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Dharmasthala Case: धर्मस्थल मंदिर के खिलाफ अपमानजनक सामग्री तत्काल हटाएं, बंगलूरू की अदालत ने दिया आदेश
Fri, 29 Aug 2025 11:30 PM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलूरू
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 29 Aug 2025 11:30 PM IST
सार
बंगलूरू के 17वीं अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायालय ने सामूहिक दफन से जुड़े धर्मस्थल मंदिर और उसके धर्माधिकारी डी. वीरेंद्र हेगड़े और उनके परिवार को निशाना बनाने वाली अपमानजनक सामग्री को तत्काल हटाने का आदेश दिया है। पांच दिनों की सुनवाई के बाद, सत्र न्यायालय ने अपनी पूर्व निषेधाज्ञा की पुष्टि की।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
बंगलूरू की एक अदालत ने शुक्रवार को धर्मस्थल मंदिर और उसके धर्माधिकारी डी. वीरेंद्र हेगड़े तथा उनके परिवार को निशाना बनाने वाली अपमानजनक सामग्री की तत्काल हटाने के आदेश दिया। यह मामला सामूहिक दफन मामले से जुड़ा है। 17वीं अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायालय का यह फैसला उच्चतम न्यायालय के पूर्व निर्देशों के अनुरूप है।
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मानहानि का यह मुकदमा हेगड़े के भाई डी. हर्षेंद्र कुमार ने दायर किया था। उन्होंने कार्यकर्ता महेश शेट्टी तिमारोडी, गिरीश मट्टनवर, जयंत टी और तथाकथित 'बुरुडे गिरोह' से कथित रूप से जुड़े अन्य लोगों द्वारा प्रसारित अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ राहत मांगी थी। वीडियो, व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम पोस्ट और फेसबुक रीलों की जांच के बाद अदालत ने पाया कि आरोप 'निराधार और नुकसानदेह' थे। अदालत ने आगे कोई अपमानजनक गतिविधि न करने का आदेश दिया। साथ ही प्लेटफार्मों को आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट हटाने का निर्देश दिया।
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने रद्द कर दी थी अंतरिम निषेधाज्ञा
इससे पहले, कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अंतरिम निषेधाज्ञा रद्द कर दी थी, जिसके बाद हर्षेंद्र कुमार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए, निचली अदालत को मामले का स्वतंत्र रूप से आकलन करने का निर्देश दिया। पांच दिनों की सुनवाई के बाद, सत्र न्यायालय ने अपनी पूर्व निषेधाज्ञा की पुष्टि की।
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डिजिटल फ्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने में अहम साबित होगा फैसला
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने में अहम साबित होगा। एक कानूनी विशेषज्ञ ने कहा, 'यह फैसला साफ संदेश देता है कि बिना सबूत के मानहानिकारक आरोप बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।' शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता एस. राजशेखर हिलियारु ने पैरवी की।