{"_id":"59b6adc64f1c1be97f8b5ffa","slug":"bharatiya-mazdoor-sangh-workers-to-protest-against-modi-govt","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"केंद्र की अपनी ही सरकार के खिलाफ संसद मार्च करेगा भारतीय मजदूर संघ ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
केंद्र की अपनी ही सरकार के खिलाफ संसद मार्च करेगा भारतीय मजदूर संघ
संजय मिश्र/ नई दिल्ली
Updated Mon, 11 Sep 2017 11:26 PM IST
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मजदूरों के बीच कार्य करने वाले संघ के संगठन भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र की अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का निर्णय लिया है। भारतीय मजदूर संघ की अगुवाई में देशभर से करीब 5 लाख से ज्यादा मजदूर अगामी 17 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एकत्रित होकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ संसद तक मार्च करेंगे।
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भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय महासचिव बृजेश उपाध्याय का कहना है कि सरकार की नीतियों और पुराने विषयों की मांग को लेकर यह कार्यक्रम तय किया गया है। सरकार अपने वायदों को पूरा करे। वहीं भारतीय मजदूर संघ के वरिष्ठ अधिकारी पवन कुमार ने अमर उजाला को बताया कि मजदूरों की 12 सूत्रीय मांगों में से अधूरी पड़ी मांगों को लेकर बीएमएस ने अगामी 17 नवंबर को रैली का आयोजन रखा है। करीब 5 लाख मजदूर रामलीला मैदान में एकत्रित होकर जंतर-मंतर तक पैदल मार्च करेंगे।
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सूत्र बताते हैं कि अपनी ही सरकार के खिलाफ रैली करने के लिए भारतीय मजदूर संघ को संघ के शीर्ष नेतृत्व से भी हरी झंडी मिल गई है। भारतीय मजदूर संघ से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सरकार के खिलाफ रैली के लिए संगठन के प्रभारी एवं संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले से इस मामले में सहमति ली जा चुकी है। होसबोले की सहमति के बाद ही रविवार को आयोजन समिति के प्रमुख अधिकारियों की एक अहम बैठक मजदूर संघ कार्यालय में संपन्न हुई है।
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संघ का पहला संगठन, जो पीएम मोदी की नीति के खिलाफ सड़क पर ठोकेगा ताल
भारतीय मजदूर संघ पीएम मोदी की नीतियों के खिलाफ खुलेआम सड़क पर उतरने वाला संघ का पहला संगठन बन गया है। हालांकि सरकार की कई नीतियों के खिलाफ स्वदेशी जगारण मंच और भारतीय किसान संघ सरीखे संघ के संगठनों ने भी समय-समय पर अपनी आवाज बुलंद की है। मगर रामलीला मैदान से संसद तक मार्च का ऐलान कर सड़क पर उतरने के मामले में भारतीय मजदूर संघ भगवा परिवार का पहला संगठन बन गया है।
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के खिलाफ ऐसे कई अवसर दिखे थे। जब विहिप और स्वदेशी जागरण मंच सरीखे संगठन खुलेआम सडकों पर उतरे थे। लेकिन मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के तुरंत बाद ही संघ और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस बात की सहमति बनी थी कि असहमति वाले मुद्दों को आपस में बैठकर सुलझाएंगे। मगर केंद्र सरकार के तीन साल बीतने के बाद अब संघ के अपने ही संगठनों का सब्र टूटने लगा है। यही वजह है कि संघ के संगठन भारतीय मजदूर संघ ने रामलीला मैदान से संसद तक मार्च का ऐलान किया है।
मथुरा बैठक में भी हुई थी केंद्र सरकार की खिंचाई
सितंबर के पहले सप्ताह में मथुरा में संपन्न हुई संघ संगठनों की समन्वय बैठक में भी केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकार के क्रियाकलापों पर भगवा संगठनों ने जमकर खिंचाई की थी। संघ संगठनों की शिकायत आर्थिक मोर्चे पर सरकार की विफलता को लेकर ज्यादा है। समन्वय बैठक में संघ संगठनों ने देश में बढ़ रही बेरोजगारी की संख्या पर चिंता जताई थी। और सरकार को इस मामले में सकारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। भारतीय मजदूर संघ और स्वदेशी सरीखे संगठन नीति आयोग की कार्यप्रणाली के भी खिलाफ हैं।
भारतीय मजदूर संघ क्यों है मोदी सरकार से खफा
अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का ऐलान करने वाले भारतीय मजदूर संघ की नाराजगी कई वजहों से है। बताया जा रहा है कि विनिवेश को बढ़ावा देने, ठेका प्रथा को बढ़ावा देने, न्यून्तम वेतन निधार्रित करने, समान काम समान वेतन और 12 सूत्रीय मांगों में से अधूरी पड़ी मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर बीएमएस ने संसद मार्च सरीखा बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है।
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के खिलाफ ऐसे कई अवसर दिखे थे। जब विहिप और स्वदेशी जागरण मंच सरीखे संगठन खुलेआम सडकों पर उतरे थे। लेकिन मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के तुरंत बाद ही संघ और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस बात की सहमति बनी थी कि असहमति वाले मुद्दों को आपस में बैठकर सुलझाएंगे। मगर केंद्र सरकार के तीन साल बीतने के बाद अब संघ के अपने ही संगठनों का सब्र टूटने लगा है। यही वजह है कि संघ के संगठन भारतीय मजदूर संघ ने रामलीला मैदान से संसद तक मार्च का ऐलान किया है।
मथुरा बैठक में भी हुई थी केंद्र सरकार की खिंचाई
सितंबर के पहले सप्ताह में मथुरा में संपन्न हुई संघ संगठनों की समन्वय बैठक में भी केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकार के क्रियाकलापों पर भगवा संगठनों ने जमकर खिंचाई की थी। संघ संगठनों की शिकायत आर्थिक मोर्चे पर सरकार की विफलता को लेकर ज्यादा है। समन्वय बैठक में संघ संगठनों ने देश में बढ़ रही बेरोजगारी की संख्या पर चिंता जताई थी। और सरकार को इस मामले में सकारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। भारतीय मजदूर संघ और स्वदेशी सरीखे संगठन नीति आयोग की कार्यप्रणाली के भी खिलाफ हैं।
भारतीय मजदूर संघ क्यों है मोदी सरकार से खफा
अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का ऐलान करने वाले भारतीय मजदूर संघ की नाराजगी कई वजहों से है। बताया जा रहा है कि विनिवेश को बढ़ावा देने, ठेका प्रथा को बढ़ावा देने, न्यून्तम वेतन निधार्रित करने, समान काम समान वेतन और 12 सूत्रीय मांगों में से अधूरी पड़ी मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर बीएमएस ने संसद मार्च सरीखा बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है।