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बंगाल में फिर बनेगी सांप के जहर की दवा: 150 करोड़ का प्लांट प्रस्तावित; 15 साल बाद क्यों पड़ी जरूरत?
Sun, 06 Sep 2026 08:25 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 06 Sep 2026 08:25 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में करीब 15 साल बाद एंटी-स्नेक वेनम का उत्पादन फिर शुरू करने की तैयारी है। बंगाल केमिकल्स ने करीब 150 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव रखा है और सरकार से खरीद की गारंटी मांगी है। कंपनी ने प्रति वायल खरीद कीमत 450 से बढ़ाकर 700-800 रुपये करने की मांग की है। फिलहाल सरकार और कंपनी के बीच बातचीत शुरुआती चरण में है।
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क्या बंगाल में बनेगी सांप के जहर की दवा
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में करीब 15 साल बाद एक बार फिर एंटी-स्नेक वेनम बनाने की तैयारी शुरू हुई है। कोलकाता की बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (बीसीपीएल) ने राज्य में एंटी-स्नेक वेनम का उत्पादन दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। कंपनी इसके लिए करीब 150 करोड़ रुपये का प्लांट लगाने की योजना बना रही है। कंपनी का कहना है कि बंगाल में सांप काटने के मामले ज्यादा हैं। ऐसे में राज्य को दूसरे हिस्सों से आने वाली दवा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
कंपनी की क्या है योजना?
बीपीसीएल ने इस प्रस्ताव को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार से बातचीत शुरू कर दी है। कंपनी के प्रबंध निदेशक एस घोष चौधरी ने बताया कि उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के सामने यह प्रस्ताव रखा है। उन्होंने सरकार से एंटी-स्नेक वेनम की खरीद की गारंटी देने की मांग की है। साथ ही कंपनी चाहती है कि एक वायल की खरीद कीमत भी बढ़ाई जाए। घोष चौधरी के मुताबिक अभी एक वायल के लिए करीब 450 रुपये मिलते हैं। कंपनी ने इसे बढ़ाकर 700 से 800 रुपये करने की मांग की है। उनका कहना है कि इसी आधार पर करीब 150 करोड़ रुपये की परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने भी कंपनी के साथ शुरुआती बातचीत की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि बंगाल केमिकल्स के साथ एंटी-स्नेक वेनम को लेकर शुरुआती चर्चा हुई है। कंपनी ने सरकार से कुछ कदम उठाने की मांग की है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वह इन मांगों के बारे में मुख्यमंत्री को जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री को जानकारी देने की बात कहते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अभी बातचीत शुरुआती स्तर पर ही है। यानी फिलहाल इस परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने की स्थिति नहीं है।
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ज्यादा कीमत के बावजूद सरकार को कैसे होगा फायदा?
कंपनी के प्रबंध निदेशक का दावा है कि पहली नजर में एक वायल की कीमत बढ़ना सरकार के लिए महंगा लग सकता है। लेकिन पूरे इलाज का खर्च देखा जाए तो स्थानीय स्तर पर एंटी-स्नेक वेनम बनाना ज्यादा किफायती साबित हो सकता है। उन्होंने बंगाल केमिकल्स के पुराने अनुभव का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि 2010 और उससे पहले आमतौर पर सांप काटने वाले मरीज को ठीक होने के लिए 10 से 15 वायल एंटी-स्नेक वेनम की जरूरत होती थी। अब दूसरे राज्यों से आने वाले एंटी-स्नेक वेनम के मामले में मरीजों को 60 वायल तक की जरूरत पड़ रही है।
बाहर से आने वाली दवा में ज्यादा वायल क्यों?
