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Bengaluru Stone Quarry Mishap: बंगलूरू के खदान में बड़ा हादसा, चट्टान गिरने से बिहार के सात श्रमिकों की मौत
Thu, 02 Jul 2026 10:48 AM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 02 Jul 2026 10:48 AM IST
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बंगलूरू खदान हादसा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में गुरुवार को एक पत्थर खदान में बड़ा हादसा हो गया। एक विशाल चट्टान गिरने से बिहार के सात श्रमिकों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि यह दुखद घटना सुबह तड़के हुई। यह हादसा बंगलूरू साउथ तालुक के मदापट्टाना स्थित एक पत्थर खदान में हुआ। मृतक सभी दिहाड़ी मजदूर थे और वे एक पत्थर क्रशर स्थल पर काम कर रहे थे। फिलहाल, बचाव अभियान जारी है। पुलिस और बचाव दल की टीमें फंसे हुए मजदूरों की तलाश में मलबा हटा रहे हैं।
हादसे के बाद क्या हुआ?
अधिकारियों ने बताया कि मृतकों के शव अभी पत्थरों के नीचे से निकाले जाने बाकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गिरने के दौरान कई भारी पत्थरों ने खुदाई करने वाली मशीनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। घटनास्थल पर मौजूद एक मजदूर विनोद ने बताया कि घटना के समय पीड़ित नाइट शिफ्ट के बाद काम संभाल रहे थे। जब पत्थर गिरा, तो कई मजदूर उसके नीचे दब गए। कुछ के पैर कट गए, तो कुछ के हाथ। हम उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं कर पाए। मैं एक मशीन चला रहा था और उस जगह से लगभग 10 मीटर दूर था। पीड़ित खदान में ड्रिलिंग कर रहे थे और उन्हें अपने ऊपर मौजूद पत्थर का पता नहीं चला।
ये भी पढ़ें- Bengaluru Quarry Tragedy: पत्थर गिरने के कारण पर पुलिस क्या बोली? MLA ने अवैध खनन के आरोप लगाए; रेस्क्यू जारी
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पुलिस ने क्या बताया?
मामले की सूचना मिलने पर घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने बताया कि श्रमिक गिरी हुई चट्टान के नीचे फंस गए और मौके पर ही उनकी जान चली गई। पुलिस ने बताया कि दुर्घटना उस समय हुई जब मजदूर खदान के संचालन कार्य में लगे थे। हादसे की सूचना मिलते ही बचाव कर्मी और पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने तत्काल बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया।
घायलों का उपचार और घटनास्थल पर कार्रवाई
घायलों को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में कई श्रमिकों के घायल होने का संकेत मिला है। घायलों की सटीक संख्या की पुष्टि अभी की जा रही है। अधिकारियों ने मलबे को हटाने का काम शुरू किया। वे यह पता लगाने में जुट गए कि कहीं कोई अन्य श्रमिक तो मलबे में नहीं फंसा है। पूरे क्षेत्र को तुरंत सील कर दिया गया था ताकि बचाव कार्य सुचारु रूप से चल सके।
मृतकों की पहचान और आगे की जांच कैसे?
एक श्रमिक ने बताया कि दुर्घटना के समय घटनास्थल पर करीब 18 मजदूर मौजूद थे। उसके अनुसार, करीब 40 फीट की ऊंचाई से एक बड़ी चट्टान अचानक मजदूरों पर गिर गई। पुलिस ने बताया कि सभी मृतक बिहार के मूल निवासी थे। उनके परिवारों को इस दुखद घटना की सूचना देने के प्रयास जारी हैं। चट्टान गिरने के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि खदान में सुरक्षा मानदंडों का कोई उल्लंघन या लापरवाही तो नहीं हुई थी।
क्या इस मामले में अवैध खनन का भी एंगल?
पत्थर खदान में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सात मजदूरों की मौत पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। यशवंतपुर के विधायक एस.टी. सोमशेखर ने इस हादसे के लिए अवैध खनन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लंबे समय से नियमों की अनदेखी कर खदानें चलाई जा रही थीं और इस बारे में उन्होंने पहले भी विधानसभा, याचिका समिति तथा संबंधित विभागों के सामने मुद्दा उठाया था।
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हादसे के बाद क्या हुआ?
अधिकारियों ने बताया कि मृतकों के शव अभी पत्थरों के नीचे से निकाले जाने बाकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गिरने के दौरान कई भारी पत्थरों ने खुदाई करने वाली मशीनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। घटनास्थल पर मौजूद एक मजदूर विनोद ने बताया कि घटना के समय पीड़ित नाइट शिफ्ट के बाद काम संभाल रहे थे। जब पत्थर गिरा, तो कई मजदूर उसके नीचे दब गए। कुछ के पैर कट गए, तो कुछ के हाथ। हम उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं कर पाए। मैं एक मशीन चला रहा था और उस जगह से लगभग 10 मीटर दूर था। पीड़ित खदान में ड्रिलिंग कर रहे थे और उन्हें अपने ऊपर मौजूद पत्थर का पता नहीं चला।
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पुलिस ने क्या बताया?
मामले की सूचना मिलने पर घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने बताया कि श्रमिक गिरी हुई चट्टान के नीचे फंस गए और मौके पर ही उनकी जान चली गई। पुलिस ने बताया कि दुर्घटना उस समय हुई जब मजदूर खदान के संचालन कार्य में लगे थे। हादसे की सूचना मिलते ही बचाव कर्मी और पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने तत्काल बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया।
घायलों का उपचार और घटनास्थल पर कार्रवाई
घायलों को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में कई श्रमिकों के घायल होने का संकेत मिला है। घायलों की सटीक संख्या की पुष्टि अभी की जा रही है। अधिकारियों ने मलबे को हटाने का काम शुरू किया। वे यह पता लगाने में जुट गए कि कहीं कोई अन्य श्रमिक तो मलबे में नहीं फंसा है। पूरे क्षेत्र को तुरंत सील कर दिया गया था ताकि बचाव कार्य सुचारु रूप से चल सके।
मृतकों की पहचान और आगे की जांच कैसे?
एक श्रमिक ने बताया कि दुर्घटना के समय घटनास्थल पर करीब 18 मजदूर मौजूद थे। उसके अनुसार, करीब 40 फीट की ऊंचाई से एक बड़ी चट्टान अचानक मजदूरों पर गिर गई। पुलिस ने बताया कि सभी मृतक बिहार के मूल निवासी थे। उनके परिवारों को इस दुखद घटना की सूचना देने के प्रयास जारी हैं। चट्टान गिरने के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि खदान में सुरक्षा मानदंडों का कोई उल्लंघन या लापरवाही तो नहीं हुई थी।
क्या इस मामले में अवैध खनन का भी एंगल?
पत्थर खदान में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सात मजदूरों की मौत पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। यशवंतपुर के विधायक एस.टी. सोमशेखर ने इस हादसे के लिए अवैध खनन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लंबे समय से नियमों की अनदेखी कर खदानें चलाई जा रही थीं और इस बारे में उन्होंने पहले भी विधानसभा, याचिका समिति तथा संबंधित विभागों के सामने मुद्दा उठाया था।