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भारत बंद: 'मुंह पर नीला रंग पोतकर वो पत्थर फेंक रहे थे और हंस रहे थे'

Tue, 03 Apr 2018 09:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 03 Apr 2018 09:31 AM IST
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Bharat bandh: Delhi based researcher Said, Protesters were throwing stones and laughing

भारतबंद के हिंसक आंदोलन ने आम जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसी ही एक घटना को 30 साल की रिसर्चर ने मीडिया से साझा किया। रिसर्चर सुष्मिता सिंह सुबह के समय शताब्दी से दिल्ली से जयपुर के लिए निकली थीं। उन्हें और उनके सहयोगी को ऑफिस के काम से जयपुर जाना था, लेकिन ट्रेन में बैठने के बाद भी ट्रेन 30 मिनट तक नहीं चली। उन्होंने बताया, हमने ट्रेन के बाहर शोर सुना और कुछ देर बाद एक पत्थर ट्रेन की खिड़की में लगा। बाहर भारी संख्या में लोग नीले झंडे के साथ हाथ में लाठी और पत्थर लिए हुए थे। उनके चेहरे नीले रंग से रंगे हुए थे। उनमे से कुछ नाबालिग लग रहे थे, उनके बीच में दो बच्चे भी थे। 

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सुष्मिता ने बताया कि हम डर की वजह से सीटों के नीचे छुप गए। ट्रेन के स्टाफ ने सभी दरवाजे बंद कर दिये। कुछ यात्रियों ने ट्रेन की खिड़की पर पर्दे डाल दिये। हमें कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि बाहर क्या हो रहा है। यह सुबह 10 बजे का समय था। हमने इंटरनेट पर देखा, तब हमें पता लगा कि ये भारत बंद है। हमने देखा कि लाठी लिए हुए लोग ट्रेन के बाहर हाथ में फोन लेकर वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। वह केवल प्लेटफॉर्म पर ही नहीं चल रहे थे बल्कि ट्रेन के ऊपर भी थे। उनमें से कुछ हंस रहे थे। कुछ समय बाद महिलाएं भी आंदोलन करती हुईं दिखाई दी। जिसमें बुजुर्ग और जवान दोनों ही तरह की महिलाएं शामिल थीं। 
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करीब 10 मिनट तक लगातार पत्थरबाजी होती रही। हम सब डरे हुए थे। हम चारों तरफ से घिर गए थे। मैंने अपना लैपटाप और बिखरा हुआ सामान पैक कर लिया। जिससे जब मौका मिले तो हम भाग सकें। हमारा कोच पूरी तरह खाली था। उसमें केवल 20-25 लोग ही थे। हमारे कोच में लोग अपने घरों में मोबाइल से बात कर रहे थे और हंगामे की वीडियो बना रहे थे। मैं भी अपने परिवार और दोस्तों से लगातार बात कर रही थी। दोपहर करीब 2 बजे हमें चाय और बिस्किट मिला। कुछ देर बाद 2 कॉन्सटेबल हमारे कोच में आए और उन्होंने कहा कि सब कुछ ठीक है। अब हमारा डर कुछ कम हुआ। लेकिन हमें इस बात का डर था कि अगर पूरी रात ट्रेन में गुजारनी पड़ी तो क्या होगा। हालांकि 5.30 बजे ट्रेन ने चलना शुरू कर दिया। रात में 8.40 बजे हमारी ट्रेन ने रेवाड़ी क्रास किया। 

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