स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने इसके पीछे एक अहम वजह बताई है। उन्होंने कहा कि बंगाल में पाए जाने वाले सांपों के जहर की विषाक्तता दक्षिण और पश्चिम भारत के सांपों की तुलना में ज्यादा है। इसी वजह से दक्षिण और पश्चिम भारत से मंगाए जाने वाले एंटी-स्नेक वेनम की ज्यादा मात्रा की जरूरत पड़ती है। इसी आधार पर कंपनी का तर्क है कि वायल की खरीद कीमत बढ़ने के बावजूद कुल इलाज लागत को देखते हुए स्थानीय उत्पादन सरकार के लिए फायदेमंद हो सकता है।
यह भी पढ़ें: गणेश उत्सव से पहले महाराष्ट्र में डीजे पर घमासान: मंत्री बोले- स्वास्थ्य से समझौता नहीं, क्या है पूरा मामला?
क्या दूसरे राज्यों को भी होगा फायदा?
प्रस्तावित प्लांट का फायदा केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहने की बात कही गई है। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, अगर यह उत्पादन केंद्र स्थापित होता है तो यहां से पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों को भी एंटी-स्नेक वेनम की आपूर्ति की जा सकती है। इससे दूसरे राज्यों से दवा मंगाने पर निर्भरता कम होगी। साथ ही आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतें भी कम हो सकती हैं। फिलहाल इन सभी पहलुओं को लेकर राज्य सरकार और बंगाल केमिकल्स के बीच बातचीत चल रही है।
बंगाल केमिकल्स का पुराना इतिहास क्या है?
बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की शुरुआत कोलकाता में 1892 में एक छोटे उद्यम के तौर पर हुई थी। इसे 1901 में औपचारिक रूप से बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के रूप में शामिल किया गया। आज यह एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। अब कंपनी करीब डेढ़ दशक के अंतराल के बाद एंटी-स्नेक वेनम के उत्पादन में लौटने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने इसके लिए राज्य सरकार से खरीद की गारंटी और बेहतर खरीद कीमत की मांग रखी है। हालांकि, अभी यह पूरी प्रक्रिया शुरुआती बातचीत के स्तर पर है।
बंगाल में इस परियोजना की जरूरत क्यों बताई जा रही है?
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार के अध्ययनों में पश्चिम बंगाल में सांप काटने से होने वाली मौतों की संख्या तुलनात्मक रूप से ज्यादा सामने आई है। ऐसे में राज्य में ही एंटी-स्नेक वेनम का उत्पादन शुरू होने से दवा की उपलब्धता को लेकर स्थिति बेहतर हो सकती है। फिलहाल कंपनी और सरकार के बीच बातचीत का अगला कदम क्या होगा, यह मुख्यमंत्री के सामने कंपनी की मांगें रखे जाने के बाद स्पष्ट होगा। इतना तय है कि करीब 15 साल बाद बंगाल में एंटी-स्नेक वेनम का उत्पादन फिर शुरू करने की पहल हुई है और इसके लिए 150 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव सामने आया है।
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कंपनी की क्या है योजना?
बीपीसीएल ने इस प्रस्ताव को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार से बातचीत शुरू कर दी है। कंपनी के प्रबंध निदेशक एस घोष चौधरी ने बताया कि उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के सामने यह प्रस्ताव रखा है। उन्होंने सरकार से एंटी-स्नेक वेनम की खरीद की गारंटी देने की मांग की है। साथ ही कंपनी चाहती है कि एक वायल की खरीद कीमत भी बढ़ाई जाए। घोष चौधरी के मुताबिक अभी एक वायल के लिए करीब 450 रुपये मिलते हैं। कंपनी ने इसे बढ़ाकर 700 से 800 रुपये करने की मांग की है। उनका कहना है कि इसी आधार पर करीब 150 करोड़ रुपये की परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने भी कंपनी के साथ शुरुआती बातचीत की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि बंगाल केमिकल्स के साथ एंटी-स्नेक वेनम को लेकर शुरुआती चर्चा हुई है। कंपनी ने सरकार से कुछ कदम उठाने की मांग की है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वह इन मांगों के बारे में मुख्यमंत्री को जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री को जानकारी देने की बात कहते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अभी बातचीत शुरुआती स्तर पर ही है। यानी फिलहाल इस परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने की स्थिति नहीं है।
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ज्यादा कीमत के बावजूद सरकार को कैसे होगा फायदा?
