सियासी अखाड़े में बदली अंबेडकर की 125वीं जयंती
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इस दौरान कांग्रेस ने संसद भवन परिसर में श्रद्घांजलि सभा में पीएम मोदी की अनुपस्थिति का सवाल उठाया तो विपक्ष ने जयंती के ही दिन दलित छात्र रोहित वेमुला की मां और भाई का हिंदू धर्म छोड़ कर बौद्घ धर्म की दीक्षा लेने के मामले में भी मोदी सरकार को निशाने पर लिया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा और मोदी सरकार को दलित विरोधी करार दिया तो आम आदमी पार्टी ने गुड़गांव का नाम बदल कर द्रोणाचार्य के नाम पर गुरूग्राम रखने के फैसले को दलितों का अपमान करार दिया।
जयंती पर एक दूसरे पर हमले की शुरुआत संसद भवन परिसर में अंबेडकर को दिए जाने वाले श्रद्घांजलि कार्यक्रम से ही शुरू हो गई। कांग्रेस के पूर्व सांसद ने कार्यक्रम में मोदी की अनुपस्थिति पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है कि प्रधानमंत्री कार्यक्रम में मौजूद नहीं हैं, जबकि पहली बार संयुक्त राष्ट्र भी अंबेडकर की जयंती मना रहा है। इस पर पलटवार करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि महज एक परिवार के महिमामंडन तक सीमित रही कांग्रेस ने कभी बाबा साहेब का सम्मान नहीं किया।
शर्मा ने कहा कि मोदी सरकार ने आते ही अंबेडकर के योगदान को स्वीकार करते हुए उनसे जुड़े पांच स्थलों को पंचतीर्थ घोषित किया। दलित केंद्रित योजनाएं बनाई। उन्होंने कहा कि पीएम अंबेडकर के जन्म स्थल पर थे, ऐसे में संसद भवन परिसर में उनकी अनुपस्थिति पर कांग्रेस को राजनीति से बाज आना चाहिए।