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Shivraj Singh: अमेरिकी टैरिफ के बीच केंद्रीय मंत्री ने की स्वदेशी अपनाने की अपील, कहा- देश एकजुट होना चाहिए
Fri, 29 Aug 2025 11:15 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैसूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैसूर
Published by: बशु जैन
Updated Fri, 29 Aug 2025 11:15 PM IST
सार
सुत्तूर मठ में जगद्गुरु श्री शिवरात्रि राजेंद्र महास्वामीजी की 110वीं वर्षगांठ समारोह में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारे सामने जो नवीनतम चुनौतियां हैं। टैरिफ का सवाल उठाया जा रहा है। टैरिफ हम पर थोपा जा रहा है। ऐसे माहौल में देश में देशभक्ति की भावना फिर से जागृत होनी चाहिए।
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शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री
- फोटो : ANI
विस्तार
अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वदेशी अपनाने की अपील की है। उन्होंने लोगों सेराजनीतिक मतभेद भुलाकर राष्ट्रहित में एकजुट होने की अपील की। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं सभी से एक अनुरोध करना चाहता हूं। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब राष्ट्रीय हित की बात आती है तो पूरे देश को एकजुट होना चाहिए।
सुत्तूर मठ में जगद्गुरु श्री शिवरात्रि राजेंद्र महास्वामीजी की 110वीं वर्षगांठ समारोह में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारे सामने जो नवीनतम चुनौतियां हैं। टैरिफ का सवाल उठाया जा रहा है। टैरिफ हम पर थोपा जा रहा है। ऐसे माहौल में देश में देशभक्ति की भावना फिर से जागृत होनी चाहिए। प्रत्येक भारतीय को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने दैनिक जीवन में केवल उन्हीं उत्पादों का उपयोग करें, जो हमारे देश में उत्पादित हों। जिन्हें हमारे लोगों ने निर्मित किया हो। जिनमें भारत की खुशबू हो।
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मेड इन इंडिया उत्पादों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। हमें पूरा विश्वास है कि भारत की देशभक्त जनता एक नया इतिहास लिखेगी। उन्होंने कहा कि यदि आप दुनिया को बचाना चाहते हैं, तो दुनिया जिस दिशा में जा रही है, दुनिया के कुछ देश तानाशाहों की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जो शेष विश्व के लिए संकट बन रहा है।
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उन्होंने कहा कि भारत विश्व का एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जो मानवता को शांति की ओर ले जा सकता है। इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है। यह जरूरी है कि भारत और मजबूत बने और दुनिया को राह दिखाए। उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारत अमेरिका से लाल गेहूं आयात करने के लिए मजबूर था, लेकिन आज देश न केवल गेहूं का निर्यात कर रहा है, बल्कि पूरे देश में चावल का विशाल भंडार है, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपने लोगों का पेट भरेगा, बल्कि दुनिया की खाद्य टोकरी बन जाएगा। उन्होंने पश्चिमी देशों की तुलना में छोटी कृषि भूमि वाले भारतीय किसानों के समक्ष चुनौतियों के बारे में भी बात की। कृषि मंत्री ने कहा कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्राज़ील जैसे देशों में किसानों के पास बड़ी जमीन है, जबकि हमारे देश में किसानों के पास सिर्फ एक या दो हेक्टेयर, एक या दो एकड़ या ढाई एकड़ कृषि भूमि है। इसलिए हमें कृषि को लाभदायक बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास करने होंगे।
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सुत्तूर मठ में जगद्गुरु श्री शिवरात्रि राजेंद्र महास्वामीजी की 110वीं वर्षगांठ समारोह में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारे सामने जो नवीनतम चुनौतियां हैं। टैरिफ का सवाल उठाया जा रहा है। टैरिफ हम पर थोपा जा रहा है। ऐसे माहौल में देश में देशभक्ति की भावना फिर से जागृत होनी चाहिए। प्रत्येक भारतीय को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने दैनिक जीवन में केवल उन्हीं उत्पादों का उपयोग करें, जो हमारे देश में उत्पादित हों। जिन्हें हमारे लोगों ने निर्मित किया हो। जिनमें भारत की खुशबू हो।
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केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मेड इन इंडिया उत्पादों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। हमें पूरा विश्वास है कि भारत की देशभक्त जनता एक नया इतिहास लिखेगी। उन्होंने कहा कि यदि आप दुनिया को बचाना चाहते हैं, तो दुनिया जिस दिशा में जा रही है, दुनिया के कुछ देश तानाशाहों की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जो शेष विश्व के लिए संकट बन रहा है।
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उन्होंने कहा कि भारत विश्व का एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जो मानवता को शांति की ओर ले जा सकता है। इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है। यह जरूरी है कि भारत और मजबूत बने और दुनिया को राह दिखाए। उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारत अमेरिका से लाल गेहूं आयात करने के लिए मजबूर था, लेकिन आज देश न केवल गेहूं का निर्यात कर रहा है, बल्कि पूरे देश में चावल का विशाल भंडार है, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपने लोगों का पेट भरेगा, बल्कि दुनिया की खाद्य टोकरी बन जाएगा। उन्होंने पश्चिमी देशों की तुलना में छोटी कृषि भूमि वाले भारतीय किसानों के समक्ष चुनौतियों के बारे में भी बात की। कृषि मंत्री ने कहा कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्राज़ील जैसे देशों में किसानों के पास बड़ी जमीन है, जबकि हमारे देश में किसानों के पास सिर्फ एक या दो हेक्टेयर, एक या दो एकड़ या ढाई एकड़ कृषि भूमि है। इसलिए हमें कृषि को लाभदायक बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास करने होंगे।