो कोरोना चेन ब्रेक होने तक लगातार जारी रहेगा। इसमें 1215 लोग सर्दी-जुकाम से ग्रसित मिले। भीलवाड़ा के करीब 28 लाख लोगों में से 24 लाख लोगों की स्क्रीनिंग करवा दी गई है। पिछले सर्वे में 6 हजार टीमें 24 लाख लोगों की स्क्रीनिंग 9 दिनों में हुई थी।
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पहले मरीज के संपर्क में आने वालों की सूची तैयार कर उनके घर पहरा लगाया गया। भीलवाड़ा में पिछले 10 दिनाें में 333 फीसदी की रफ्तार से संक्रमण फैला था लेकिन इसपर जल्द काबू पा लिया गया।
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मरीजों के संपर्क में आने वाले 6000 लोगों को क्वारंटीन किया गया। होटलों में उनके ठहरने की व्यवस्था की गई।
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कर्फ्यू के दौरान राशन, फल, सब्जी की होम डिलीवरी की व्यवस्था की गई।
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जिले में 14 दिन के कर्फ्यू के बावजूद 11 दिन का महाकर्फ्यू भी लगाया।
दूसरे देशों में उठाए गए ये कदम
दक्षिण कोरिया
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दक्षिण कोरिया में अभी तक कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जो भी उपाय अपनाए गए हैं, उनमें लॉकडाउन शामिल नहीं है। बिना लॉकडाउन के ही दक्षिण कोरिया इस महामारी से लड़ने में और देशों से कहीं आगे है।
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दक्षिण कोरिया में हर रोज करीब 20 हजार लोगों का परीक्षण किया जा रहा है। टेस्ट किए जाने का ये आंकड़ा बाकी दुनिया के किसी भी दूसरे देश से बहुत अधिक है।
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दक्षिण कोरिया में टेस्ट के लिए बनाए गए ये लैब्स 24x7 काम कर रहे हैं। और अन्य देशों की तुलना में जल्द से जल्द परिणाम भी सामने आ रहे हैं। इतना ही नहीं इस महामारी को देखते हुए कई लैब तैयार किए गए हैं।
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कई शहरों में सार्वजनिक निगरानी के लिए बड़ा सिस्टम तैयार किया गया है। पांच करोड़ की आबादी वाले इस देश में हर छोटी से छोटी कोशिश को भी तवज्जो दी जा रही है।
जर्मनी
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जर्मनी में 28 जनवरी को जैसे ही एक व्यक्ति कोरोना से पॉजिटिव मिला। उसके संपर्क में आए सभी लोगों क्वारंटाइन कर दिया गया। सभी यात्राएं रद्द कर दी गईं।
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कोरोना वायरस संक्रमण की सूरत में किसका टेस्ट होना है और किसका नहीं, इसे लेकर सभी देशों के अपने अलग-अलग मानदंड है। भारत में केवल उन्ही लोगों का टेस्ट किया जा रहा है जिन्होंने दूसरे देशों की यात्राएं की हैं लेकिन जर्मनी के मामले में ऐसा नहीं है।
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जर्मनी के पास अपना विकेंद्रीकृत मेडिकल सिस्टम है जो कि अन्य यूरोपीय देशों, इतना ही नहीं अमेरिका या भारत में भी नहीं है। वहां सरकार जर्मनी के सभी 16 संघीय राज्यों में टेस्टिंग प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं करती।
चीन
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कोरोना वायरस का केंद्र चीन ने वुहान को पूरे देश से अलग थलग कर दिया और करीब साढ़े पांच करोड़ लोगों के घरों से निकलने पर पाबंदी लगा दी।
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शुरुआत से ही संक्रमण को रोकने के लिए चीन ने वुहान में सैनिटाइजर का छिड़काव शुरू करा दिया।
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घर से बाहर निकलने और किसी से मिलने जैसी पाबंदियां लगा दी गई।
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लोगों के इलाज के लिए महज 10 दिनों में एक अस्थायी अस्पताल का निर्माण किया गया।
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हर नागरिक को उसकी ट्रैवल हिस्ट्री के हिसाब से अलग-थलग किया गया।
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चीन में हर किसी को मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया। मास्क ना लागने वालों को पहचानने का सिस्टम बनाया गया।