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क्या है भारत पूर्वानुमान प्रणाली?: इससे एक-एक गांव में मौसम में बदलाव की सटीक जानकारी दे सकेगा IMD, जानें

Tue, 27 May 2025 07:44 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 27 May 2025 07:44 PM IST
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सार
भारत फोरकास्टिंग सिस्टम (बीएफएस) क्या है? मौसम का पूर्वानुमान लगाने की मौजूदा तकनीकों में यह प्रणाली क्या बदलाव करेगी? यह किस तरह भारत के लिए अहम साबित होने वाली है? इसके अलावा यह बाकी पूर्वानुमान लगाने वाले सिस्टम से बेहतर कैसे है? आइये जानते हैं...
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Bharat Forecasting System India Metereological Department IMD Weather Earth Sciences Ministry IITM Climate
भारतीय मौसम विभाग की पूर्वानुमान तकनीक और बेहतर होगी। - फोटो : adobe stock

विस्तार

भारत में मौसम का पूर्वानुमान लगाने की तकनीक बीते वर्षों में काफी उन्नत हुई है। इसी का नतीजा है कि मौसम विभाग अब पहले से ज्यादा बेहतर और सटीक तरीके से गर्मी, वर्षा, ठंड, चक्रवात और अन्य तरह के मौसम से जुड़े अनुमानों की जानकारी देता है। अब इस बीच केंद्र सरकार ने एक नया भारत फोरकास्टिंग सिस्टम (भारत पूर्वानुमान प्रणाली) लॉन्च किया है, जिसे मौसम विभाग की तरफ से जारी होने वाले पूर्वानुमानों को और सटीक बनाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।


बताया गया है कि भारत फोरकास्टिंग सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी प्रणाली है। इसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिरियोलॉजी (आईआईटीएम) की तरफ से बनाया गया है। सोमवार को ही केंद्रीय पृथ्वी-विज्ञान मंत्रालय ने इसे लॉन्च कर दिया। अब मौसम विभाग इस मानसून सीजन से ही शुरू कर दिया जाएगा। 

BFS यानी भारत पूर्वानुमान प्रणाली से जुड़े प्रमुख तथ्य
BFS यानी भारत पूर्वानुमान प्रणाली से जुड़े प्रमुख तथ्य - फोटो : अमर उजाला
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह भारत फोरकास्टिंग सिस्टम (बीएफएस) क्या है? मौसम का पूर्वानुमान लगाने की मौजूदा तकनीकों में यह प्रणाली क्या बदलाव करेगी? यह किस तरह भारत के लिए अहम साबित होने वाली है? इसके अलावा यह बाकी पूर्वानुमान लगाने वाले सिस्टम से बेहतर कैसे है? आइये जानते हैं...

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क्या हैं भारत पूर्वानुमान प्रणाली की खासियतें?
आईआईटीएम के निदेशक सूर्यचंद्र राव के मुताबिक, "भारत पूर्वानुमान प्रणाली उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में छह किलोमीटर के दायरे तक का रिजॉल्यूशन रखता है। वहीं, ध्रुवों पर यह रेजोल्यूशन 7-8 किलोमीटर तक का है। वहीं हमारे मौजूदा सिस्टम की रेंज फिलहाल 12 किमी तक है। ऐसे में ज्यादा छोटे इलाके तक सटीक रेंज रखने वाला बीएफएस मौसम विभाग की क्षमताओं को बेहतर बनाएगा।"

केंद्रीय पृथ्वी-विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि बीएफएस भारत को मौसम भविष्यवाणी में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल करेगा। बीएफएस दुनिया का एकमात्र वैश्विक संख्यात्मक मौसम भविष्यवाणी मॉडल है, जो इतने हाई रिजॉल्यूशन पर काम करता है। यह भारत की पूर्वानुमान क्षमताओं में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम भारत की पंचायत स्तर की जरूरतों को भी पूरा करता है। 

पृथ्वी वित्रान मंत्रालय में सचिव एम. रविचंद्रन के मुताबिक, उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में मौसम अस्थिर होता है। मौसम पैटर्न में बदलाव होते रहते हैं। स्थानीय स्तर के परिवर्तनों को पकड़ने के लिए ऊंचे रिजॉल्यूशन मॉडल की जरूरत होती है। ऐसे में नया मॉडल क्षेत्रीय स्तर की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी कारगर होगा।

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रविचंद्रन ने कहा कि बीएफएस 6 किमीx 6 किमी के ग्रिड में मौसम की घटनाओं का विश्लेषण करता है, जो पहले के 12 किमी ग्रिड की तुलना में अधिक सटीक है। रविचंद्रन ने कहा कि देशभर में 40 डॉप्लर मौसम रडारों के नेटवर्क से प्राप्त डाटा का उपयोग बीएफएस मॉडल को चलाने में किया जाएगा, जिससे मौसम विभाग स्थानीय स्तर पर पूर्वानुमान और नाउकास्ट (अगले दो घंटों का मौसम पूर्वानुमान) जारी कर सकेगा। भविष्य में डॉप्लर रडारों की संख्या बढ़कर 100 हो जाएगी, जिससे पूरे देश में नाओकास्ट, यानी मौसम की मिनट-दर-मिनट की जानकारी संभव होगी।

भारत के लिए यह अहम क्यों?
  • भारत पूर्वानुमान प्रणाली (बीएफएस) ऐसे समय में आई है जब भारत के साथ पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसमी घटनाओं में भी भारी बदलाव देखे जा रहे हैं। इस सिस्टम की वजह से आने वाले समय में मौसम विभाग के पूर्वानुमान 30 फीसदी तक बेहतर हो जाएंगे। 
  • बीएफएस, जो कि 2022 से ही ट्रायल पर था, ने भीषण बारिश के पूर्वानुमान में 30% सुधार दिखाया है। खासकर मानसून वाले क्षेत्रों में पूर्वानुमान में सटीकता 64 फीसदी तक पहुंच जाती है। वहीं, चक्रवात की ट्रैकिंग काफी बेहतर रहती है।

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