कंपनी के प्रबंध निदेशक का दावा है कि पहली नजर में एक वायल की कीमत बढ़ना सरकार के लिए महंगा लग सकता है। लेकिन पूरे इलाज का खर्च देखा जाए तो स्थानीय स्तर पर एंटी-स्नेक वेनम बनाना ज्यादा किफायती साबित हो सकता है। उन्होंने बंगाल केमिकल्स के पुराने अनुभव का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि 2010 और उससे पहले आमतौर पर सांप काटने वाले मरीज को ठीक होने के लिए 10 से 15 वायल एंटी-स्नेक वेनम की जरूरत होती थी। अब दूसरे राज्यों से आने वाले एंटी-स्नेक वेनम के मामले में मरीजों को 60 वायल तक की जरूरत पड़ रही है।
बाहर से आने वाली दवा में ज्यादा वायल क्यों?
स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने इसके पीछे एक अहम वजह बताई है। उन्होंने कहा कि बंगाल में पाए जाने वाले सांपों के जहर की विषाक्तता दक्षिण और पश्चिम भारत के सांपों की तुलना में ज्यादा है। इसी वजह से दक्षिण और पश्चिम भारत से मंगाए जाने वाले एंटी-स्नेक वेनम की ज्यादा मात्रा की जरूरत पड़ती है। इसी आधार पर कंपनी का तर्क है कि वायल की खरीद कीमत बढ़ने के बावजूद कुल इलाज लागत को देखते हुए स्थानीय उत्पादन सरकार के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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क्या दूसरे राज्यों को भी होगा फायदा?
प्रस्तावित प्लांट का फायदा केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहने की बात कही गई है। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, अगर यह उत्पादन केंद्र स्थापित होता है तो यहां से पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों को भी एंटी-स्नेक वेनम की आपूर्ति की जा सकती है। इससे दूसरे राज्यों से दवा मंगाने पर निर्भरता कम होगी। साथ ही आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतें भी कम हो सकती हैं। फिलहाल इन सभी पहलुओं को लेकर राज्य सरकार और बंगाल केमिकल्स के बीच बातचीत चल रही है।
बंगाल केमिकल्स का पुराना इतिहास क्या है?
बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की शुरुआत कोलकाता में 1892 में एक छोटे उद्यम के तौर पर हुई थी। इसे 1901 में औपचारिक रूप से बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के रूप में शामिल किया गया। आज यह एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। अब कंपनी करीब डेढ़ दशक के अंतराल के बाद एंटी-स्नेक वेनम के उत्पादन में लौटने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने इसके लिए राज्य सरकार से खरीद की गारंटी और बेहतर खरीद कीमत की मांग रखी है। हालांकि, अभी यह पूरी प्रक्रिया शुरुआती बातचीत के स्तर पर है।
बंगाल में इस परियोजना की जरूरत क्यों बताई जा रही है?
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार के अध्ययनों में पश्चिम बंगाल में सांप काटने से होने वाली मौतों की संख्या तुलनात्मक रूप से ज्यादा सामने आई है। ऐसे में राज्य में ही एंटी-स्नेक वेनम का उत्पादन शुरू होने से दवा की उपलब्धता को लेकर स्थिति बेहतर हो सकती है। फिलहाल कंपनी और सरकार के बीच बातचीत का अगला कदम क्या होगा, यह मुख्यमंत्री के सामने कंपनी की मांगें रखे जाने के बाद स्पष्ट होगा। इतना तय है कि करीब 15 साल बाद बंगाल में एंटी-स्नेक वेनम का उत्पादन फिर शुरू करने की पहल हुई है और इसके लिए 150 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव सामने आया है।